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पूर्ण बजट पेश करना असंवैधानिक होगा : यशवंत सिन्हा
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 28 Jan 2019 08:52 PM IST
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yashwant sinha
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पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सोमवार को कहा कि यदि लोकसभा चुनाव से पूर्व मोदी सरकार पूर्ण बजट पेश करती है तो यह ‘‘पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक’’ होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि केंद्र सरकार को परंपरा का पालन करते हुए अंतरिम बजट पेश करना चाहिए।
भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन: राजद सरकार के कड़े आलोचक सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि देश में ‘‘अभूतपूर्व’’ कृषि संकट छाया हुआ है लेकिन इसके बावजूद मोदी सरकार आर्थिक आंकड़ों में जोड़तोड़ करने में लगी है। उन्होंने कहा कि रोजगार बढ़ नहीं रहा है और गैर निष्पादित आस्तियों के बोझ की समस्या से उस तरीके से नहीं निपटा गया जैसा कि निपटा जाना चाहिए था।
भारतीय महिला प्रेस कोर में संवाददाताओं से बातचीत में सिन्हा ने कहा कि सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी के प्रवेश का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर सरकार पर कटाक्ष करते हुए सिन्हा ने कहा कि अब आम चुनाव से पूर्व यह सरकार आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर दावा करेगी कि देश में दूध की नदी बह रही है और लोग पहले कभी इतने खुश नहीं थे।
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सरकार द्वारा एक फरवरी को पूर्ण बजट पेश किए जाने की अटकलों के बीच सिन्हा ने कहा कि जाती हुयी सरकार द्वारा कभी भी पूर्ण बजट पेश करने की परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूर्ण बजट पेश करना पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि इस सरकार को न तो आर्थिक सर्वेक्षण और न ही वित्त विधेयक पेश करना चाहिए। आर्थिक सर्वेक्षण आमतौर पर बजट से एक दिन पहले सदन के पटल पर रखा जाता है।
संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होना है
उन्होंने कहा कि साल 2004, 2009 और 2014 में अंतरिम बजट पेश किया गया था। उन्होंने साथ ही कहा कि वह खुद वित्त मंत्री रहते हुए दो अंतरिम बजट पेश कर चुके हैं। आगामी लोकसभा चुनाव पर सिन्हा ने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि ये चुनाव राष्ट्रपति पद के चुनाव की तरह हों लेकिन विपक्षी दलों को कुछ राजनीतिक हस्तियों के बजाय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा हमेशा यह सवाल किए जाते रहे हैं कि नेहरू के बाद कौन?, शास्त्री के बाद कौन? इंदिरा के बाद कौन? लेकिन अक्सर ऐसा होता आया है कि विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ गठबंधन को हराने के बाद अपने नेता का चुनाव किया है।
भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन: राजद सरकार के कड़े आलोचक सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि देश में ‘‘अभूतपूर्व’’ कृषि संकट छाया हुआ है लेकिन इसके बावजूद मोदी सरकार आर्थिक आंकड़ों में जोड़तोड़ करने में लगी है। उन्होंने कहा कि रोजगार बढ़ नहीं रहा है और गैर निष्पादित आस्तियों के बोझ की समस्या से उस तरीके से नहीं निपटा गया जैसा कि निपटा जाना चाहिए था।
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भारतीय महिला प्रेस कोर में संवाददाताओं से बातचीत में सिन्हा ने कहा कि सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी के प्रवेश का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर सरकार पर कटाक्ष करते हुए सिन्हा ने कहा कि अब आम चुनाव से पूर्व यह सरकार आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर दावा करेगी कि देश में दूध की नदी बह रही है और लोग पहले कभी इतने खुश नहीं थे।
सरकार द्वारा एक फरवरी को पूर्ण बजट पेश किए जाने की अटकलों के बीच सिन्हा ने कहा कि जाती हुयी सरकार द्वारा कभी भी पूर्ण बजट पेश करने की परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूर्ण बजट पेश करना पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि इस सरकार को न तो आर्थिक सर्वेक्षण और न ही वित्त विधेयक पेश करना चाहिए। आर्थिक सर्वेक्षण आमतौर पर बजट से एक दिन पहले सदन के पटल पर रखा जाता है।
संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होना है
उन्होंने कहा कि साल 2004, 2009 और 2014 में अंतरिम बजट पेश किया गया था। उन्होंने साथ ही कहा कि वह खुद वित्त मंत्री रहते हुए दो अंतरिम बजट पेश कर चुके हैं। आगामी लोकसभा चुनाव पर सिन्हा ने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि ये चुनाव राष्ट्रपति पद के चुनाव की तरह हों लेकिन विपक्षी दलों को कुछ राजनीतिक हस्तियों के बजाय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा हमेशा यह सवाल किए जाते रहे हैं कि नेहरू के बाद कौन?, शास्त्री के बाद कौन? इंदिरा के बाद कौन? लेकिन अक्सर ऐसा होता आया है कि विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ गठबंधन को हराने के बाद अपने नेता का चुनाव किया है।