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जम्मू-कश्मीर: बर्फबारी से पहले घुसपैठ की चुनौती, सीमा से अंदरूनी इलाकों तक सुरक्षा तंत्र अलर्ट

Wed, 16 Sep 2026 12:30 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 16 Sep 2026 12:30 PM IST
सार

बर्फबारी से पहले जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ रोकने और आतंकवाद रोधी अभियानों को मजबूत करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है। सेना कमांडर और डीजीपी लगातार सीमावर्ती व संवेदनशील जिलों का दौरा कर ऑपरेशनल तैयारियों, सुरक्षा ग्रिड और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का जायजा ले रहे हैं।

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Challenge of infiltration ahead of snowfall
सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बर्फबारी शुरू होने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है। सीमा से लेकर अंदरूनी इलाकों तक सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखने के लिए सेना और पुलिस के शीर्ष अधिकारी फील्ड में पहुंच रहे हैं। उत्तरी कमान के प्रमुख पिछले दस दिनों में लद्दाख, दक्षिण कश्मीर व अखनूर के अग्रिम इलाकों का दौरा कर सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों की समीक्षा की।

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वहीं पुलिस महानिदेशक ने डोडा, जम्मू, पुंछ-राजोरी और कश्मीर संभाग के बडगाम समेत विभिन्न जिलों में पहुंचकर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया। उत्तर कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने चार सितंबर को लद्दाख के अग्रिम इलाकों का दौरा कर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों की ऑपरेशनल तैयारी देखी।

लद्दाख में सेना के सामने चीन और पाकिस्तान की चुनौती है। बर्फबारी के दौरान यह चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। इसके बाद छह और 12 सितंबर को उन्होंने सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दक्षिण कश्मीर के अंदरूनी इलाकों का दौरा किया। काउंटर टेररिज्म ग्रिड की समीक्षा की। यहां सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद रोधी अभियानों और जवानों की तैयारी पर जानकारी ली थी। दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम व शोपियां जिले आते है जो सुरक्षा दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है।14 सितंबर को उन्होंने अखनूर सेक्टर के अग्रिम क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति और सैन्य इकाइयों की तैयारी का जायजा लिया गया। लगातार हो रहे ये दौरे सीमा सुरक्षा के साथ आतंकवाद रोधी मोर्चे पर भी सेना की सक्रियता को दर्शाते हैं।

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जिलों में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था परख रहे डीजीपी
दूसरी ओर डीजीपी नलिन प्रभात भी अलग-अलग जिलों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। डोडा, जम्मू, पुंछ-राजोरी और कश्मीर संभाग के बडगाम समेत अन्य इलाकों में पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय सुरक्षा स्थिति और चुनौतियों की जानकारी ली है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सर्दियों में ऊंचे पहाड़ी दर्रों पर बर्फ जमने के बाद घुसपैठ के रास्ते सीमित हो जाते हैं। ऐसे में उससे पहले सीमा पार से आतंकियों को भेजने की कोशिश की आशंका बनी रहती है। जम्मू संभाग में पुंछ-राजोरी से लेकर अखनूर तक और कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों में निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही अंदरूनी इलाकों में सक्रिय आतंकियों और उनके मददगार नेटवर्क पर कार्रवाई भी जरूरी है।

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