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कौन हैं उदयनिधि स्टालिन: मुख्यमंत्री के परिवार से ही नहीं, विवादों से भी नाता; विजय की फिल्म के रहे निर्माता

Tue, 04 Aug 2026 03:53 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 04 Aug 2026 03:53 PM IST
सार

उदयनिधि स्टालिन कौन हैं? उनका पारिवारिक इतिहास क्या है? राजनीति में आने से पहले उदयनिधि की क्या पहचान रही? साथ ही उनके सियासत में आने की कहानी क्या है और इसमें उनकी उपलब्धियां क्या-क्या रहीं? स्टालिन जूनियर के साथ कौन सा हालिया विवाद जुड़ा है और इसकी वजह क्या रही? इससे पहले कब-कब उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा? आइये जानते हैं...

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Who is Udhayanidhi Stalin From Film Producer DMK Leader Trisha CM Vijay Sanatan Dharma Controversies Comments
उदयनिधि स्टालिन का परिवार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु के चेन्नई में मंगलवार सुबह जबरदस्त ड्रामा सामने आया। दरअसल, राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बताया गया है कि द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) के नेता उदयनिधि को कथित तौर पर उनके घर से उठाया गया। उन पर सोमवार को एक रैली के दौरान तमिल इंडस्ट्री की नामी अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर कथित तौर पर विवादास्पद बयान देने का आरोप है।  
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उदयनिधि को मंगलवार को जब पुलिस ने उनके घर से गिरफ्तार किया तो वह मुस्कुराते हुए बाहर निकले। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी एक मजाक है और वह इसका सामना कानूनी तौर पर करेंगे। वहीं, उनकी पार्टी द्रमुक ने इसे राजनीतिक बदला करार दिया। पार्टी के नेता टीकेएस एलांगोवन ने कहा कि उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय की नाकामियों को उजागर किया। उन्होंने सोमवार को जो भाषण दिया, उसमें भी उन्होंने तृषा का नाम नहीं लिया था। 
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उदयनिधि स्टालिन के साथ जुड़े इस पूरे विवाद के बीच यह जानना अहम है कि आखिर वे कौन हैं? उनका पारिवारिक इतिहास क्या है? राजनीति में आने से पहले उदयनिधि की क्या पहचान रही? साथ ही उनके सियासत में आने की कहानी क्या है और इसमें उनकी उपलब्धियां क्या-क्या रहीं? स्टालिन जूनियर के साथ कौन सा हालिया विवाद जुड़ा है और इसकी वजह क्या रही? इससे पहले कब-कब उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा? आइये जानते हैं...


पहले जानें- कौन हैं उदयनिधि स्टालिन, क्या है उनका पारिवारिक इतिहास?

उदयनिधि स्टालिन का इतिहास सिर्फ राजनीति तक ही सीमित नहीं है। वे इससे पहले तमिलनाडु की फिल्म इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं और एक अभिनेता के साथ फिल्म निर्माता भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने सियासत में कदम रखने के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री की भूमिका में काम किया और फिलहाल तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। हालांकि, उनकी अधिकतर भूमिकाओं के पीछे उनके परिवार का बड़ा हाथ माना जाता है। दरअसल, सिनेमाई दुनिया से लेकर राजनीति की दुनिया में उनकी एंट्री की एक बड़ी वजह उनके दादा एम करुणानिधि और पिता एमके स्टालिन को ही माना जाता है। 

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उदयनिधि स्टालिन की शिक्षा। - फोटो : अमर उजाला

क्या है उदयनिधि का पारिवारिक इतिहास?

उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक करुणानिधि परिवार से आते हैं, जिन्हें तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति का शीर्ष नेता माना जाता है। उनके दादा एम. करुणानिधि द्रविड़ राजनीति के दिग्गज नेता थे, जिन्होंने पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली। उनके पिता एमके. स्टालिन तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी मां दुर्गा स्टालिन हैं राजनीति से दूर ही रही हैं।

उदयनिधि का विवाह साल 2002 में किरुथिगा रामसामी से हुआ था। किरुथिगा तमिल सिनेमा में एक फिल्म निर्देशक और लेखिका होने के साथ-साथ इनबॉक्स 1305 नाम के लाइफस्टाइल पत्रिका की प्रमुख भी हैं। उनके दो बच्चे हैं एक बेटा जिसका नाम इन्बन है और एक बेटी जिसका नाम तन्मया है। इन्बन एक फुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं और साल 2025 में उनकी पारिवारिक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी रेड जायंट मूवीज के मुख्य कार्यकारी बने हैं।

इसके अलावा उनके अन्य रिश्तेदारों में उनके चचेरे भाई अरुलनिथि और दयानधि अलगिरी भी फिल्म उद्योग से जुड़े हुए हैं। 

ये भी पढ़ें: तृषा पर टिप्पणी को लेकर छिड़ा सियासी बवाल: उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने किया गिरफ्तार, क्या बोली DMK?
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अब जानें- उदयनिधि की राजनीति में कदम रखने से पहले की पहचान

उदयनिधि स्टालिन पहली बार साल 2019 में राजनीति में औपचारिक रूप से उतरे। हालांकि, तब तक उनकी पहचान तमिल फिल्म उद्योग में एक सफल अभिनेता और फिल्म निर्माता की बन चुकी थी। इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म वितरण के क्षेत्र में भी पैठ बना ली और तमिलनाडु और इसके बाहर फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन के काम के लिए कंपनी खड़ी की। फिल्मी दुनिया में लगभग एक दशक के काम से एक बड़ा प्रशंसक वर्ग तैयार किया, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक सफर में भी उनकी मदद की।


कैसा रहा उदयनिधि का फिल्मी दुनिया में सफर?

  • साल 2008 में, उन्होंने अपनी फिल्म निर्माण कंपनी रेड जायंट मूवीज की स्थापना की। बतौर निर्माता उनकी पहली फिल्म कुरुवी (2008) थी, इसमें मुख्य भूमिका में अभिनेता विजय थे।
  • इसके बाद उन्होंने आदवन (2009), मनमदन अंबू (2010), और एआर. मुरुगादॉस द्वारा निर्देशित साइंस-फिक्शन फिल्म 7 ओम अरिवु (2011) जैसी बड़ी तमिल फिल्मों का निर्माण किया।
  • उदयनिधि की कंपनी ने फिल्म वितरण में भी बड़ा मुकाम बनाया। उन्होंने विन्नैतांडी वरुवाया, मद्रासपट्टिनम, बॉस एंगिरा भास्करन और मैना जैसी चर्चित फिल्मों का वितरण कर सफलता हासिल की। 
  • साल 2012 में उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ओरु कल ओरु कन्नाडी से मुख्य अभिनेता के रूप में अपनी शुरुआत की। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड फॉर बेस्ट मेल डेब्यू-साउथ दिया गया।
  • इसके बाद उन्होंने लगातार कई फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं, जिनमें इधु कतिरवेलन काधल (2014), ननबेंडा (2015), गेथु (2016), मनिथन (2016-हिंदी फिल्म जॉली एलएलबी की रीमेक), सरवानन इरुक्का बयामेन (2017) और निमीर (2018) शामिल हैं।

ये भी पढ़ें: तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन के बयान पर बवाल: तृषा पर की विवादित टिप्पणी, TVK ने साधा निशाना; BJP क्या बोली?

क्या है सियासत में आने और डिप्टी सीएम बन जाने की कहानी?

