सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Who is former IPS officer K Annamalai What strategy after BJP Exit and how much impact have in Tamil Nadu

कौन हैं पूर्व IPS अफसर अन्नामलाई?: BJP से राहें जुदा होने के बाद क्या रणनीति अपनाएंगे, तमिलनाडु में कितना असर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 02 Jun 2026 03:37 PM IST
विज्ञापन
सार

तार्किक और बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले के. अन्नामलाई द्रविड़ राजनीति के गढ़ में हिंदुत्व और भाजपा की सशक्त आवाज के तौर पर उभरे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा रही कि हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें एआईएडीएमके के दबाव पर भाजपा ने राजनीतिक दंगल से दूर रखा। हालांकि, इससे पहले भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई के भरोसे पर ही एआईएडीएमके से नाता तोड़ा था। अब अन्नामलाई के भाजपा से इस्तीफा देकर अलग राजनीतिक दल बनाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। उनका दिल्ली दौरा इन अटकलों को और हवा दे रहा है।

Who is former IPS officer K Annamalai What strategy after BJP Exit and how much impact have in Tamil Nadu
भाजपा नेता के. अन्नामलाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

तमिलनाडु के पूर्व भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई के पार्टी से अलग होकर अपना राजनीतिक भविष्य खोजने की अटकलें सियासी गलियारों में गूंज रही हैं। इस बीच अन्नामलाई ने मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अन्नामलाई आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी मुलाकात कर सकते हैं।



दरअसल, चार जून को अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले चेन्नई की कई सड़कों और गलियों में उनके नाम के साथ 'हमारे नेता, आओ और हमारा नेतृत्व करो' जैसे नारों वाले पोस्टर लगे थे। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद से ही उनके भाजपा से इस्तीफा देने और एक नई राजनीतिक पार्टी का एलान करने की अटकलों को तेज कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: सनातन धर्म विवाद: दुर्गा स्टालिन पहुंचीं मंदिर, पति-बेटे के लिए कराई विशेष पूजा; BJP ने उदयनिधि पर साधा निशाना
विज्ञापन
Trending Videos


पार्टी छोड़ने की अटकलों पर क्या बोले अन्नामलाई?
वहीं, सोमवार को जब उनसे सोशल मीडिया पर फैल रही उन अटकलों के बारे में पूछा गया कि वे भाजपा छोड़कर एक नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "कृपया प्रतीक्षा करें। हम दो दिनों में बैठकर बात करेंगे।" उनके इस जवाब और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात ने इन अटकलों को और बल दे दिया है। 

के. अन्नामलाई भाजपा में अपने सियासी भविष्य को लेकर क्या फैसला करेंगे, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जिस नेता ने सबसे तेजी से अपनी पहचान बनाई, उनमें के. अन्नामलाई का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। एक सख्त पुलिस अधिकारी से राजनीतिक नेता बने अन्नामलाई ने भाजपा को तमिलनाडु में नई ऊर्जा देने की कोशिश की। हालांकि, ताजा अटकलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे उनकी राजनीतिक रणनीति क्या होगी और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर कितना असर पड़ सकता है?

तमिलनाडु में भाजपा के प्रयोग का बड़ा चेहरा
अन्नामलाई केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं रहे हैं, बल्कि उन्हें भाजपा के उस प्रयोग के रूप में भी देखा गया, जिसके जरिए पार्टी ने तमिलनाडु जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश की। ऐसे में उनका भविष्य केवल निजी राजनीतिक करियर का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति के समीकरणों से भी जुड़ा हुआ है।

कौन हैं के. अन्नामलाई?
के. अन्नामलाई का जन्म चार जून 1984 को तमिलनाडु के करूर जिले में हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में प्रबंधन की शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और 2011 बैच के महज 23 वर्ष की उम्र में आईपीएस अधिकारी बने।

अन्नामलाई ने मुख्य रूप से कर्नाटक कैडर में सेवा दी। पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी छवि एक सख्त, ईमानदार और जमीनी अफसर की रही। उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया और कई मामलों में उनकी कार्यशैली चर्चा का विषय बनी।

पुलिस सेवा के दौरान ही उन्हें सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर व्यापक पहचान मिलने लगी। इसी वजह से उन्हें सिंघम जैसी उपाधियां भी दी गईं। हालांकि, उन्होंने 2019 में ही पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। 

