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Tarique Rahman: 17 साल बाद वतन वापसी, BNP के तारिक रहमान ने दो महीने में पलट दिया बांग्लादेश का चुनावी खेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Fri, 13 Feb 2026 06:45 AM IST
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सार

मां खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ने पर तारिक रहमान बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वतन वापसी के कुछ ही दिनों बाद खालिदा जिया का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने बीएनपी की कमान अपने हाथों में ले ली। अब बांग्लादेश के चुनाव नतीजे सामने आने के बाद तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो गई है।

who is Tariq Rahman and why he returned in bangladesh after 17 years
तारिक रहमान कौन है? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से पहले वहां की सियासत में एक नए किरदार की एंट्री हुई थी। ये किरदार पिछले 17 साल से देश के बाहर था। 17 साल के वनवास के बाद वापस लौटा ये चेहरा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और जियाउर रहमान के बेटे तारिक रहमान का था। उन्हें बांग्लादेशी राजनीति का राजकुमार माना जाता है। बांग्लादेश के चुनावी नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बहुमत मिलने के साथ ही वह प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार बन गए हैं। उनकी वतन वापसी के बाद से ही माना जा रहा था कि वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की एक बार फिर सियासत के शीर्ष पर होगी।

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आखिर ये तारिक रहमान कौन हैं, बांग्लादेश की राजनीति में उनका और उनके परिवार का क्या इतिहास है? तारिक 17 साल से बांग्लादेश से बाहर क्यों थे, क्या तारिक बांग्लादेश की तस्वीर बदल सकते हैं? आइये जानते हैं...

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पत्नी-बेटी के साथ देश लौटे रहमान
तारिक रहमान बीते साल दिसंबर में ढाका लौटे, जहां उनकी पार्टी के हजारों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। वह अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ ढाका पहुंचे थे। रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया लंबे समय से बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं। बेटे के बांग्लादेश लौटने के बाद 30 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया। मां के निधन के बाद तारिक रहमान ने बीएनपी की बागडोर संभाल ली। उनके आने से जमात ए इस्लामी की भी मुश्किलें बढ़ गईं। जो बांग्लादेश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना देखती है। 

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। उनकी उम्र 60 वर्ष है। उनकी मां 1991 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। उनके पिता बांग्लादेश में सेना प्रमुख और देश के छठे राष्ट्रपति रहे थे। 2008 में रहमान देश छोड़कर लंदन चले गए थे। 2018 से विदेश से ही BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर भूमिका निभा रहे थे।  

इतनी मजबूत राजनीति पृष्ठभूमि होने के बाद भी रहमान देश छोड़कर क्यों भागे?

खालिदा जिया और अवामी लीग की नेता व तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना एक दूसरे की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही। देश की राजनीति में एक समय पर केवल इन्हीं का राज था। खालिदा जिया के दूसरे कार्यकाल 2001 से 2006 तक रहमान को काफी प्रसिद्धि मिली। इसी के साथ उनकी पार्टी पर भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के आरोप भी लगे। 2006 से 2009 में बांग्लादेश में सेना के समर्थन वाली कार्यवाहक सरकार आई। इसने बीएनपी पर लगे सभी आरोपों की जांच की। 2007 में उन्हें ढाका स्थित बंगले से गिरफ्तार कर लिया गया था। महीनों बाद उन्हें जमानत मिली और वे इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए। इसके बाद वापस नहीं आए। 

...तो 17 वर्षों तक रहमान वापस क्यों नहीं आ पाए?

अवामी लीग ने सत्ता में आने के बाद रहमान को कई मामलों में दोषी ठहराया। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और राजनीतिक हिंसा के आरोप शामिल थे। उन्हें 2004 में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड हमला करने के मामले में भी दोषी ठहराया गया, जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए थे। ऐसे में अगर वह बांग्लादेश में वापस लौटते तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता।

रहमान की बांग्लादेश में वापसी कैसे हुई?

शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद बीएनपी पर बड़ी कार्रवाई की गई। पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी नेता खालिदा जिया को जेल में बंद कर दिया गया। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए रहमान का वापस आना काफी मुश्किल था, लेकिन 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन शुरू हुए। देखते ही देखते इन प्रदर्शनों ने शेख हसीना के सत्ता से उखाड़ फेंका। शेख हसीना के देश छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद यूनुस को अतंरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया। अंतरिम सरकार ने बीएमपी और रहमान पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। फरवरी 2026 में चुनावों की घोषणा की गई। इसके बाद रहमान का देश में वापसी का रास्ता साफ हो गया।  

अब जानते है बांग्लादेश की उस राजनीति के बारे में जिसे बैटल ऑफ बेगम कहा जाता है

1991 से खालिदा और हसीना का ही सत्ता पर कब्जा रहा। इनकी लड़ाई को बांग्लादेश में बैटल ऑफ बेगम के नाम से जाना जाता है। दोनों महिलाएं राजनीतिक राजवंशों की नेता थीं। तीन दशक से अधिक समय तक बारी-बारी से दोनों ने सत्ता संभाली है।

शेख हसीना अपने पिता और बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद राजनीति में आईं। 1975 में मुजीब और उनके परिवार के सदस्यों को सैन्य तख्तापलट के दौरान मार दिया गया था। उन्होंने आवमी लीग का नेतृत्व करते हुए चुनाव लड़े।

वहीं, खालिदा जिया ने 1981 में अपने पति की मौत के बाद राजनीति में कदम रखा। जिया के पति जियाउर रहमान पूर्व सेना प्रमुख और देश के छठे राष्ट्रपति थे। मई 1981 में एक असफल तख्तापलट के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।  

1991 में बीएनपी ने चुनाव जीता और खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 2001 से 2006 तक वह देश में फिर से पीएम की कुर्सी पर रहीं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान खालिदा सरकार ने एक ऑर्डिनेंस के जरिए मुजीब के हत्यारों को कानूनी तौर पर बचाने की कोशिश की।  2007-2008 में देश में अस्थिरता और आपतकाल की स्थिति रही। इसी दौरान बीएनपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमें चलाए गए। रहमान भी इसकी चपेट में आ गए। 2007-08 के आपातकाल के दौरान लगभग 18 महीने हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। वह सितंबर 2008 में लंदन चले गए थे।

शेख हसीना 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनीं। सत्ता में आने के बाद उन्होंने सबसे पहले बीएनपी के द्वारा लाए गए ऑर्डिनेंस को हटाया। 2009 में हसीना एक बार फिर सत्ता में आईं और बीएनपी के खिलाफ और अधिक आक्रमक रुख अपनाया।  2018 में खालिदा को भ्रष्टाचार के आरोप में 17 साल की सजा हुई। 2009 में वापसी के बाद हसीना लगातार 15 वर्षों तक सत्ता में बनी रही। 

रहमान ने वापसी के बाद क्या कहा था?

तारिक रहमान ने वापसी के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, 'अब देश के लोगों को अपने बोलने और लोकतांत्रिक अधिकारों को वापस लेने की जरूरत है।' अपने संबोधन में तारिक रहमान ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रसिद्ध कथन का हवाला देते हुए कहा कि मेरे पास सपना नहीं, एक योजना है। उन्होंने कहा कि यह देश पहाड़ों और मैदानों का है, जहां मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध और ईसाई सभी साथ रहते हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित बांग्लादेश बनाना है, जहां हर नागरिक बिना डर के घर से निकले और सुरक्षित लौटे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

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