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RSS कार्यक्रम में VC की मौजूदगी: CM सतीशन ने सार्वजनिक माफी की मांग की, केरल सीएम के समर्थन में प्रियांक खरगे
एएनआई, बंगलूरू
Published by: Pavan
Updated Mon, 15 Jun 2026 04:58 PM IST
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सार
दक्षिण के राज्यों में आरएसएस के कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के शामिल होने का मामला तूल पकड़ने लगा है। दरअसल, केरल के सीएम वीडी सतीशन ने तीन कुलपतियों के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने पर उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है। इसके बाद कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने उनका समर्थन किया है। हालांकि केरल भाजपा ने इस मामले में सीएम के रुख का विरोध किया है।
प्रियांक खरगे, मंत्री, कर्नाटक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केरल के कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की उस मांग का समर्थन किया है, जिसमें कुलपतियों से सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही गई है।
यह भी पढ़ें- आधार पर आर-पार: केवल पहचान पत्र के रूप में हो इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होगी अहम सुनवाई
'आप छात्रों को क्या संदेश दे रहे हैं?'
प्रियांक खरगे ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि वे किसी ऐसे संगठन के कार्यक्रम में शामिल होते हैं, जो एक विशेष विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, तो इससे छात्रों के बीच गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे यह संकेत मिलता है कि छात्रों को भी उसी विचारधारा का पालन करना चाहिए।
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छात्रों को प्रेरित करने की सोच अपनानी चाहिए- खरगे
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए, जहां शिक्षा, ज्ञान और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों को प्रगतिशील सोच अपनानी चाहिए और छात्रों को भी उसी दिशा में प्रेरित करना चाहिए।
सीएम सतीशन ने की थी तीन कुलपतियों की आलोचना
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल के मुख्यमंत्री वीडी. सतीशन ने आरएसएस कार्यक्रम में शामिल हुए तीन कुलपतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद समाज में सम्मानित माना जाता है और ऐसे कार्यक्रम में भाग लेकर उन्होंने अपने पद की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है। सतीशन ने आरोप लगाया कि आरएसएस का नेतृत्व सांप्रदायिक विचारों को बढ़ावा देता है और ऐसे किसी भी कदम को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने तीनों कुलपतियों से जनता से माफी मांगने की मांग भी की।
यह भी पढ़ें- पंजाब में आरटीई नियमों की अनदेखी?: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
केरल भाजपा ने सीएम के रुख का किया विरोध
वहीं, इस मामले में भाजपा ने मुख्यमंत्री के रुख का विरोध किया है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा कुलपतियों को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून की रक्षा की शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। चंद्रशेखर ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को सामान्य सार्वजनिक सहभागिता बताया। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है और शिक्षा संस्थानों की निष्पक्षता तथा सार्वजनिक जीवन में विचारधारा की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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'आप छात्रों को क्या संदेश दे रहे हैं?'
प्रियांक खरगे ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि वे किसी ऐसे संगठन के कार्यक्रम में शामिल होते हैं, जो एक विशेष विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, तो इससे छात्रों के बीच गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे यह संकेत मिलता है कि छात्रों को भी उसी विचारधारा का पालन करना चाहिए।
छात्रों को प्रेरित करने की सोच अपनानी चाहिए- खरगे
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए, जहां शिक्षा, ज्ञान और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों को प्रगतिशील सोच अपनानी चाहिए और छात्रों को भी उसी दिशा में प्रेरित करना चाहिए।
सीएम सतीशन ने की थी तीन कुलपतियों की आलोचना
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल के मुख्यमंत्री वीडी. सतीशन ने आरएसएस कार्यक्रम में शामिल हुए तीन कुलपतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद समाज में सम्मानित माना जाता है और ऐसे कार्यक्रम में भाग लेकर उन्होंने अपने पद की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है। सतीशन ने आरोप लगाया कि आरएसएस का नेतृत्व सांप्रदायिक विचारों को बढ़ावा देता है और ऐसे किसी भी कदम को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने तीनों कुलपतियों से जनता से माफी मांगने की मांग भी की।
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केरल भाजपा ने सीएम के रुख का किया विरोध
वहीं, इस मामले में भाजपा ने मुख्यमंत्री के रुख का विरोध किया है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा कुलपतियों को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून की रक्षा की शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। चंद्रशेखर ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को सामान्य सार्वजनिक सहभागिता बताया। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है और शिक्षा संस्थानों की निष्पक्षता तथा सार्वजनिक जीवन में विचारधारा की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।