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Rajouri News: कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करेगी सिमरन

संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी Updated Mon, 26 Jan 2026 02:34 AM IST
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राजोरी नौशेरा के सीमावर्ती गांव से कर्तव्य पथ तक सीआरपीएफ अधिकारी सिमरन बाला की प्रेरणादायक यात
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राजोरी। जम्मू और कश्मीर के लोग इस गणतंत्र दिवस पर एक खास उपलब्धि का जश्न मनाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जिले के सीमावर्ती गांव की सिमरन बाला 26 जनवरी को नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी।
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26 वर्षीय सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की असिस्टेंट कमांडेंट जिले की पहली महिला हैं जो देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में अधिकारी रैंक में शामिल हुई हैं।
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उनके परिवार ने इस पल को गर्व का क्षण बताया और कहा कि बाला की उपलब्धि ने न केवल उनके घर बल्कि पूरे जिले का सम्मान बढ़ाया है। उनकी बहन शैल बाला ने कहा कि नौशेरा के सीमावर्ती गांव से कर्तव्य पथ तक का उनका सफर चुनौतीपूर्ण रहा है लेकिन उन्होंने हम सभी को गौरवान्वित किया है।
नौशेरा सेक्टर में उनके गांव में रिश्तेदार और शुभचिंतक परिवार को बधाई देने आ रहे हैं और ऐतिहासिक परेड से पहले की खुशी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे कई मौके आए हैं जब महिला सीआरपीएफ अधिकारियों ने विभिन्न गणतंत्र दिवस टुकड़ियों की कमान संभाली है। यह पहली बार है कि कोई महिला अधिकारी इस वार्षिक राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान 140 से अधिक पुरुष कर्मियों की टुकड़ी की कमान संभालेगी।
बाला के पिता विनोद चौधरी ने बताया कि एक पिता के तौर पर यह मेरे लिए गर्व का दिन है। बेटी की उपलब्धि उसकी कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है। उन्होंने कहा कि परिवार ने बाला को पूरा समर्थन दिया लगातार उसे प्रेरित और प्रोत्साहित किया। वह परिवार की तीसरी पीढ़ी है जो वर्दीधारी बल में शामिल होकर देश की सेवा कर रही है और उसकी उपलब्धि दूसरों को भी इसी रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।
सिमरन की मां सृष्टा देवी ने कहा कि वह अपनी बेटी की उपलब्धियों से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी माता-पिता से कहना चाहती हूं कि वे अपनी बेटियों का साथ दें। उन्होंने बताया कि रिश्तेदार और पड़ोसी परिवार से मिलने आ रहे हैं, खुशी बांट रहे हैं और इस उपलब्धि पर गर्व जता रहे हैं।
सिमरन के चाचा रिटायर्ड सैनिक शांति भूषण ने कहा कि उनके माता-पिता उनके समर्थन, मार्गदर्शन और लगातार प्रेरणा के लिए पूरी तरह से श्रेय के हकदार हैं। यह गर्व का पल है जब लड़कियां गांव, परिवार और देश का नाम रोशन करती हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी पहलों ने बेटियों को हर क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया है।
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