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Bengal: टीएमसी में बगावत पर सियासी घमासान, सांसदों के NCPI में विलय को ममता खेमे ने बताया जनादेश से विश्वासघात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 14 Jun 2026 11:33 PM IST
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सार

टीएमसी के बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय और एनडीए को समर्थन देने के फैसले पर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। टीएमसी नेताओं ने इसे जनादेश और ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात बताया, जबकि भाजपा ने इसे पार्टी के वैचारिक संकट का संकेत कहा।

TMC Rebels Face Sharp Attack as MPs Merge with NCPI, Political Storm Erupts in West Bengal
टीएमसी पर गहराया सियासी संकट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया भूचाल आ गया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा करते हुए संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने का फैसला किया। इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

टीएमसी नेताओं ने इस कदम को पार्टी और मतदाताओं दोनों के साथ विश्वासघात करार दिया है, जबकि भाजपा ने इसे सत्तारूढ़ दल के भीतर बढ़ते असंतोष और वैचारिक शून्यता का परिणाम बताया है।

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कुणाल घोष बोले- यह मतदाताओं के भरोसे से विश्वासघात
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नहीं, बल्कि टीएमसी के चुनाव चिन्ह और ममता बनर्जी के नेतृत्व में जीतकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं ने उन्हें चुना, वे भाजपा विरोधी विचारधारा के थे। ऐसे में NDA का समर्थन करना केवल पार्टी नेतृत्व ही नहीं, बल्कि हर उस मतदाता के साथ धोखा है जिसने उन पर भरोसा जताया था। CID कार्यालय में पूछताछ को लेकर पूछे गए सवाल पर घोष ने कहा कि उन्होंने हमेशा जांच एजेंसियों का सहयोग किया है और इस बार भी पूरी तरह सहयोग किया।
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मदन मित्रा का हमला- दाल में कुछ काला है
टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने भी बागी सांसदों के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सांसदों ने चुनाव ममता बनर्जी और टीएमसी के नाम पर जीता था, लेकिन अब वे अलग राह चुन रहे हैं। मित्रा ने कहा कि यदि 20 सांसद एक साथ पार्टी छोड़ने की स्थिति में हैं, तो इसके पीछे कोई बड़ा कारण जरूर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दाल में कुछ काला है।”

सौगत रॉय ने NCPI विलय को बताया हास्यास्पद
वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बागी नेताओं के NCPI में विलय के फैसले को हास्यास्पद बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन सांसदों को जनता ने टीएमसी के नाम पर चुना, वे अब अपने क्षेत्र में जाकर लोगों को कैसे समझाएंगे कि वे किसी अन्य दल का हिस्सा बन गए हैं। रॉय ने आरोप लगाया कि यह कदम भाजपा के अप्रत्यक्ष समर्थन से उठाया गया है और इसका उद्देश्य संसदीय नियमों के तहत अलग गुट की मान्यता हासिल करने का रास्ता निकालना है।

लोकसभा अध्यक्ष से मिले बागी सांसद
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। उनका दावा है कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद उनके साथ हैं और वे संसद में NDA का समर्थन करेंगे। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा है कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी राजनीतिक दल के भीतर अलग गुट को मान्यता देने की अनुमति नहीं देते।

भाजपा बोली- टीएमसी के भीतर गहरा संकट
भाजपा ने पूरे घटनाक्रम को टीएमसी का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में सांसदों का पार्टी से दूरी बनाना इस बात का संकेत है कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि यह स्थिति टीएमसी की वैचारिक कमजोरी और नेतृत्व संकट को उजागर करती है।

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