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Udhampur News: इंसानों के दुत्कारे बेजुबानों पर शालिनी दिखा रहीं शालीनता, बीमार और लाचार मवेशियों व जानवरों की कर रहीं सेवा
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उधमपुर। खुद के लिए तो सभी जीते हैं लेकिन सार्थक जीवन वही होता है जो दूसरों के काम आए। उधमपुर की शालिनी खजूरिया (47) ने इस कथन को अपने जीवन में चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने अपना जीवन इंसानों के दुत्कारे बेजुबानों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।
लावारिस, बीमार और लाचार पशुओं व जानवरों के प्रति दया भाव ने शालिनी की समाज में अलग पहचान बनाई है। वह स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अब तक सैकड़ों बीमार या घायल जानवरों के जख्मों पर मरहम लगा चुकी हैं। जिले में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए सोसायटी (एसपीसीए) की वह एकमात्र महिला सदस्य हैं और वर्ष 2021 से निस्वार्थ भाव से सेवाएं दे रही हैं। महिला होने के बावजूद वह लावारिस, घायल और लाचार जानवरों की सहायता के लिए 24 घंटे तत्पर हैं। शहर में कहीं भी कोई बीमार या घायल जानवर नजर आता है तो लोग पहली काॅल शालिनी खजूरिया को ही लगाते हैं। वह तुरंत मरहम-पट्टी लेकर पहुंच जाती हैं।
35 से अधिक मवेशियों की कर रहीं देखभाल
वर्तमान में शालिनी अपने एसपीसीए केंद्र में 35 से अधिक घायल, बीमार और लावारिस मवेशियों व कुत्तों की देखभाल कर रही हैं। पशु बाड़े में मवेशी तस्करों से छुड़ाए गए पशुओं की देखभाल में भी वह पुलिस और प्रशासन का सहयोग करती हैं। सड़क हादसों में घायल होने वाले तथा लावारिस मवेशियों की सहायता के लिए भी सदैव तैयार रहती हैं। शालिनी का अगला लक्ष्य उधमपुर में एक सुसज्जित और सुविधाजनक एसपीसीए केंद्र की स्थापना करना है ताकि अधिक से अधिक पशुओं को बेहतर उपचार और संरक्षण मिल सके।
बचपन से था जानवरों के प्रति लगाव और सेवा भाव
शालिनी का बचपन से ही पशुओं से प्यार रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में एसपीसीए से जुड़ने के बाद पशु सेवा उनके जीवन का जुनून बन गई। वह मां भगवती की भक्त हैं। पेशे से ब्यूटीशियन होने के बावजूद अधिकतर समय पशुओं की सेवा में ही व्यतीत करती हैं। उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानती हैं। इस नेक कार्य में जोरावर सिंह भी उनका साथ दे रहे हैं। समाज के लिए उन्होंने संदेश दिया कि पालतू पशुओं के प्रति दया भाव बनाए रखें। उन्हें बूढ़ा, बीमार या घायल होने पर घर से न निकालें। लावारिस मवेशियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने का प्रयास करें।
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लावारिस, बीमार और लाचार पशुओं व जानवरों के प्रति दया भाव ने शालिनी की समाज में अलग पहचान बनाई है। वह स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अब तक सैकड़ों बीमार या घायल जानवरों के जख्मों पर मरहम लगा चुकी हैं। जिले में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए सोसायटी (एसपीसीए) की वह एकमात्र महिला सदस्य हैं और वर्ष 2021 से निस्वार्थ भाव से सेवाएं दे रही हैं। महिला होने के बावजूद वह लावारिस, घायल और लाचार जानवरों की सहायता के लिए 24 घंटे तत्पर हैं। शहर में कहीं भी कोई बीमार या घायल जानवर नजर आता है तो लोग पहली काॅल शालिनी खजूरिया को ही लगाते हैं। वह तुरंत मरहम-पट्टी लेकर पहुंच जाती हैं।
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35 से अधिक मवेशियों की कर रहीं देखभाल
वर्तमान में शालिनी अपने एसपीसीए केंद्र में 35 से अधिक घायल, बीमार और लावारिस मवेशियों व कुत्तों की देखभाल कर रही हैं। पशु बाड़े में मवेशी तस्करों से छुड़ाए गए पशुओं की देखभाल में भी वह पुलिस और प्रशासन का सहयोग करती हैं। सड़क हादसों में घायल होने वाले तथा लावारिस मवेशियों की सहायता के लिए भी सदैव तैयार रहती हैं। शालिनी का अगला लक्ष्य उधमपुर में एक सुसज्जित और सुविधाजनक एसपीसीए केंद्र की स्थापना करना है ताकि अधिक से अधिक पशुओं को बेहतर उपचार और संरक्षण मिल सके।
बचपन से था जानवरों के प्रति लगाव और सेवा भाव
शालिनी का बचपन से ही पशुओं से प्यार रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में एसपीसीए से जुड़ने के बाद पशु सेवा उनके जीवन का जुनून बन गई। वह मां भगवती की भक्त हैं। पेशे से ब्यूटीशियन होने के बावजूद अधिकतर समय पशुओं की सेवा में ही व्यतीत करती हैं। उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानती हैं। इस नेक कार्य में जोरावर सिंह भी उनका साथ दे रहे हैं। समाज के लिए उन्होंने संदेश दिया कि पालतू पशुओं के प्रति दया भाव बनाए रखें। उन्हें बूढ़ा, बीमार या घायल होने पर घर से न निकालें। लावारिस मवेशियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने का प्रयास करें।