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शराब पर 10 रुपये ज्यादा क्यों? तमिलनाडु विधानसभा में सवाल पर मचा घमासान; सदन में भिड़े पक्ष-विपक्ष
Mon, 31 Aug 2026 10:45 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 31 Aug 2026 10:45 PM IST
सार
तमिलनाडु विधानसभा में TASMAC दुकानों पर शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त वसूली को लेकर सत्तापक्ष और DMK के बीच तीखी बहस हुई। सरकार ने इसे पुरानी व्यवस्था और कर्मचारियों व दुकानों की जरूरतों से जोड़ते हुए सुधार का दावा किया, जबकि DMK ने इसे भ्रष्टाचार बताकर सवाल उठाए। बाद में भ्रष्टाचार संबंधी टिप्पणी पर विवाद बढ़ा और DMK ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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तमिलनाडु विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को राज्य के स्वामित्व वाली TASMAC दुकानों पर शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने को लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी DMK के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस अतिरिक्त वसूली को लेकर पिछली DMK सरकार पर आरोप लगाते हुए राज्य के निषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश ने स्पष्ट किया कि 10 रुपये की यह राशि सरकार की ओर से लगाया गया कोई शुल्क नहीं है।
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2 रुपये से शुरू हुई थी अतिरिक्त वसूली, अब 10 रुपये तक पहुंची
मंत्री ने इस प्रथा की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि पहले प्रत्येक बोतल पर 2 रुपये लिए जाते थे। इसका उद्देश्य उन दुकान कर्मचारियों की मदद करना था, जिन्हें शुरुआत में महज 2,000 रुपये के मामूली वेतन पर नियुक्त किया गया था। समय के साथ यह राशि बढ़कर 5 रुपये और फिर 10 रुपये हो गई। मंत्री के अनुसार, इसका इस्तेमाल बिजली के बिल, किराया और दुकानों के रखरखाव जैसी जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता रहा, जबकि तत्कालीन DMK सरकार की ओर से इन खर्चों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया था। विग्नेश ने विधानसभा में कहा, “पिछली DMK सरकार ने TASMAC कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करने या दुकानों के नियमित रखरखाव के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने ही वेतन बढ़ाया और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कदम उठा रही है।”
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'जब 10 रुपये वसूले गए तो भ्रष्टाचार का आरोप कैसे?'
पूर्व DMK मंत्री के. एन. नेहरू ने सवाल उठाया कि जब मंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वर्षों से शराब की हर बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त लिए जाते रहे हैं, तो इसके लिए DMK को भ्रष्टाचार के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। नेहरू ने कहा, “आपने पहले इस अतिरिक्त वसूली को भ्रष्टाचार बताया था। अगर पिछली सरकारों के कार्यकाल में यह प्रथा ‘भ्रष्ट’ मानी जाती थी, तो अब भी इसे जारी रखना उतना ही अनुचित है।”
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सरकार ने कर्मचारियों की कम आय और व्यवस्था की खामियां गिनाईं
जवाब में मंत्री ने TASMAC कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने से पहले TASMAC कर्मचारियों का सकल मासिक वेतन 14,000 रुपये था और कटौती के बाद उन्हें करीब 11,000 रुपये ही हाथ में मिलते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस अनियमितता को सही नहीं ठहरा रही, बल्कि व्यवस्था में मौजूद बुनियादी खामियों को दूर करने की कोशिश कर रही है, ताकि इस तरह की वसूली को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
कानून मंत्री ने विपक्ष पर पलटवार किया
कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार पिछली सरकारों से चली आ रही भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जमाए व्यवस्था की सक्रिय रूप से जांच कर रही है। उन्होंने कानूनी दस्तावेजों और अदालत के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पिछली निविदाओं में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया, जहां कुछ लोगों पर व्यवस्था में हेरफेर कर कई खुदरा दुकानों का संचालन करने का आरोप था। मंत्री विग्नेश ने माना कि पिछले दो दशकों से चली आ रही प्रथाओं के कारण TASMAC में व्यापक बदलाव करना एक जटिल चुनौती है। हालांकि, उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में सुधार, दुकानों के संचालन के लिए आधिकारिक तौर पर धन उपलब्ध कराने और दूसरे राज्यों की आधुनिक व्यवस्थाओं के अनुरूप शराब प्रशासन में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर टिप्पणी से भड़का विवाद
सदन में उस समय हंगामा और बढ़ गया, जब लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने पिछली DMK सरकार के दौरान कुछ क्षेत्रों में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार दो तरह का होता है,'एक खनन और रेत निकालने से जुड़ा है, जिसमें काला या सफेद धन हो सकता है, और दूसरा फिल्म उद्योग तथा TASMAC शराब से जुड़ा है।' DMK सदस्यों ने खड़े होकर इसका विरोध किया। इसके तुरंत बाद अर्जुन ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति का विशेष रूप से नाम नहीं लिया है। बाद में DMK सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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DMK नेताओं ने स्पीकर पर जवाब देने का मौका नहीं देने का आरोप लगाया
विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू और वी. सेंथिल बालाजी ने निषेध एवं आबकारी विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान एक मंत्री की ओर से की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि DMK सदस्यों ने पार्टी पर लगाए गए आरोपों का जवाब देने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। दोनों नेताओं के मुताबिक, इसी के विरोध में DMK ने विधानसभा से वॉकआउट किया।