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मीरवाइज फारूक बोले: मस्जिदें और इमामबाड़े बनें बदलाव के केंद्र, कश्मीर में नैतिक मूल्यों के पुनर्जागरण की अपील

अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 17 May 2026 05:36 PM IST
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सार

कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि मस्जिदों, खानकाहों और इमामबारों को केवल इबादत तक सीमित न रखकर समाज सुधार और मार्गदर्शन का केंद्र बनना चाहिए।

Islamic institutions must act as centres of reform, learning and guidance:
मीरवाइज उमर फारूक - फोटो : @MirwaizKashmir
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विस्तार

कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने श्रीनगर में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मस्जिदों, खानकाहों और इमामबारों को केवल इबादत तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक सुधार और मार्गदर्शन के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए।



मीरवाइज ने कहा कि इस्लामिक इतिहास में धार्मिक संस्थानों ने हमेशा समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने, एकता बढ़ाने और सामाजिक चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाई है। आज के समय में, जब समाज कई तरह की राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि मस्जिदें और धार्मिक स्थल युवाओं को सही दिशा देने, नैतिक मूल्यों को मजबूत करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनने चाहिए।

मीरवाइज ने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती भौतिकता, पारिवारिक समस्याएं और नैतिक गिरावट जैसे मुद्दों पर सामूहिक रूप से विचार और प्रयास की जरूरत है। पैगंबर मोहम्मद के जीवन और शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं केवल भाषणों या आयोजनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपनाना चाहिए।

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