सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   J&K government has clarified a new and eco-friendly policy for the rehabilitation of Dal Lake residents.

डल झील के लोगों को राहत: विस्थापन नहीं, अब झील के अंदर ही बसे रहेंगे परिवार, नई पुनर्वास नीति का ऐलान

अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 08 Feb 2026 12:58 PM IST
विज्ञापन
सार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने डल झील के निवासियों के लिए विस्थापन के बजाय यथास्थान संरक्षण मॉडल अपनाने का फैसला किया है, जिसके तहत परिवार झील के भीतर ही बसाए जाएंगे। नई नीति के तहत पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संतुलन बनाए रखने के लिए इको हैमलेट विकसित किए जाएंगे।
 

J&K government has clarified a new and eco-friendly policy for the rehabilitation of Dal Lake residents.
श्रीनगर की डल झील में बने घर और शिकारे में सवार लोग। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने डल झील के निवासियों के पुनर्वास के लिए एक नई और पर्यावरण-अनुकूल नीति स्पष्ट की है। अब परिवारों को डल से दूर करने के बजाय यथास्थान संरक्षण मॉडल के तहत झील के पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर ही स्थायी रूप से बसाया जाएगा।

Trending Videos


आवास और शहरी विकास विभाग ने विधानसभा में बताया है कि अब तक 1,808 परिवारों को रखे अर्थ कॉलोनी में स्थानांतरित किया जा चुका है लेकिन अब नीति विस्थापन से हटकर संरक्षण-आधारित आवास की ओर बढ़ गई है। इसमें डल झील में रहने वालों को झील के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग माना गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि पिछले दशकों में बड़े पैमाने पर विस्थापन से कोई खास परिणाम नहीं मिला है। ये जानकारी विधायक तनवीर सादिक के पूछे गए गैर-तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन में दी गई है। कश्मीर के मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति की चर्चाओं का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि यथास्थान संरक्षण मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया है।

जम्मू और कश्मीर झील संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण (जेकेएलसीएमए) को सार्वजनिक परामर्श के जरिए एक व्यापक नीति बनाने का जिम्मा सौंपा गया है ताकि पर्यावरण सुरक्षा के साथ निवासियों का आजीविका संतुलन बना रहे।

अधिकतम पुनर्वास वाली बस्तियां बाहर ही रहेंगी
नीतिगत ढांचे के अनुसार प्राथमिकता वाली बस्तियों जहां अधिकतम पुनर्वास पहले ही किया जा चुका है, को यथास्थान संरक्षण से बाहर रखा जाएगा जबकि झील के भीतर केवल सीमित संख्या में संरचनाओं की पहचान अद्यतन सर्वेक्षणों के आधार पर पुनर्वास के लिए की जाएगी। झील के अंदर संरचनाओं की कुल संख्या सत्यापन के बाद तय की जाएगी।

सरकार ने कहा कि डल झील में रहने वालों को कहीं और विस्थापित करने के बजाय इनके लिए झील में ही छोटे-छोटे इको-विलेज विकसित किए जा रहे हैं। यह पुनर्वास और संरक्षण योजना को जेकेएलसीएमए के निदेशक मंडल द्वारा सैद्धांतिक रूप से अनुमोदित किया गया है और उच्च-स्तरीय समिति द्वारा समर्थित किया गया है।

झील और लोगों दोनों की सुरक्षा में ये महत्वपूर्ण कदम, तनवीर सादिक :
जडीबल से विधायक और एनसी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि डल में (मीर बेहरी, निगीन, रखे अर्थ) रहने वाले लोगों को आखिरकार डल के पारिस्थितिकी तंत्र का जरूरी हिस्सा मान लिया गया है। सरकार ने जबरदस्ती विस्थापन के बजाय यथास्थान संरक्षण मॉडल अपनाया है।

डल-नगीन संरक्षण के लिए 212 करोड़ मंजूर किए गए हैं। आधुनिक गावों का विकास पहले से ही चल रहा है। ये झील और लोगों दोनों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यथास्थान संरक्षण का मतलब है कि लोग जहां संभव हो अपने पारंपरिक गावों में रह सकते हैं। कैपेक्स के तहत पहले से ही छह गांवों का विकास किया जा रहा है। सीवेज, संरक्षण, नेविगेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 212.38 करोड़ की एक बड़ी एकीकृत डल-निगीन संरक्षण परियोजना को मंजूरी दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed