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योग से मिर्गी के इलाज में मिलेगी राहत: कम हो सकता है मानसिक तनाव; AIIMS के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया अध्ययन

Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:08 PM IST
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सार

एम्स के न्यूरो विभाग की सीनियर प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी का कहना है कि मिर्गी के इलाज में दवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन मरीजों के मानसिक और सामाजिक पक्ष को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। योग इस दिशा में प्रभावी पूरक चिकित्सा साबित हो सकता है।

Yoga offers relief in epilepsy treatment: Mental stress may be reduced; AIIMS scientists conducted joint study
मिर्गी पर एम्स के अध्ययन का परिणाम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

मिर्गी (एपिलेप्सी) से पीड़ित लोगों के लिए काम की खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक अध्ययन किया है। इसके जरिए मालूम चला है कि नियमित योग से मिर्गी के मरीजों को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह न सिर्फ मरीजों का मानसिक तनाव कम कर सकता है, बल्कि उनके भीतर मौजूद सामाजिक कलंक की भावना को भी कम कर सकता है। अध्ययन में शामिल मरीजों ने योग करने के बाद खुद को ज्यादा आत्मविश्वासी, सामाजिक रूप से स्वीकार्य और मानसिक रूप से बेहतर पाया।


विशेषज्ञों ने ऐसे किया अध्ययन
यह एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल था, जिसमें वयस्क मिर्गी रोगियों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा। एक समूह को निर्धारित अवधि तक नियमित योग प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे समूह को सामान्य चिकित्सा देखभाल मिलती रही। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने यह आकलन किया कि योग का मरीजों की सामाजिक सोच, मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी से जुड़े कलंक की भावना पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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क्या निकला परिणाम?
शोध में पाया गया कि योग करने वाले मरीजों में मिर्गी को लेकर शर्म या हीन भावना में कमी आई। सामाजिक रूप से अस्वीकार किए जाने का डर घटा। मानसिक तनाव और चिंता के स्तर में सुधार देखा गया। जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई। आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता बढ़ी।
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क्या करें मिर्गी रोगी?    
  • नियमित योग और ध्यान करें, तनाव कम होगा।
  • दवा कभी न छोड़ें, इसे रोज एक ही समय पर लें।
  • कम से कम 8 घंटे की नींद लें, नींद की कमी से दौरे का खतरा बढ़ता है।
  • शराब और तंबाकू का सेवन बंद कर दें।

बीमारी को लेकर मिथक और गलत धारणाएं समाज में व्याप्त- डॉ. राजेश सागर
वहीं, एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर ने बताया कि भारत में लाखों लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। बीमारी को लेकर आज भी कई मिथक और गलत धारणाएं समाज में मौजूद हैं। कई परिवार मरीजों को सामाजिक आयोजनों से दूर रखते हैं या बीमारी छिपाने की कोशिश करते हैं। इससे मरीजों में अकेलापन और अवसाद बढ़ सकता है। शोध बताता है कि अगर नियमित योगाभ्यास को चिकित्सा उपचार के साथ जोड़ा जाए तो मरीजों को मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी लाभ मिल सकता है। इससे वे सामान्य जीवन जीने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।
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