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Udhampur News: सावन में हरी चूड़ियां और हरे परिधान आस्था, संस्कृति और सौंदर्य का प्रतीक
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उधमपुर। सावन माह की शुरुआत के साथ ही वीरवार से स्थानीय बाजारों में हरियाली की छटा दिखाई देने लगी है। हरी चूड़ियों, सूट, दुपट्टों, मेहंदी और शृंगार सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की आवाजाही बढ़ गई है। हरियाली तीज और सावन के सोमवार को ध्यान में रखते हुए महिलाएं अभी से खरीदारी में जुट गई हैं। शहर के मुख्य बाजारों में सुबह से शाम तक महिलाओं की अच्छी-खासी आवाजाही देखी जा रही है।
सावन में हरे रंग के परिधानों और चूड़ियों का विशेष महत्व होने के कारण इनकी मांग सबसे अधिक बनी हुई है। दुकानदारों के अनुसार सावन शुरू होते ही हरे रंग की चूड़ियों और कपड़ों की बिक्री में तेजी आई है। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए दुकानदारों ने विशेष ऑफर और छूट भी शुरू कर दी है। बाजार में 199 और 299 रुपये से शुरू होने वाली कई आकर्षक रेंज उपलब्ध हैं, जबकि कुछ चुनिंदा परिधानों पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।
कपड़ा कारोबारी अर्जुन, शेखर शर्मा, बिल्लू शाह और यशपाल शर्मा ने बताया कि कॉटन, फैंसी सिल्क, बनारसी, चिकनकारी पैटर्न और फरशी सलवार सूट महिलाओं की पसंद बने हुए हैं। हरे, मेहंदी, पिस्ता ग्रीन, पैरट ग्रीन और एमराल्ड ग्रीन रंग के कपड़ों की सबसे ज्यादा मांग है। वहीं, चूड़ी विक्रेता नितिन गुप्ता ने बताया कि कांच की चूड़ियां दिल्ली और फिरोजाबाद से, जबकि मेटल चूड़ियां जयपुर से मंगाई जाती हैं। बाजार में स्टोन वर्क, डिजाइनर और साधारण चूड़ियों की कई वैरायटी उपलब्ध हैं।
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आस्था और परंपरा से जुड़ा है हरा रंग
महिलाओं का कहना है कि सावन में हरे कपड़े और हरी चूड़ियां पहनना केवल शृंगार का हिस्सा नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है। वहीं पंडित शेखर शर्मा ने बताया कि हरियाली तीज और सावन के अवसर पर हरा रंग पहनने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हालांकि, इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ाव और पारंपरिक संस्कृति की भावना भी शामिल है। सावन 30 जुलाई से शुरू होकर श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक रहेगा।
कोट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। सावन माह में ही उनकी भक्ति और आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। हरा रंग माता पार्वती को अति प्रिय था।
-- -गीता देवी
सावन में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। मान्यता के अनुसार माता पार्वती को हरा रंग प्रिय था। इसलिए सावन में हरा रंग पहनने की परंपरा भी इसी धार्मिक और सांस्कृतिक भावना से जुड़ी हुई है।
-संतोषी
सावन का महीना हम महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। हरी चूड़ियां पहनना हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। यह केवल फैशन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा है। भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा के साथ महिलाएं इसे अपनाती हैं। इस दौरान हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है।
-पूजा देवी
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सावन में हरे रंग के परिधानों और चूड़ियों का विशेष महत्व होने के कारण इनकी मांग सबसे अधिक बनी हुई है। दुकानदारों के अनुसार सावन शुरू होते ही हरे रंग की चूड़ियों और कपड़ों की बिक्री में तेजी आई है। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए दुकानदारों ने विशेष ऑफर और छूट भी शुरू कर दी है। बाजार में 199 और 299 रुपये से शुरू होने वाली कई आकर्षक रेंज उपलब्ध हैं, जबकि कुछ चुनिंदा परिधानों पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।
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कपड़ा कारोबारी अर्जुन, शेखर शर्मा, बिल्लू शाह और यशपाल शर्मा ने बताया कि कॉटन, फैंसी सिल्क, बनारसी, चिकनकारी पैटर्न और फरशी सलवार सूट महिलाओं की पसंद बने हुए हैं। हरे, मेहंदी, पिस्ता ग्रीन, पैरट ग्रीन और एमराल्ड ग्रीन रंग के कपड़ों की सबसे ज्यादा मांग है। वहीं, चूड़ी विक्रेता नितिन गुप्ता ने बताया कि कांच की चूड़ियां दिल्ली और फिरोजाबाद से, जबकि मेटल चूड़ियां जयपुर से मंगाई जाती हैं। बाजार में स्टोन वर्क, डिजाइनर और साधारण चूड़ियों की कई वैरायटी उपलब्ध हैं।
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आस्था और परंपरा से जुड़ा है हरा रंग
महिलाओं का कहना है कि सावन में हरे कपड़े और हरी चूड़ियां पहनना केवल शृंगार का हिस्सा नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है। वहीं पंडित शेखर शर्मा ने बताया कि हरियाली तीज और सावन के अवसर पर हरा रंग पहनने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हालांकि, इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ाव और पारंपरिक संस्कृति की भावना भी शामिल है। सावन 30 जुलाई से शुरू होकर श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक रहेगा।
कोट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। सावन माह में ही उनकी भक्ति और आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। हरा रंग माता पार्वती को अति प्रिय था।
सावन में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। मान्यता के अनुसार माता पार्वती को हरा रंग प्रिय था। इसलिए सावन में हरा रंग पहनने की परंपरा भी इसी धार्मिक और सांस्कृतिक भावना से जुड़ी हुई है।
-संतोषी
सावन का महीना हम महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। हरी चूड़ियां पहनना हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। यह केवल फैशन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा है। भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा के साथ महिलाएं इसे अपनाती हैं। इस दौरान हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है।
-पूजा देवी