लारमी के आंसुओं पर गरमाई सियासत: 'निराश विधायकों के आंसू पोछें सीएम उमर, नहीं तो हम आएंगे', बोले सुनील शर्मा
भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज नेकां विधायक अब्दुल मजीद लारमी के आंसुओं पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उन्हें नहीं संभालेंगे तो वे उनके आंसू पोछेंगे।
विस्तार
प्रदेश में कैबिनेट विस्तार और नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने चुटीली प्रतिक्रिया दी है। साथ ही असंतुष्ट विधायकों के आंसू पोछने के बयान से सियासत को गरमा दिया। उन्होंने विपक्ष के नाते नए मंत्रियों को शुभकामनाएं दीं, वहीं जनता की खिदमत करने की नसीहत भी दी। शपथ समारोह के बाद लोकभवन के बाहर शपथ ग्रहण में नेकां के कई वरिष्ठ विधायकों के शामिल न होने व उपेक्षा से विधायक लारमी की आंखों में आंसू आने के सवाल पर सुनील शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि यह देखना मुख्यमंत्री उमर का काम है। उमर साहब का यह फर्ज बनता है कि वे अपने निराश विधायकों के पास जाएं और उनके आंसू पोछें। अगर नहीं तो हम उनके आंसू पोछेंगे। शर्मा ने कहा कि उम्मीद है कि मंत्री आवाम के लिए पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत और काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार से बाहर निकल कर आम लोगों और जनता की खिदमत करे।
सरकार गिरने के सवाल पर बोले-सब्र रखें, आगे-आगे देखिए होता है क्या?
जब पूछा कि भाजपा पहले से दावा करती रही है कि सरकार में अंदरूनी कलह से यह गिर जाएगी, तो क्या कैबिनेट विस्तार के बाद यह गिरने वाली है, इस पर शर्मा ने कहा, अभी तो शपथ ग्रहण हुए कुछ मिनट हुए हैं, एक घंटा भी नहीं बीता है। सरकार गिराने की इतनी भी क्याजल्दबाजी है। थोड़ा सब्र रखें,आगे-आगे देखिए क्या होता है।जल्दबाजी मत कीजिए। शर्मा के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भले ही उमर कैबिनेट का विस्तार कर संख्या बल पूरा कर लिया हो, पर विपक्ष नेकां के भीतर उपेक्षित विधायकों के असंतोष और आंतरिक कलह पर पैनी नजर गड़ाए बैठा है।
क्षेत्रीय व धार्मिक असंतुलन का लगाया आरोप
शर्मा ने उमर सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक असंतुलन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, सरकार को सभी समुदायों, क्षेत्रों और इलाकों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन नए मंत्रिमंडल में ऐसा संतुलन नजर नहीं आता है। उन्होंने कहा कि सरकार में सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना जरूरी है।
शपथ समारोह में कालू का वीडियो साझा कर भाजपा ने चयन पर उठाए सवाल
श्रीनगर। भाजपा ने एक्स पर शपथ ग्रहण समारोह का अल्ताफ कालू का वीडियो साझा कर सवाल उठाया है। भाजपा जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक हैंडल से जारी इस वीडियो को साझा करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तंज कसा, वाह उमर अब्दुल्ला जी, वाह! क्या सेलेक्शन है मिनिस्टर के लिए।
नेकां के एजेंडे में जम्मू कभी था ही नहीं अब पूरी तरह कश्मीर की पार्टी
भाजपाकैबिनेट से सतीश शर्मा को बाहर किए जाने के बाद भाजपा ने एनसी पर जम्मू के साथ भेदभाव को लेकर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा, नेकां के एजेंडे में कभी जम्मू था ही नहीं। कैबिनेट में कश्मीर से चारों मंत्रियों को जगह दी है, जो बताता है कि नेकां वह पूरी तरह कश्मीर की पार्टी है। एनसी को समर्थन देने वालों पर हमला बलते हुए कहा,वे जानते थे कि यह पार्टी मौका मिलने पर साइड लाइन कर देगी। धोखा देगी, यह किसी की नहीं। अब एनसी ने ऐसा कर दिखाया है। जम्मू के मंत्री को कैबिनेट से ड्रॉप कर दिया गया। जम्मू वालों के हित पर उसने कभी सोचा ही नहीं। अब जनता को मौकापरस्तों को जवाब देना चाहिए। सोचना चाहिए कि उनसे क्या गलती हुई और अब ऐसी गलती न दोहराएं।
फेरबदल नेकां का मसला, हम उसका रिपोर्ट कार्ड तैयार करेंगे : पीडीपी
उमर कैबिनेट में फेरबदल पर पीडीपी प्रवक्ता मोहित भान ने कहा, यह नेकां का अपना मसला है, लेकिन इससे कुछ बदलने वाला नहीं। पिछले दो साल में उमर सरकार की नाकामी हर क्षेत्र में दिखती है। चुनावी वादे पूरे नहीं हुए। अनुच्छेद 370, 35-ए पर उसका रुख जनभावनाओं के विपरीत रहा है। पहले सभी को मुफ्त बिजली का वादा था, अब बीपीएल की शर्त रख दी गई है। सरकार से जनता को कोई उम्मीद नहीं। हम सरकार के चुनावी वादों व नाकामी का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेंगे।
अभी स्टेटहुड पर ही फोकस, कांग्रेस
जम्मू।प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा, कैबिनेट विस्तार का अिधकार सीएम के पास होता है। वह जिसे चाहे मंत्री बना सकते हैं पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है जब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता वह सत्ता से बाहर रहेगी। इसी पर फोकस कर संघर्ष जारी रखेंगे।
नेकां में कोई विरोध नहीं, नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा हक : इत्तू
कैबिनेट मंत्री सकीना इत्तू ने कैबिनेट विस्तार से पार्टी में बगावत के दावों को खारिज करते हुए कहा कि नेता लोकतांत्रिक ढांचे के तहत राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। इसे विरोध करार नहीं दिया जाना चाहिए। कहा, मंत्री पद कोई स्थायी विशेषाधिकार नहीं है। यह जरूरी नहीं है कि जिसे नेतृत्व ने एक बार मौका दिया है,उसे आगे भी वही पद मिलता रहे। नाराजगी की खबरों पर कहा, पार्टी ने अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है। नेता अपनी बात रख रहे हैं, न कि कोई बगावत कर रहे हैं। जम्मू संभाग की अनदेखी के आरोपों पर इत्तू ने कहा, जम्मू की अनदेखी कहां हो रही है? हमारे उपमुख्यमंत्री खुद कहां से आते हैं? उन्होंने क्षेत्रीय संतुलन के आरोपों को बेबुनियाद बताया।