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SC: CBI की याचिका पर यासीन मलिक और पांच आरोपी नहीं दे पाए जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह का वक्त दिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 18 Dec 2024 02:23 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट में रुबिया अपहरण केस और वायु सेना अधिकारी हत्या मामले में सुनवाई चल रही है। सीबीआई ने दोनों मामलों को जम्मू ट्रायल कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है। इससे पहले 28 नवंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था। इस पर अब तक छह आरोपी जवाब नहीं दे सके।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी यासीन मलिक और पांच अन्य आरोपी जम्मू में उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग वाली सीबीआई की याचिका पर जवाब नहीं दे पाए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने उनको दो सप्ताह का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट में रुबिया अपहरण केस और वायु सेना अधिकारी हत्या मामले में चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। इससे पहले 28 नवंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था।
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में छह आरोपियों ने सीबीआई की याचिका पर अपने जवाब दाखिल नहीं किए हैं। उनको दो सप्ताह में जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जनवरी को होगी। पीठ ने कहा कि अगर मुकदमे को स्थानांतरित किया जाना है तो सभी आरोपियों को सुनना जरूरी है।
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दो मामलों में चल रही है सुनवाई
यासीन मलिक और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ दो मामलों में सुनवाई चल रही है। पहला मामला 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर में गोलीबारी में चार भारतीय वायु सेना कर्मियों की हत्या से जुड़ा है। जबकि दूसरा मामला आठ दिसंबर 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़ा है। रुबैया सईद के अपहरण के बदले भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने पांच आतंकवादियों को रिहा किया था। सीबीआई ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस मामले को अपने हाथ में लिया था। मामले में सीबीआई ने यासीन मलिक समेत 10 लोगों को याचिका में पक्षकार बनाया है। इनमें से छह आरोपियों ने सीबीआई की याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।
पिछली सुनवाई ने सीबीआई ने यह कहा था
शीर्ष अदालत जम्मू ट्रायल कोर्ट के 20 सितंबर, 2022 के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मलिक को निर्देश दिया गया था कि उन्हें राजनेता मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण के मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह करने के लिए शारीरिक रूप से पेश किया जाए। इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि तिहाड़ जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई करने की सुविधा पहले से उपलब्ध है। मलिक को अदालत ले जाने की जरूरत नहीं है। तिहाड़ जेल में कोर्ट लगता है, इससे पहले भी कई मामले की सुनवाई होती रही है। सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा था कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मलिक को सुरक्षा कारणों से जम्मू नहीं ले जाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में ही जम्मू कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
तिहाड़ जेल में बंद है यासीन मलिक
यासीन को एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकी फंडिंग मामले में बीते साल 25 मई को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यासीन को दो मामलों में उम्रकैद और 10 मामलों में 10 साल सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा उस पर 10 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया था। मलिक तिहाड़ जेल में बंद है।

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