आईपीएस से राजनीति तक का सफर
अन्नामलाई का आईपीएस सेवा से इस्तीफा देने का फैसला काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि उन्हें एक उभरते हुए अधिकारी के रूप में देखा जाता था। इस्तीफे के बाद उन्होंने सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कुछ समय बाद अगस्त 2020 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

राजनीति में उनका प्रवेश ऐसे समय हुआ, जब भाजपा तमिलनाडु में एक मजबूत स्थानीय चेहरे की तलाश कर रही थी। राज्य में पार्टी का संगठन मौजूद था, लेकिन ऐसा नेता नहीं था जो व्यापक स्तर पर सुर्खियों में आ सके। अन्नामलाई ने भाजपा के लिए यह खाली जगह काफी हद तक भर दी।

अन्नामलाई पर भाजपा ने क्यों खेला दांव?
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। एक ओर डीएमके और दूसरी ओर एआईएडीएमके राज्य की मुख्य राजनीतिक ताकतें रही हैं। भाजपा को यहां हमेशा सीमित सफलता मिली। ऐसे माहौल में अन्नामलाई भाजपा के लिए कई वजहों से महत्वपूर्ण थे।

पहली वजह उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि थी। दूसरी वजह उनकी साफ-सुथरी छवि थी। तीसरी वजह उनकी आक्रामक और प्रभावशाली संवाद शैली थी, जो सोशल मीडिया के दौर में काफी असरदार साबित हुई। भाजपा नेतृत्व को लगा कि अन्नामलाई तमिलनाडु में पार्टी को पारंपरिक राजनीति की सीमाओं से बाहर निकाल सकते हैं। यही कारण था कि पार्टी ने उन्हें तेजी से जिम्मेदारियां दीं।

तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के रूप में उभार
साल 2021 में अन्नामलाई को तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। यह फैसला कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए आश्चर्यजनक था, क्योंकि उन्हें राजनीति में आए ज्यादा समय नहीं हुआ था। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने लगातार राज्यभर का दौरा किया। उन्होंने पार्टी कैडर को सक्रिय करने, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और भाजपा की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया। उनकी शैली पारंपरिक राजनीतिक नेताओं से अलग थी। वे सीधे जनता के बीच जाने, सोशल मीडिया के जरिए संवाद करने और विपक्ष पर तीखे हमले करने के लिए जाने गए।

डीएमके के खिलाफ सबसे मुखर चेहरा
अन्नामलाई की पहचान धीरे-धीरे भाजपा नेता से अधिक डीएमके सरकार के प्रमुख आलोचक के रूप में बनने लगी। उन्होंने कई मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा। भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में वे लगातार हमलावर रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने डीएमके के सनातन विरोधी रुख को लेकर भी तीखे हमले किए।

उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस अक्सर सुर्खियां बनती थीं। वे दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ सरकार पर आरोप लगाते थे, जिससे मीडिया का ध्यान उनकी ओर जाता था। समर्थकों का मानना था कि उन्होंने भाजपा को एक लड़ाकू विपक्ष की भूमिका में स्थापित किया। वहीं आलोचकों का कहना था कि उनकी राजनीति जरूरत से ज्यादा टकराव वाली थी।

'एन मन्न, एन मक्कल' यात्रा से मिली पहचान
अन्नामलाई के राजनीतिक करियर की सबसे चर्चित पहलों में से एक उनकी 'एन मन्न, एन मक्कल' (मेरी भूमि, मेरे लोग) यात्रा रही। इस यात्रा का उद्देश्य पूरे तमिलनाडु में जाकर लोगों से सीधे संवाद करना था। यात्रा के दौरान उन्होंने हजारों किलोमीटर का सफर किया और अनेक विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस अभियान ने अन्नामलाई की व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे भाजपा को भी राज्य के कई इलाकों में नई पहचान मिली।

क्या अन्नामलाई भाजपा के लिए वोट में बदलाव ला पाए?
यह सवाल हमेशा चर्चा का विषय रहा है। अन्नामलाई के नेतृत्व में भाजपा का जनसंपर्क बढ़ा, मीडिया कवरेज बढ़ी और सोशल मीडिया पर पार्टी की उपस्थिति मजबूत हुई। लेकिन चुनावी राजनीति में केवल लोकप्रियता पर्याप्त नहीं होती।

तमिलनाडु में भाजपा अभी भी स्वतंत्र रूप से सत्ता हासिल करने की स्थिति में नहीं पहुंची। हालांकि, पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने और नए समर्थकों को जोड़ने में अन्नामलाई की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उन्होंने भाजपा को चर्चा के केंद्र में जरूर पहुंचाया, लेकिन इसे व्यापक चुनावी सफलता में बदलना अभी बाकी है।

