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'ज्यादा सैलरी के भूखे हैं शिक्षक': गुजरात के मंत्री रमेश कटारा के बयान पर विवाद, संगठन ने की माफी की मांग

पीटीआई, अहमदाबाद Published by: Rahul Kumar Updated Sun, 14 Jun 2026 10:33 PM IST
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सार

गुजरात के कृषि राज्य मंत्री रमेश कटारा शिक्षकों पर कथित टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए हैं। शिक्षकों को “ज्यादा वेतन के भूखे” बताने वाले बयान पर शिक्षक संगठन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी और बयान वापस लेने की मांग की है।

Gujarat minister sparks row, says Teachers hungry for more salary
गुजरात सरकार में कृषि राज्य मंत्री रमेश कटारा - फोटो : फेसबुक
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विस्तार

गुजरात सरकार में कृषि राज्य मंत्री रमेश कटारा शिक्षकों को लेकर की गई अपनी टिप्पणी के कारण विवादों में घिर गए हैं। शिक्षकों के एक संगठन ने उनके बयान को अपमानजनक बताते हुए सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग की है।



कटारा शनिवार को पंचमहल जिले के गोधरा में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पिछली सरकारों और वर्तमान व्यवस्था की तुलना करते हुए शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षकों के वेतन का भी उल्लेख किया।
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'शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं'
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि पहले गांवों में स्कूलों की सुविधाएं सीमित थीं और शिक्षक बहुत कम वेतन पर काम करते थे। उन्होंने कहा, "आज शिक्षकों को अच्छा वेतन मिल रहा है, लेकिन फिर भी उनकी भूख शांत नहीं होती। वे विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं। हमारे बुजुर्ग 500 या 1,000 रुपये में काम करते थे, लेकिन आज इतनी सुविधाओं और वेतन के बावजूद कुछ लोग काम करने को तैयार नहीं हैं। कटारा ने यह भी आरोप लगाया कि कई शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने शिक्षकों को सलाह देते हुए कहा कि यदि वे स्वयं खुश हैं तो दूसरों को भी खुश रखें।
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शिक्षक संघ मे की माफी की मांग
मंत्री की इन टिप्पणियों की 'प्राथमिक शैक्षिक महासंघ' ने कड़ी आलोचना की है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े इस संगठन के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्धसिंह सोलंकी ने बयान को "बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय" बताया।

सोलंकी ने कहा कि मंत्री ने शिक्षकों को 8वें और 10वें वेतन आयोग का लाभ मिलने का दावा किया, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा, शिक्षकों को लेकर इस तरह की टिप्पणी न केवल भ्रामक है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय का अपमान भी है।

उन्होंने मांग की कि मंत्री रमेश कटारा अपना बयान वापस लें और राज्य के 2.5 लाख से अधिक शिक्षकों से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगें। महासंघ ने अपने बयान में कहा कि शिक्षक समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके सम्मान की रक्षा की जानी चाहिए। हालांकि, विवाद बढ़ने के बावजूद मंत्री रमेश कटारा की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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