Nepali Gorkha in Indian Army: कब तक 'अग्निवीर' बनने के लिए तैयार होंगे नेपाली गोरखा, भारत को क्यों है इंतजार?
Nepali Gorkha in Indian Army: सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर वेट एंड वॉच की स्थिति में है। अगर नेपाली गोरखा 'अग्निवीर' बनने के लिए नहीं आते हैं, तो उनकी खाली जगह को भारत में रह रहे गोरखाओं से भरा जाएगा...
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भारतीय सेना में बतौर अग्निवीर, नेपाली गोरखाओं की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। नेपाल की सरकार एवं विपक्षी दल, अग्निपथ योजना को लेकर उत्साहित नहीं हैं। अग्निवीरों की भर्ती के लिए वहां दो जगहों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन नेपाल सरकार की मंजूरी न मिलने के चलते उसे स्थगित करना पड़ा। दूसरा, नेपाल में चुनाव सिर पर हैं। चुनाव में विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर शेर बहादुर देउबा सरकार को घेर रही हैं।
भारत में रह रहे गोरखाओं को मिलेगी जगह
सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर वेट एंड वॉच की स्थिति में है। अगर नेपाली गोरखा 'अग्निवीर' बनने के लिए नहीं आते हैं, तो उनकी खाली जगह को भारत में रह रहे गोरखाओं से भरा जाएगा। पहले यह माना जा रहा था कि थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की नेपाल की पांच दिवसीय यात्रा में सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ऐसी चर्चा भी है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर नेपाल के साथ अपने रूख में नरमी नहीं लाना चाहती। अगर यह गतिरोध यूं ही जारी रहा, तो भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती, अतीत बन सकता है।
नेपाल इस बात से नाराज है कि भारत सरकार ने सेना भर्ती की 'अग्निपथ' योजना को लेकर उससे चर्चा नहीं की। मौजूदा समय में 30 हजार से अधिक गोरखा, भारतीय सेना में हैं। इसके अलावा एक लाख चालीस हजार पेंशनर भी हैं। वेतन और पेंशन की कुल रकम देखें तो यह आंकड़ा लगभग 4,100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष बैठता है। दूसरी तरफ नेपाल का रक्षा बजट (लगभग 430 मिलियन अमेरिकी डॉलर) इस आंकड़े से काफी कम है। ऐसे में नेपाल को आर्थिक तौर से भी बड़ा नुकसान संभव है। भले ही मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन, नेपाल के गोरखाओं को अपनी सेना में भर्ती करने के लिए रणनीति बना रहा है, लेकिन गोरखा वहां जाएंगे, ऐसा नजर नहीं आता।
नेपाल में चुनाव खत्म होने का इंतजार
पाकिस्तान भी नेपाली गोरखाओं की नाराजगी का फायदा उठाना चाहता है। आईएसआई इस दिशा में सक्रिय बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि नवंबर के दौरान नेपाल में आम चुनाव है। उसके बाद यह मामला सुलझ सकता है। अभी वहां की विपक्षी पार्टियां, नेपाल सरकार को अग्निपथ योजना पर घेर रही हैं। इस वजह से सरकार ने दो जगहों पर अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी प्रदान नहीं की है। नेपाल में चुनाव खत्म होने के बाद वहां 'अग्निवीर' भर्ती शुरू हो सकती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो भारत सरकार अपनी इस नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी।
भारत में जितने भी गोरखा रह रहे हैं, उन्हीं में से भर्ती की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा नेपाल को आश्वस्त किया गया है कि अग्निवीर के सारे फायदे जो भारतीय युवाओं को मिलेंगे, वे सभी नेपाल के गोरखाओं को भी हासिल होंगे। इसमें कहीं पर कोई भेदभाव नहीं होगा। अगर कोई कहता है कि नेपाली गोरखाओं के साथ भाड़े के सैनिकों जैसा व्यवहार होगा तो यह पूरी तरह गलत है। पाकिस्तानी आईएसआई, इस मुद्दे को हवा देने के लिए काठमांडू में एक सीक्रेट मीटिंग कर चुकी है।