1. 2019 में सियासत में एंट्री, युवा विंग के सचिव बने
उदयनिधि ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सक्रिय राजनीति में कदम रखा। जुलाई 2019 में उन्हें सीधा द्रमुक की युवा विंग का सचिव नियुक्त किया गया। माना जाता है कि इसकी वजह उनके पिता एमके स्टालिन का प्रभाव रहा। यह द्रमुक के लिए एक बेहद संवेदनशील और कठिन समय था; पार्टी के कद्दावर नेता और उनके दादा एम. करुणानिधि का साल 2018 में निधन हो चुका था और उनके पिता एमके. स्टालिन पहली बार अकेले दम पर पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे। 

उदयनिधि के पास अपने पिता की तुलना में एक अतिरिक्त फायदा था। वह था- तमिल सिनेमा में एक दशक काम करने के बाद बना उनका मजबूत प्रशंसक वर्ग। उन्होंने युवा विंग के जरिए पार्टी के सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों को मजबूत किया, खासतौर पर भाषा और नीट परीक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर युवाओं (18-29 आयु वर्ग) को आकर्षित किया। इस अभियान की बदौलत 2019 के चुनावों में द्रमुक गठबंधन ने भारी जीत दर्ज की।

2. पहली बार चुनावी मैदान में उतरे दो-तिहाई वोट हासिल किए
2021 के विधानसभा चुनावों में उदयनिधि ने तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया। इस चुनाव अभियान के दौरान उनकी 'ईंट वाली राजनीति' बेहद चर्चित हुई, जहां उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों में हाथ में एक ईंट दिखाकर यह आरोप लगाया कि तत्कालीन एनडीए (अन्नाद्रमुक-भाजपा) सरकार मदुरै में घोषित एम्स का काम पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है। 

उदयनिधि ने खुद चेन्नई की सुरक्षित मानी जाने वाली चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट से चुनाव लड़ा और 67.89% वोट पाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

3. चुनाव जीतने के बाद सीधा बने कैबिनेट मंत्री
विधानसभा चुनाव जीतने के कुछ महीनों बाद 14 दिसंबर 2022 को उन्हें एमके. स्टालिन के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें युवा कल्याण और खेल विकास विभाग का मंत्री बनाया गया। इस पद को पार्टी के भीतर एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि एमके स्टालिन अब उदयनिधि को द्रमुक के नेतृत्व के लिए तैयार कर रहे हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह करुणानिधि की सरकार में एमके स्टालिन साल 2009 में पहली बार डिप्टी सीएम बनकर आए थे।

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उदयनिधि स्टालिन का सियासी सफर। - फोटो : अमर उजाला
4. राजनीति में एंट्री के पांच साल के अंदर मिला डिप्टी सीएम पद
28 सितंबर 2024 को उदयनिधि स्टालिन को तमिलनाडु का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। वह राज्य के इतिहास में इस पद को संभालने वाले सबसे कम उम्र के नेता बने। इस नियुक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अब पूरी तरह से एमके. स्टालिन के नियंत्रण में है और उदयनिधि को केवल मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य के उत्तराधिकारी के रूप में आधिकारिक तौर पर स्थापित कर दिया गया है। 


जिसकी पहली फिल्म के निर्माता रहे, उसी की पार्टी से चुनाव हारी उदयनिधि की पार्टी

साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में उदयनिधि स्टालिन की पार्टी द्रमुक को तमिल सिनेमा के दिग्गज सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) से हार का सामना करना पड़ा, इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और विजय नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, इस चुनाव में उदयनिधि स्टालिन व्यक्तिगत रूप से अपनी सीट से नहीं हारे, लेकिन उनके पिता एमके स्टालिन अपनी सीट नहीं बचा पाए। 

तमिलनाडु में टीवीके सरकार और विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उदयनिधि स्टालिन का डिप्टी सीएम पद भले ही चला गया, लेकिन विपक्ष के सबसे बड़े दल द्रमुक के नेता होने के नाते उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 

10 मई 2026 से उदयनिधि तमिलनाडु विधानसभा में 19वें विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत हैं। विपक्षी नेता के रूप में वह विधानसभा के भीतर और बाहर लगातार नए मुख्यमंत्री विजय और उनकी टीवीके सरकार की नीतियों पर हमलावर रहे हैं। वह द्रमुक के भीतर अभी भी युवा विंग के सचिव के रूप में पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने का काम संभाल रहे हैं।


अपने किन बयानों को लेकर लगातार विवाद में घिरे हैं उदयनिधि?

