जेवर से कब मिलेगा उड़ने का मौका?: सफर, सुविधा से लागत तक; नोएडा एयरपोर्ट को लेकर मन में आ रहे हर सवाल का जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ही 2021 में इसकी नींव रखी थी। दिल्ली एनसीआर के साथ आसपास के जिलों जैसे अलीगढ़, बुलंदशहर, मेरठ, मथुरा, आगरा समेत अन्य जिलों के लोगों के लिए यह एयरपोर्ट अहम साबित होगा। आइए इस एयरपोर्ट की खास बातों को जानते हैं…
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मौजूद रहें। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने इसे एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिए बड़ा कदम बताया। यह हवाई अड्डा देश की सबसे अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। इसके पहले चरण में 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला टर्मिनल और रनवे शामिल है। इस हवाईअड्डे निर्माण चार चरणों में पूरा होना है। चारों चरणों की पूरे हो जाने के बाद यह क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट का शुभारंभ होते ही उत्तर प्रदेश पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला देश का इकलौता राज्य बन जाएगा।
ऐसे में यह जाना अहम है कि नोएडा एयरपोर्ट क्या है? इसे कितनी लागत में बनाया गया है? इसे बनाने की पीछे की वजह क्या है? आइए जानते हैं…
क्या है नोएडा एयरपोर्ट
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (एनआईए) उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेवर में स्थित नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा दिल्ली-एनसीआर में दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। इस हवाईअड्डे से दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इसका निर्माण ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी, उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ साझेदारी में किया गया।
इस हवाई अड्डे के बनने से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआई) पर दबाव कम होगा। यह हवाई अड्डा आईजीआई से लगभग 72 किमी, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद से लगभग 40 किमी, ग्रेटर नोएडा से 28 किमी, गुरुग्राम से 65 किमी और आगरा से 130 किमी की दूरी पर है।
उद्घाटन हो गया तो क्या 28 मार्च से ही उड़ान भी शुरू हो जाएगी?
नोएडा हवाईअड्डे से व्यवसायिक उड़ानें 28 मार्च से नहीं शुरू होने जा रही हैं। इसके लिए यात्रियों को अभी और इंतजार करना होगा। पहली उड़ान कब होगी और किस शहर के लिए होगी इसका निर्धारण उद्घाटन समारोह के बाद किया जाएगा। तारीख निर्धारित होते ही 15 से 20 दिन पहले टिकटों की बुकिंग और बिक्री शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल के मध्य में कॉमर्शियल फ्लाइटों को बुकिंग शुरू होगी। यानीं, अप्रैल अंत या मई की शुरुआत में यहां से कॉमर्शियल उड़ानें शुरू हो सकती हैं। पहले चरण में देश के 12 शहरों के लिए विमान सेवाएं शुरू होंगी।एयर इंडिया एक्सप्रेस, एयर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा एयरलाइंस जैसी कंपनियां मुंबई, बेंगलूरु, चेन्नई, कोलकाता, कानपुर, लखनऊ समेत 12 शहरों के लिए उड़ानें शुरू करेंगी। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर यहां से 47 शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। वहीं, विदेशी उड़ान के लिए बातचीत चल रही है। एनआईए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी विमानन कंपनियों से लगातार संपर्क कर रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस, एयर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा एयरलाइंस की कॉमर्शियल फ्लाइट समेत अन्य देशों की फ्लाइट्स से यात्री विदेश यात्रा कर सकेंगे।
मल्टी-मॉडल कार्गो हब
इस हवाई अड्डे पर एअर इंडिया एसएटीएस के साथ साझेदारी में विकसित कार्गो टर्मिनल बनाया गया है। यह हब एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब (एमएमसीएच) के रूप में काम करेगा, जो उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतिक रूप से स्थित है। 87 एकड़ में फैले इस कार्गो हब में 30 एकड़ का एकीकृत कार्गो टर्मिनल शामिल होगा, जिसकी प्रारंभिक क्षमता 2,50,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष और 57 एकड़ का एकीकृत वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जोन होगा।
तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब
एयरपोर्ट में तीन प्रमुख डिजिटल कंट्रोल हब तैयार किए गए हैं। पहला एयरपोर्ट ऑपरेशंस सेंटर (एओसी), जो पूरे एयरपोर्ट का मस्तिष्क होगा, जहां से हर गतिविधि का रियल-टाइम कंट्रोल होगा। दूसरा, सिक्योरिटी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (एसओसीसी) जो एयरपोर्ट की सुरक्षा पर निरंतर नजर रखेगा। वहीं तीसरा, एयरपोर्ट इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (एईओसी) है। यह किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
समानांतर लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध
एयरपोर्ट निर्माण का पहला चरण पूरा होने के बाद यहां 3.9 किलोमीटर का रनवे बनकर तैयार है। इस विशालकाय रनवे पर विमान समानांतर रूप से एक साथ उड़ान भरेंगे और लैंडिंग करेंगे। 45 मीटर चौड़ाई वाले रनवे में आईएलएस तकनीकि के अत्याधुनिक सिस्टम कैट थ्री का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे समानांतर उड़ानों में कोई परेशानी नहीं आएगी। देश में इस समय सिर्फ मुंबई और दिल्ली एयरपोर्ट पर ही समानांतर उड़ान की सुविधा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर चार रनवे हैं, जो एक साथ कई उड़ानें और लैंडिंग संभालने में सक्षम हैं। अक्सर यहां पर समानांतर लैंडिंग होती है। वहीं मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी समानांतर उड़ान व लैंडिंग की सुविधा है। इन दोनों के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का तीसरा हवाई अड्डा होगा, जहां पर यह सुविधा मिलने वाली है। आईएलएस सिस्टम होने से खराब मौसम में भी विमानों की उड़ान और लैंडिंग में कोई परेशानी नहीं आएगी।
कितनी लागत में बना है यह हवााईअड्डा?
हवाई अड्डे के निर्माण के सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल (पीपीपी) पर किया गया।

