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Srinagar News: वेटलैंड संरक्षण योजनाओं में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, जम्मू कश्मीर सरकार को लगाई फटकार
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के पत्राचार का लगभग एक साल तक कोई जवाब न देने पर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। मामला तीन प्रमुख वेटलैंड रिजर्व की संरक्षण योजनाओं से जुड़ा है। अदालत ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस देरी पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर यह निर्देश जारी किए। मंत्रालय ने अदालत को अवगत कराया कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने 25 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (एनपीसीए) के तहत 2025-26 से 2029-30 की अवधि के लिए तीन वेटलैंड्स के एकीकृत प्रबंधन प्लान (आईएमपी) प्रशासनिक स्वीकृति हेतु भेजे थे।
मंत्रालय ने अदालत को बताया कि ये प्रस्ताव एनपीसीए योजना के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद मंत्रालय ने 10 सितंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर सरकार को पत्र लिखकर 2024 के नए दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक वेटलैंड के लिए अलग-अलग प्रबंधन योजना भेजने को कहा था, लेकिन प्रशासन ने इसका अब तक कोई जवाब नहीं दिया।
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हाई कोर्ट ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए यूटी प्रशासन को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि मंत्रालय के पत्र का जवाब क्यों नहीं दिया गया और अलग-अलग योजनाएं दोबारा क्यों नहीं भेजी गईं। इसके साथ ही पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि इन योजनाओं को तैयार करते समय जम्मू-कश्मीर के अन्य रामसर स्थलों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
मंत्रालय ने अदालत को यह भी सूचित किया कि एनपीसीए योजना को 30 सितंबर 2026 तक अंतरिम विस्तार दिया गया है और 2026-31 के चक्र के लिए इसे आगे बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर तय की है।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के पत्राचार का लगभग एक साल तक कोई जवाब न देने पर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। मामला तीन प्रमुख वेटलैंड रिजर्व की संरक्षण योजनाओं से जुड़ा है। अदालत ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस देरी पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर यह निर्देश जारी किए। मंत्रालय ने अदालत को अवगत कराया कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने 25 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (एनपीसीए) के तहत 2025-26 से 2029-30 की अवधि के लिए तीन वेटलैंड्स के एकीकृत प्रबंधन प्लान (आईएमपी) प्रशासनिक स्वीकृति हेतु भेजे थे।
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मंत्रालय ने अदालत को बताया कि ये प्रस्ताव एनपीसीए योजना के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद मंत्रालय ने 10 सितंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर सरकार को पत्र लिखकर 2024 के नए दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक वेटलैंड के लिए अलग-अलग प्रबंधन योजना भेजने को कहा था, लेकिन प्रशासन ने इसका अब तक कोई जवाब नहीं दिया।
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हाई कोर्ट ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए यूटी प्रशासन को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि मंत्रालय के पत्र का जवाब क्यों नहीं दिया गया और अलग-अलग योजनाएं दोबारा क्यों नहीं भेजी गईं। इसके साथ ही पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि इन योजनाओं को तैयार करते समय जम्मू-कश्मीर के अन्य रामसर स्थलों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
मंत्रालय ने अदालत को यह भी सूचित किया कि एनपीसीए योजना को 30 सितंबर 2026 तक अंतरिम विस्तार दिया गया है और 2026-31 के चक्र के लिए इसे आगे बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर तय की है।