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Maharashtra: दिल्ली पुलिस के डीसीपी के फर्जी AI इस्तीफे का मामला, मुंबई में क्यों दर्ज हुई FIR? जानें सबकुछ
सार
छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस के डीसीपी सुमित झा का एक वीडियो वायरल हुआ था। बाद में जांच में यह वीडियो एआई से तैयार किया गया फर्जी वीडियो निकला। इस मामले में अब मुंबई में एक केस दर्ज किया गया है। विस्तार से पढ़ें पूरा मामला...
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डीसीपी सुमित झा का फर्जी वीडियो।
- फोटो : एक्स
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विस्तार
दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी के एआई से तैयार फर्जी इस्तीफे के वीडियो को लेकर मुंबई में एफआईआर दर्ज की गई है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस का कहना है कि छात्र आंदोलन से जुड़े इस भ्रामक वीडियो के जरिए लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। वीडियो में दावा किया गया था कि दिल्ली के डीसीपी सुमित झा सरकार के दबाव में छात्रों को फंसाने के आरोप लगाते हुए नौकरी छोड़ रहे हैं। बाद में जांच में यह वीडियो एआई से तैयार किया गया फर्जी वीडियो निकला।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को कई कांग्रेस नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों ने साझा किया था। वीडियो में डीसीपी सुमित झा यह कहते दिखाई दे रहे थे कि सरकार ने उनसे हाल में सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन में शामिल छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए कहा था, इसलिए वह सेवा से इस्तीफा दे रहे हैं।
निखिल भामरे ने दर्ज कराई FIR
शिकायत भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े निखिल भामरे ने दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार, 31 जुलाई को उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस नेता भाई जगताप की एक सोशल मीडिया पोस्ट देखी, जिसमें यह वीडियो साझा किया गया था।
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फर्जी वीडियो में क्या था?
वायरल फर्जी वीडियो में डीसीपी सुमित झा कहते सुनाई देते हैं कि सरकार उनसे मीडिया के सामने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ झूठ बोलने की उम्मीद कर रही है। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया कि उन्हें छात्रों को दोषी साबित करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह ऐसे तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते जो उन्हें सच बोलने से रोके और छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए मजबूर करे। वीडियो में यह भी कहा गया कि छात्र आतंकवादी नहीं, बल्कि देश का भविष्य हैं और वह सरकार के बजाय छात्रों के साथ खड़े होने का फैसला कर रहे हैं।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो असली नहीं था, बल्कि एआई की मदद से तैयार किया गया था। इसके बाद पीआईबी ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि वीडियो एआई से तैयार किया गया है। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार, डीसीपी सुमित झा का मूल वीडियो पूरी तरह अलग विषय पर था। उसमें वह यह बता रहे थे कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल किस तरह अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे थे।
एफआईआर में कहा गया है कि छात्र आंदोलन से जोड़कर इस फर्जी वीडियो को बिना किसी वेरिफिकेशन के सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इसी आधार पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मुंबई में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को कई कांग्रेस नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों ने साझा किया था। वीडियो में डीसीपी सुमित झा यह कहते दिखाई दे रहे थे कि सरकार ने उनसे हाल में सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन में शामिल छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए कहा था, इसलिए वह सेवा से इस्तीफा दे रहे हैं।
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निखिल भामरे ने दर्ज कराई FIR
शिकायत भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े निखिल भामरे ने दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार, 31 जुलाई को उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस नेता भाई जगताप की एक सोशल मीडिया पोस्ट देखी, जिसमें यह वीडियो साझा किया गया था।
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फर्जी वीडियो में क्या था?
वायरल फर्जी वीडियो में डीसीपी सुमित झा कहते सुनाई देते हैं कि सरकार उनसे मीडिया के सामने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ झूठ बोलने की उम्मीद कर रही है। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया कि उन्हें छात्रों को दोषी साबित करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह ऐसे तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते जो उन्हें सच बोलने से रोके और छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए मजबूर करे। वीडियो में यह भी कहा गया कि छात्र आतंकवादी नहीं, बल्कि देश का भविष्य हैं और वह सरकार के बजाय छात्रों के साथ खड़े होने का फैसला कर रहे हैं।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो असली नहीं था, बल्कि एआई की मदद से तैयार किया गया था। इसके बाद पीआईबी ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि वीडियो एआई से तैयार किया गया है। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार, डीसीपी सुमित झा का मूल वीडियो पूरी तरह अलग विषय पर था। उसमें वह यह बता रहे थे कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल किस तरह अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे थे।
एफआईआर में कहा गया है कि छात्र आंदोलन से जोड़कर इस फर्जी वीडियो को बिना किसी वेरिफिकेशन के सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इसी आधार पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मुंबई में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।