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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि से खास बातचीत: 'आवाज दबाने से मुद्दे नहीं मरते... लद्दाख की लड़ाई अब और गहरी'

जैनब संधू Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 09 Jan 2026 11:49 AM IST
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सार

सोनम वांगचुक की रासुका के तहत गिरफ्तारी के बावजूद लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई और तेज हो गई है, उनकी पत्नी गीतांजलि जैन आंगमो ने कहा कि एक व्यक्ति को चुप कराने से पूरे लद्दाख की आवाज नहीं दबेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताते हुए छठी अनुसूची, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सहमति के साथ विकास को लद्दाख के भविष्य के लिए अनिवार्य बताया। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

Wangchuk's wife Geetanjali said - I have faith in the Supreme Court, we will definitely get justice.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जैन आंगमो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आवाज दबाने से मुद्दे नहीं मरते... सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी से लद्दाख की लड़ाई और गहरी हुई है। लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में हैं पर इससे लद्दाख की लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। लद्दाख की लीडरशिप वांगचुक के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी रिहाई की मांग कर रही है। एक व्यक्ति को चुप कराने से लद्दाख की आवाज नहीं दबेगी। सोनम को आवाज को जनता सामूहिक रूप से आगे बढ़ा रही है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है और न्याय जरूर मिलेगा। ये बातें वीरवार को जेल में बंद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जैन आंगमो ने विशेष बातचीत में साझा कीं।

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जेल में सोनम वांगचुक नियमित रूप से व्यायाम, ध्यान और अध्ययन करते हैं
गीतांजलि जैन आंगमो ने कहा कि सोनम वांगचुक मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत हैं। वह जेल में भी नियमित रूप से व्यायाम, ध्यान और अध्ययन करते हैं। खुद को और अधिक वैचारिक गहराई दे रहे हैं। वे इतिहास, राष्ट्रवाद, वास्तुकला और श्री अरविंदो व जवाहरलाल नेहरू जैसे चिंतकों की रचनाएं पढ़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर कहा, हमारा केस मजबूत है। दुनिया विश्वास पर चलती है। सत्य की जीत होगी, इस पर हमें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, आम तौर पर जिस तरह की तारीखें मिलती हैं उसके मुकाबले हमें अपेक्षाकृत जल्दी तारीखें मिल रही हैं।

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केंद्र सरकार लद्दाख से किए चुनावी वादों से पीछे हट रही
आंगमो ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लद्दाख से जुड़े चुनावी वादों से पीछे हट रही है। इससे किसी का फायदा नहीं है बल्कि लद्दाख कई साल पीछे जा रहा है। उन्होंने एजेंसियों पर भी कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया और कहा कि सरकार राजनीतिक उत्पीड़न के बजाय हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (हायल) को समर्थन देती तो यह भारत की विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी बन सकती थी। उन्होंने कहा, तमाम अड़चनों के बावजूद फेलोशिप कार्यक्रम जारी हैं। हालांकि नए कार्यक्रमों को टालना पड़ा है।

आज के फैसले लद्दाख को 100 साल तक प्रभावित करेंगे
छठी अनुसूची की मांग के सवाल पर गीतांजलि ने कहा, यह लद्दाख की जमीन और संसाधनों की सुरक्षा का सवाल है। आज लिए गए फैसले लद्दाख को अगले 100 साल तक प्रभावित करेंगे। विकास का मतलब संरक्षण को नकारना नहीं है बल्कि स्थानीय लोगों की सहमति और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी से विकास होना चाहिए। उन्होंने वांगचुक की गिरफ्तारी और आंदोलन के दौरान चार लोगों की मौत के दिन को काला दिन बताया।

नवाचार और शिक्षा की आवश्यकता पर दिया जोर
लद्दाख पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव...कम होती बर्फबारी, अनियमित बारिश और पारंपरिक जीवनशैली पर असर पर बात करते हुए आंगमो ने नवाचार और शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, परिवर्तन ही एकमात्र स्थायी सत्य है। अगर हम अपनी युवा पीढ़ी को कौशल, मूल्य और मजबूती के साथ तैयार करें तो डरने की कोई जरूरत नहीं।

देर है अंधेर नहीं
आंगमो ने सोनम वांगचुक का संदेश साझा किया...देर है अंधेर नहीं। उन्होंने लद्दाख के लोगों और नेतृत्व से एकजुटता, धैर्य और दृढ़ता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि अगर मिलकर लगातार प्रयास करते रहें तो पहाड़ भी टूट सकते हैं।


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