सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why Is Retirement Planning Difficult? Rules Change From Income to Expenses Here Understand the Complete Math

रिटायरमेंट प्लानिंग क्यों है मुश्किल?: कमाई से खर्च तक बदलते हैं नियम, यहां समझिए पूरा गणित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 06 Apr 2026 04:57 AM IST
विज्ञापन
सार

रिटायरमेंट के बाद वित्तीय जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। जहां पहले आप कमाकर बचत करते थे, वहीं अब जमा पूंजी से खर्च करना होता है। बाजार के उतार-चढ़ाव भी ज्यादा असर डालते हैं क्योंकि नियमित आय नहीं होती। इस चरण में लक्ष्य पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखना और महंगाई से बचाना होता है।

Why Is Retirement Planning Difficult? Rules Change From Income to Expenses Here Understand the Complete Math
रिटायरमेंट - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार

हरीश पिछले महीने बिजली विभाग से रिटायर हुए हैं। उन्हें अब पीएफ व ग्रेच्युटी के रूप में एक मोटी रकम का चेक मिला। चेहरे पर मुस्कान तो थी, पर आंखों में एक अनजाना डर भी था। कल तक उनके पास हर महीने एक निश्चित वेतन आता था। उन्हें पता था कि घर कैसे चलाना है। लेकिन आज उनके पास अगले 30 साल की 'एडवांस सैलरी' एक साथ रखी थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस जमा-पूंजी को कैसे बचाएं कि यह उनके और धर्मपत्नी के बुढ़ापे की असली लाठी बनी रहे। रिटायरमेंट का मतलब केवल काम से छुट्टी पाना नहीं है, बल्कि अपनी जीवन भर की कमाई को खर्च में बदलने की एक बड़ी चुनौती है।

Trending Videos


रिटायरमेंट प्लानिंग, धन जुटाने से ज्यादा कठिन?

  • यह पूरी तरह से एक बदलाव है। आपने जीवन भर कमाया है। जिस दिन आप रिटायर होते हैं, चीजें उलट जाती हैं।
  • संचय से उपभोग: पहले आप सिर्फ जोड़ रहे थे, अब आप खर्च करना शुरू कर रहे हैं।
  • उतार-चढ़ाव का मतलब बदलना: जब हम कमा रहे होते हैं, तो बाजार गिरने पर बेफिक्र रह सकते हैं, क्योंकि हमें पता है कि अगली सैलरी आएगी और हम सस्ते में और खरीद लेंगे। लेकिन रिटायरमेंट के बाद, अगले महीने आपको पैसा निकालना है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • लक्ष्य का बदलना: अब लक्ष्य संपत्ति बढ़ाना नहीं, बल्कि संपत्ति की रक्षा करना और महंगाई को मात देना बन जाता है।

एसडब्ल्यूपी क्या है और क्या काम करता है?

  • एसडब्ल्यूपी (सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान) कुछ और नहीं बल्कि नियम-आधारित निवेश बेचने की एक योजना है।
  • सैलरी का विकल्प: यह आपको हर महीने एक निश्चित आय देता है, जो बिल्कुल सैलरी जैसा महसूस होता है।
  • अनुशासन: एसडब्ल्यूपी आपको सिखाता है कि यह 'पूंजी' नहीं, बल्कि आपकी 'आय का स्रोत' है। इसे छेड़ना मतलब अपनी आय को नष्ट करना है।

एसडब्ल्यूपी के लिए फंड कैसे चुनें?
यदि आपके पास 4-6 फंड हैं, तो उनमें से बराबर पैसा निकालें, यह अनुशासन है। लेकिन अगर कोई फंड पिछले तीन साल से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है और आप उससे बाहर निकलना चाहते हैं, तो केवल उसी से पैसा निकालें।


बकेट स्ट्रैटेजी क्या है?
यह कोई जटिल वित्तीय शब्दावली नहीं, बल्कि सामान्य समझ पर आधारित रणनीति है। इसे तीन हिस्सों में बांटें-

