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कैंसर को दी मात, हौसले ने रचा इतिहास: कीमोथेरेपी के बीच आकाश ने 10वीं में पाए 97%, बीमारी नहीं रोक सकी उड़ान

यूनिस खालिक, अमर उजाला नेटवर्क, पुलवामा Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 16 Jan 2026 11:20 AM IST
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सार

रक्त कैंसर से जूझ रहे पुलवामा के 16 वर्षीय आकाश अशरफ ने कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बीच अस्पताल के वार्ड को ही कक्षा बनाकर 10वीं की जेके बोर्ड परीक्षा में 97% अंक हासिल किए।

Scored 97% in Class 10 amid cancer battle
बारामुला के दृष्टिबाधित छात्र ने जेकेबोस कक्षा 10 में हासिल किए 468 अंक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पढ़ाई का जज्बा हो तो हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। डेढ़ साल से अस्पताल में भर्ती 16 साल के आकाश अशरफ को रक्त कैंसर भी रोक नहीं पाया। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बीच उसने अपने वार्ड को ही कक्षा बना लिया।

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बिना ट्यूशन सेल्फ स्टडी की और 10वीं की जेके बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी परेशानियों के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं। पुलवामा के त्राल स्थित गांव डाडसरा के रहने वाले मोहम्मद अशरफ मीर ने बताया कि पहली बार जून 2024 में उनके बेटे आकाश में रक्त कैंसर की बीमारी का पता लगा था। तब से उसका इलाज चल रहा है।
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आकाश ने बताया कि वह डाडसरा के स्कूल में कक्षा नौ के बीच सत्र में था तब जून 2024 में आखिरी बार स्कूल में अपनी रेगुलर कक्षा ली थी। उसके बाद मुझे अपनी बीमारी के बारे में पता लगा। पिछले डेढ़ साल से मैं लगभग बिस्तर पर ही था, इन महीनों में मैंने कभी अपना क्लासरूम अटेंड नहीं किया बल्कि खुद को हमेशा कीमोथेरेपी से रेडियोथेरेपी वार्ड में घूमता हुआ पाया।

वह इस जानलेवा बीमारी से घबराया नहीं बल्कि उसने अपने सपने को सच कर दिखाया। पहले नौवीं और फिर अब 10वीं की परीक्षा में 500 में से 485 अंक हासिल किए हैं। आकाश ने बताया कि मैं हमेशा बोर्ड परीक्षा में टॉप करना चाहता था लेकिन मेरी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

सभी मुश्किलों के बावजूद, ज्यादातर समय मेरे पास खड़े होने की भी शक्ति नहीं होती थी लेकिन जब भी मुझे थोड़ा समय मिलता तो मैं पढ़ाई करता था और बिना किसी रेगुलर क्लास या किसी प्राइवेट ट्यूशन के परीक्षा दी। बीमारी की वजह से काफी कमजोर हूं, मैं किसी भी रेगुलर क्लास में जाने की शक्ति नहीं है लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा।

मैं मेडिकल सब्जेक्ट्स के साथ अपनी पढ़ाई ऑफलाइन या डिस्टेंस मोड से जारी रखूंगा। डॉक्टरों ने उसे बताया है कि आने वाले 2-3 महीनों में उसे स्टेम सेल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाना होगा। उससे पहले वह 11वीं क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, इंग्लिश और फिजिकल एजुकेशन सब्जेक्ट्स पढ़ने के लिए एडमिशन लेना चाहता है।

बारामुला के दृष्टिबाधित छात्र ने हासिल किए 468 अंक
शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए असाधारण दृढ़ संकल्प के बल पर उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के चंदीकूट गांव के दृष्टिबाधित छात्र मुसैब यूसुफ ने जेके बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 468 अंक हासिल किए हैं।

मुसैब की यह उल्लेखनीय उपलब्धि पूरे जिले में सराहना प्राप्त कर रही है। यह एक शक्तिशाली संदेश देती है कि आंखों की रोशनी का अभाव दिमाग की चमक को कभी कम नहीं कर सकता। परिणाम घोषित होने के बाद बातचीत में मुसैब ने विनम्रता से अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट समर्थन और शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि उनके प्रोत्साहन ने ही उन्हें चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने और प्रेरित रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों और स्थानीय निवासियों ने मुसैब को मेहनती, अनुशासित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला बताया।

चिनैनी की आराध्या ने 10वीं में हासिल किए 98 प्रतिशत अंक
गर्ल्स हाई स्कूल चिनैनी की छात्रा आराध्या अंताल ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक लेकर स्कूल तथा क्षेत्र का नाम रोशन किया है। परिजनों ने कहा कि आराध्या पढ़ने-लिखने में काफी तेज है तथा उसने काफी मेहनत की है। स्कूल में टॉप कर 98 फीसदी अंक हासिल किए हैं।

पिता रबिंद्र अंताल ने कहा कि आराध्या का सपना है कि वह डॉक्टर बने और उसने पूरे क्षेत्र में स्कूल का तथा परिजनों का नाम रोशन किया है। आराध्या के अच्छे अंक आने के बाद घरों में बधाई देने वालों का तांता लग गया। उन्होंने कहा कि उनकी बच्ची ने अच्छे अंक लिए हैं तो इसमें स्कूल प्रशासन का काफी सहयोग है और वह उनका भी धन्यवाद करते हैं।

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