उदयनिधि स्टालिन अपने राजनीतिक करियर के दौरान विरोधियों के निजी जीवन, महिलाओं, और धार्मिक आस्थाओं पर की गई टिप्पणियों को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं। उनके साथ हालिया विवाद अभिनेत्री तृषा पर की गई परोक्ष टिप्पणी से जुड़ी है। 

1. अभिनेत्री तृषा और मुख्यमंत्री विजय पर टिप्पणी 
3 अगस्त 2026 को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर द्रमुक की एक रैली को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की नीतियों की आलोचना की। भाषण के दौरान जब भीड़ ने बार-बार अभिनेत्री तृषा का नाम चिल्लाना शुरू कर दिया, तो उदयनिधि ने मुस्कुराते हुए एक विवादास्पद टिप्पणी की।  

हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कावेरी के पानी के संदर्भ में बात कर रहे थे, लेकिन आलोचकों, भाजपा और विजय की पार्टी टीवीके ने इसे विजय और तृषा के बीच के कथित संबंधों को लेकर किया गया एक अभद्र बयान माना। नेता खुशबू सुंदर और गायिका चिन्मयी श्रीप्रदा सहित कई हस्तियों ने इस बयान को महिलाओं को नीचा दिखाने वाला बताया। 

इस मामले में टीवीके की महिला विंग की शिकायत पर तंजावुर पुलिस ने उनके खिलाफ महिला सम्मान को ठेस पहुंचाने, अश्लीलता फैलाने, दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे आरोपों में भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं, आईटी एक्ट और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 4 अगस्त 2026 को उन्हें उनके चेन्नई स्थित आवास से गिरफ्तार किया।

2. सनातन धर्म को लेकर दिए विवादित बयान (2023 और 2026)
डेंगू-मलेरिया से तुलना (सितंबर 2023): एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी और कहा था कि इसे न केवल विरोध किया जाना चाहिए, बल्कि पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए। इस बयान को लेकर देश भर में भारी राजनीतिक और सामाजिक गुस्सा फैला।

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उदयनिधि स्टालिन के विवादित बयान। - फोटो : अमर उजाला
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और 4 मार्च 2024 को उदयनिधि को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है और एक जिम्मेदार मंत्री होने के नाते उन्हें अपने शब्दों के परिणामों के प्रति अधिक सचेत रहना चाहिए था।

मई 2026 में बयान दोहराया: विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण के दौरान उदयनिधि ने एक बार फिर इस विवाद को हवा देते हुए कहा, "सनातन धर्म, जो लोगों को विभाजित करता है, उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।"

3. मुख्यमंत्री विजय के व्यक्तिगत जीवन और टीवीके पर टिप्पणी (2026)
टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद उदयनिधि ने एक्स और मीडिया ब्रीफिंग में सीधे मुख्यमंत्री विजय के निजी जीवन पर निशाना साधते हुए कहा था कि चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को ढूंढती पत्नी की कहानी पूरे तमिलनाडु को पता है।" इस टिप्पणी को विजय और उनकी पत्नी संगीता के कथित वैवाहिक विवाद की ओर इशारा माना गया, जिसकी राजनीतिक हलकों में व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए कड़ी आलोचना हुई। उसी दिन उन्होंने यह विवादित बयान भी दिया था कि "जल्द ही टीवीके के विधायक विधानसभा परिसर के भीतर आइटम सॉन्ग चलाएंगे और उन पर नाचेंगे।"

4. सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की मृत्यु पर टिप्पणी (2021)
2021 में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान धारापुरम में एक चुनावी रैली के दौरान उदयनिधि ने आरोप लगाया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की मृत्यु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए ज्यादा काम के तनाव के कारण हुई थी। दिवंगत नेताओं की बेटियों की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराने के बाद चुनाव आयोग ने उदयनिधि को आचार संहिता के उल्लंघन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

5. शशिकला और ईपीएस पर टिप्पणी
2021 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान उदयनिधि ने एक जनसभा में दावा किया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी (ईपीएस) वी.के. शशिकला के पैर छूने के लिए लाश की तरह रेंगकर गए थे। इस टिप्पणी के बाद अन्नाद्रमुक के नेताओं ने उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।


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