कब से चल रहा है काम?
जेवर में स्थित नोएडा एयरपोर्ट की परिकल्पना 25 साल से पहले की गई थी। वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) रूप में एयरपोर्ट प्रस्तावित किया गया था। तत्कालीन केंद्र की अटल बिहारी सरकार ने अप्रैल 2003 में एयरपोर्ट की स्थापना के लिए तकनीकी-व्यवहार्यता रिपोर्ट को स्वीकार किया था। हालांकि अगले 16 वर्ष तक कई बार हवाई अड्डा कभी राजस्थान के भिवाड़ी और कभी हरियाणा और कभी यूपी में फिरोजाबाद के लिए भी तत्कालीन सरकारों ने ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। 2017 में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो जेवर में दोबारा से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की कवायद शुरू हुई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मई 2018 में उत्तर प्रदेश शासन को निर्माण के लिए सैद्धांतिक सहमति दी। इसके बाद 29 नवंबर 2019 को स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को टेंडर मिला। इसके बाद 25 नंवबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाईअड्डे का शिलान्यास किया। शिलान्यास के दौरान मोदी ने कहा था कि नोएडा एयरपोर्ट कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी बेहतरीन मॉडल बनेगा। रेलवे से लेकर मेट्रो तक हर तरह के मोड से कनेक्ट होगा। नोएडा पूरे उत्तर भारत का लॉजिस्टिक गेटवे बनेगा। आज जिस तेजी से एविएशन क्षेत्र में बढ़ोतरी हो रही है उनके लिए भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बहुत बड़ी भूमिका होगी। यह एयरपोर्ट विमानों के रखरखाव, देखभाल व मेंटेनेंस का केंद्र बनेगा, जो देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी और देश के युवाओं को रोजगार देगी।

उद्घाटन की तारीख कितनी बार बदली गई?
इस हवाई अड्डे के पहले चरण का काम पूरा करने की समयसीमा 2024 तक की रखी गई थी। इसके बाद इसे अप्रैल 2025 के अंत तक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि बाद में 15 मई 2025 तक घरेलू उड़ान संचालन शुरू करने और 25 जून 2025 तक अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू करने की बात कही गई। इसके बाद हवाई अड्डे के उद्घाटन की नई तारीख 30 अक्तूबर 2025 रखी गई। तब भी कुछ वजहों से इसका उद्घाटन नहीं हो सका। आखिरकार अब 28 मार्च को इस एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन होने जा रहा है। चार फेज में बनने वाले इस एयरपोर्ट का पूर्ण निर्माण 2050 तक पूरा होना है। पूरी क्षमता के साथ संचालन शुरू होने पर इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 70 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
इस हवाईअड्डे बनाने की पीछे की वजह क्या रही?
इस हवाईअड्डे बनाने की पीछे वजह है कि दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करने के कारण हुई। दरअसल, बढ़ते हवाई यातायात और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह से आईजीआई हवाई अड्डे के संचालन, सुविधाओं और जगहों की दिक्कतों के मामले बढ़ गए थे। इसके कारण एनसीआर क्षेत्र में हवाई अड्डे के संचालन और सेवाओं के मानकों में सुधार के लिए एक दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की जरूरत होने लगी थी।

इससे क्या फायदा मिलेगा?
इस हवाई अड्डे के विकास से आगरा, मथुरा, गौतमबुद्ध नगर व अन्य शहर विश्व के एयर नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में बेहतर औद्योगीकरण सुनिश्चित होगा। हवाई संपर्क में सुधार से मौजूदा पर्यटन स्थलों पर यातायात में वृद्धि के साथ पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा और नए पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए और अधिक अवसर पैदा होंगे।