भाजपा से अलग होने की स्थिति में उनके सामने क्या विकल्प होंगे?
अगर भविष्य में अन्नामलाई और भाजपा की राहें वास्तव में अलग होती हैं, तो उनके सामने कई संभावित रास्ते हो सकते हैं।

  • अन्नामलाई अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर सकते हैं। उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और समर्थकों का एक वर्ग ऐसा है जो उन्हें व्यक्ति के रूप में पसंद करता है। तमिलनाडु में हालिया चुनाव के नतीजों में अभिनेता से नेता बने विजय ने साबित किया है कि नई पार्टियां भी राज्य में चौंकाने वाला प्रदर्शन कर सकती हैं। 
  • दूसरा विकल्प किसी क्षेत्रीय दल के साथ राजनीतिक तालमेल का हो सकता है। हालांकि उनकी अब तक की राजनीति को देखते हुए यह संभावना सीमित दिखाई देती है। उन्होंने खुद को हमेशा एक वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल के रूप में पेश किया है। ऐसे में किसी क्षेत्रीय दल में शामिल होना उनकी छवि के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
  • तीसरा विकल्प राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का हो सकता है। उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि, सार्वजनिक बोलने की क्षमता और मीडिया में पहचान उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी अवसर दिला सकती है। 


क्या अन्नामलाई के पास है खुद के कैडर का आधार?
किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत उसकी व्यक्तिगत राजनीतिक पूंजी होती है। अन्नामलाई के मामले में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि उनकी लोकप्रियता कितनी व्यक्तिगत है और कितनी भाजपा से जुड़ी हुई है। उनके समर्थक मानते हैं कि उन्होंने अपने दम पर एक अलग पहचान बनाई है। युवा वर्ग, पेशेवर समुदाय और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों के बीच उनकी अच्छी पहुंच है।

दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के संगठनात्मक ढांचे और केंद्रीय नेतृत्व के समर्थन ने भी उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसलिए अगर वे कभी अलग रास्ता चुनते हैं तो उनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत की परीक्षा होगी।

तमिलनाडु की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा?
अन्नामलाई का प्रभाव केवल भाजपा तक सीमित नहीं है। उन्होंने तमिलनाडु की राजनीतिक बहस को प्रभावित किया है। उनके आने के बाद भाजपा राज्य में अधिक आक्रामक तरीके से अपनी बात रखने लगी। कई मुद्दों पर राजनीतिक विमर्श बदला और विपक्षी दलों को भी उनकी टिप्पणियों का जवाब देना पड़ा।

अगर वे भाजपा से दूर जाते हैं तो पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश करनी पड़ सकती है जो समान स्तर की ऊर्जा और मीडिया उपस्थिति रखता हो। वहीं अन्नामलाई के लिए भी चुनौती होगी कि वे यह साबित करें कि उनकी लोकप्रियता संगठन से परे भी कायम रह सकती है।

ये भी पढ़ें: सियासत: BJP प्रमुख नितिन नवीन से अन्नामलाई की मुलाकात, तमिलनाडु में मनभेद के कयासों के बीच दिल्ली आए पूर्व IPS

युवाओं के बीच क्यों लोकप्रिय हैं अन्नामलाई?
अन्नामलाई की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी पृष्ठभूमि है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के कारण उन्हें प्रशासनिक अनुभव वाला नेता माना जाता है। वे अक्सर रोजगार, शिक्षा, सुशासन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बात करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता भी युवाओं के बीच उनकी पहुंच बढ़ाती है। यही वजह है कि उन्हें तमिलनाडु की नई पीढ़ी के कुछ हिस्सों में एक अलग तरह के नेता के रूप में देखा जाता है।

आगे क्या होगा?
तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई का नाम आने वाले वर्षों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। एक आईपीएस अधिकारी से राजनीतिक नेता बनने तक का उनका सफर पहले ही उन्हें राज्य के प्रमुख चेहरों में शामिल कर चुका है।

भले ही भाजपा के साथ उनका भविष्य जैसा भी हो, यह स्पष्ट है कि उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी अलग जगह बनाई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वे इस लोकप्रियता को दीर्घकालिक राजनीतिक ताकत में बदल पाते हैं या नहीं? जोसेफ विजय के हालिया चुनावी प्रदर्शन ने इसे और हवा दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed