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Kathua News: बसोहली चित्रकला को पाठ्य पुस्तकों का हिस्सा बनाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:17 AM IST
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बसोहली में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थी के साथ संवाद करते विधा
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बसोहली के टूरिज्म रिसेप्शन सेंटर में विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन
कठुआ। बसोहली के टूरिज्म रिसेप्शन सेंटर में विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बसोहली विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने छात्रों से संवाद किया। इस अवसर पर एक छात्र ने बसोहली चित्रकला की बारीकियों पर जानकारी दी और मांग रखी कि इस विश्व प्रसिद्ध कला को जम्मू-कश्मीर के सभी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में विषय के रूप में शामिल किया जाए।
विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बसोहली चित्रकला को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना भारतीय कला और संस्कृति के समृद्ध इतिहास को छात्रों तक पहुंचाने का एक शानदार तरीका है। उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी चित्रकला की सबसे पुरानी और प्रभावशाली शैलियों में से एक है। इसमें भृंग के पंखों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है जो न केवल कलात्मकता सिखाता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है।
ठाकुर सिंह ने कहा कि बसोहली चित्रकला 17वीं सदी की पहाड़ी कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें स्थानीय राजाओं और पौराणिक कथाओं जैसे राधा-कृष्ण और विष्णु के अवतारों को दर्शाया गया है। उन्होंने जोर दिया कि पाठ्यक्रम में शामिल होने से यह कला अगली पीढ़ियों तक पहुंच सकेगी और छात्रों को साहित्य और कला के बीच संबंध समझने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस कला में प्रयुक्त चमकीले और बोल्ड रंग, प्राकृतिक पत्थरों और पौधों से बने रंग और मजबूत रेखाएं इसे अन्य शैलियों से अलग बनाती हैं। रसमंजरी, गीत गोविंद और भागवत पुराण जैसे काव्यों पर आधारित चित्र छात्रों को भारतीय साहित्य और कला की गहराई से परिचित कराएंगे। विधायक ने आश्वासन दिया कि वे शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी जैसे निकायों से इस विषय को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की वकालत करेंगे। उन्होंने कहा कि बसोहली चित्रकला को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाकर हम न केवल कला को बढ़ावा देंगे।
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कठुआ। बसोहली के टूरिज्म रिसेप्शन सेंटर में विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बसोहली विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने छात्रों से संवाद किया। इस अवसर पर एक छात्र ने बसोहली चित्रकला की बारीकियों पर जानकारी दी और मांग रखी कि इस विश्व प्रसिद्ध कला को जम्मू-कश्मीर के सभी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में विषय के रूप में शामिल किया जाए।
विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बसोहली चित्रकला को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना भारतीय कला और संस्कृति के समृद्ध इतिहास को छात्रों तक पहुंचाने का एक शानदार तरीका है। उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी चित्रकला की सबसे पुरानी और प्रभावशाली शैलियों में से एक है। इसमें भृंग के पंखों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है जो न केवल कलात्मकता सिखाता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है।
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ठाकुर सिंह ने कहा कि बसोहली चित्रकला 17वीं सदी की पहाड़ी कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें स्थानीय राजाओं और पौराणिक कथाओं जैसे राधा-कृष्ण और विष्णु के अवतारों को दर्शाया गया है। उन्होंने जोर दिया कि पाठ्यक्रम में शामिल होने से यह कला अगली पीढ़ियों तक पहुंच सकेगी और छात्रों को साहित्य और कला के बीच संबंध समझने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस कला में प्रयुक्त चमकीले और बोल्ड रंग, प्राकृतिक पत्थरों और पौधों से बने रंग और मजबूत रेखाएं इसे अन्य शैलियों से अलग बनाती हैं। रसमंजरी, गीत गोविंद और भागवत पुराण जैसे काव्यों पर आधारित चित्र छात्रों को भारतीय साहित्य और कला की गहराई से परिचित कराएंगे। विधायक ने आश्वासन दिया कि वे शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी जैसे निकायों से इस विषय को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की वकालत करेंगे। उन्होंने कहा कि बसोहली चित्रकला को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाकर हम न केवल कला को बढ़ावा देंगे।