  • पहला बकेट (0-1 साल): वह पैसा, जो आपको अगले एक साल में चाहिए। इसे ऐसी जगह रखें जहां बाजार का कोई जोखिम न हो, जैसे लिक्विड फंड या बैंक डिपॉजिट। यहां रिटर्न बढ़ाने की कोशिश न करें।
  • दूसरा बकेट (1-3 साल): वह पैसा, जो आपको अगले 1 से 3 साल में चाहिए। इसे थोड़े सुरक्षित निवेश में रखें।
  • तीसरा बकेट (3 साल से अधिक): वह पैसा, जिसकी जरूरत लंबे समय बाद है। इसे इक्विटी या हाइब्रिड फंड में रहने दें, ताकि यह बढ़ सके।

निवेशक कहां करते हैं गलती?

  • बड़ी रकम देखकर घबराना: रिटायरमेंट पर मिला पैसा 30 साल की 'एडवांस सैलरी' जैसा है। बहुत से लोग इसे संभाल नहीं पाते और गलत सलाहकारों के चक्कर में पड़ जाते हैं।
  • महंगाई को नजरअंदाज करना: लोग सोचते हैं कि आज 80,000 रुपये काफी हैं, तो भविष्य में भी रहेंगे। वे भूल जाते हैं कि महंगाई के कारण 12 साल बाद आपको उसी जीवनस्तर के लिए दोगुनी राशि की जरूरत होगी। आपकी आय 'महंगाई-समायोजित' होनी चाहिए।


रीबैलेंसिंग न करना
अगर आपने 70% डेट और 30% इक्विटी से शुरू किया है, तो समय के साथ यह अनुपात बदल जाता है। यदि आप इसे चेक नहीं करेंगे, तो अंत में आपके पास केवल वह हिस्सा बचेगा जो बढ़ नहीं रहा है।

2026 में रिटायर होने वालों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

  • खर्चों से शुरुआत करें: अपनी जरूरतों को दो हिस्सों में बांटें- निश्चित मासिक खर्च और साल के बड़े खर्च (जैसे घर की पुताई या कोई उत्सव)।
  • सुरक्षा कवच बनाएं: अगले 2-3 साल की जरूरत का पैसा लिक्विड फंड में डालें।
  • एसडब्ल्यूपी नियम तय करें: तय करें कि कितना पैसा सुरक्षित बकेट से आएगा और उसे साल-छह महीने में इक्विटी से मुनाफा निकालकर कैसे भरा जाएगा।
  • सालाना समीक्षा: अपने पोर्टफोलियो को हर दिन नहीं, बल्कि साल में एक बार जरूर देखें।

अस्वीकरण: यह दस्तावेज पूरी तरह से केवल इच्छित प्राप्तकर्ताओं की जानकारी और समझ के लिए है। जहां भी संभव हो, दिए गए सभी आंकड़े और डाटा दिनांकित हैं, और वही भविष्य की तारीख में प्रासंगिक हो भी सकते हैं और नहीं भी। इस दस्तावेज में एकत्र की गई जानकारी और उपयोग की गई सामग्री विश्वसनीय स्रोतों से मानी जाती है। इसके अलावा, इस दस्तावेज में व्यक्त की गई राय और संदर्भित तथ्य बिना किसी सूचना के परिवर्तन के अधीन हैं और ABSLAMC इसे अपडेट करने के लिए किसी भी दायित्व के अधीन नहीं है।

आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड की एक निवेशक शिक्षा और जागरूकता पहल
सभी निवेशकों को एक बार केवाईसी (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। निवेशक केवल सेबी पंजीकृत म्यूचुअल फंड में ही निवेश करें। केवाईसी, सेबी पंजीकृत म्यूचुअल फंड की सूची और सेबी स्कोर्स (SCORES) पोर्टल के विवरण सहित शिकायतों के निवारण के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं: https://mutualfund.adityabirlacapital.com/Investor-Education/education/kyc-and-redressal, म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं, योजना संबंधी सभी दस्तावेजों को सावधानी से पढ़ें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed