इंतजार, आंसू और मातम: हंसी-खुशी गए थे नहाने, मां-बाप की आंखों के सामने टूटी उम्मीद, नदी से निकले लाडलों के शव
नगरोटा में तवी नदी में नहाने गए तीन किशोरों के डूबने से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जिनमें से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं जबकि एक की तलाश जारी है। पूरी रात उम्मीद में बिताने के बाद सुबह नदी किनारे परिजनों की आशा मातम में बदल गई।
विस्तार
नगरोटा स्थित सैनिक स्कूल के पास तवी नदी में डूबे तीन दोस्तों में से दो के शव सोमवार को बचाव दल ने बरामद कर लिए। दोनों के शव तवी नदी के जलस्तर से 16 फीट नीचे मिट्टी के बीच फंसे हुए थे। लापता तीसरे किशोर की तलाश जारी है। रविवार को पांच किशोर नदी में नहाने के लिए गए थे। पुलिस अफसरों के मुताबिक जगती काॅलोनी में रहने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के बाविश कौल (15), सोनम दत्त (16) और आदित्य पंडित (15) नगरोटा सैनिक स्कूल के पास तेज धारा में बह गए थे। बाविश और आदित्य के शव बरामद कर लिए हैं। रविवार शाम हादसे का पता चलते ही पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमों ने बचाव अभियान शुरू किया था। रात में टॉर्च की रोशनी में भी तलाशी अभियान चलाया गयाा लेकिन कुछ पता न चलने पर रात करीब एक बजे अभियान रोकना पड़ा था। सोमवार सुबह सात बजे फिर से तलाशी अभियान शुरू हुआ।
दस मिनट के अंतराल पर मिले दोनों दोस्तों के शव
दोपहर दो बजे तक किशोरों का कुछ पता नहीं चलने पर तलहटी में उनकी तलाश शुरू हुई। करीब ढाई बजे बाविश का शव मिला और इसके करीब दस मिनट बाद ही पास में आदित्य का शव मिला।
आज होगा दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार
बरामद हुए दोनों किशोरों के शव तवी नदी में 16 फीट गहराई में गाद में धंसे थे। शव देखते ही माता-पिता और नाते-रिश्तेदार बिलख उठे। उनकी चीखें सुनकर वहां माैजूद लाेगों केी आंखों में भी आंसू आ गए। जिनके शव मिल गए थे उनके माता-पिता तो घर लौट गए, पर लापता सोनम दत्त के परिवार वाले उम्मीद लिए देर रात तक तवी के किनारे ही रुके थे। वहीं, दोनों किशोरों के शव पोस्टमार्टम के लिए जीएमसी ले जाया गया है। मंगलवार सुबह पुरमंडल में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
डटे रहे...लक्ष्य था, डूबे किशोरों को बचाना
सुबह सात बजे से ही पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें मौके पर डटी हुईं थीं। सभी इस कोशिश में जुटे थे कि किसी तरह से बच्चों को जिंदा बचा लिया जाए। समय बीतने के साथ हालांकि डर बढ़ता जा रहा था, पर टीमों ने तलाशी अभियान तेज कर दिए। तीन टीमें लगी थीं। वहां मौजूद लोग भी टीमों के साथ पानी में उतरकर किशोरों को तलाश कर रहे थे।
पैरा मिलिट्री के कमांडो ने संभाला मोर्चा
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ व पुलिस के साथ पैरा मिलिट्री के कमांडो भी मोर्चा संभाले हुए थे। राहत आयुक्त भी ढांढस बंधाते रहे राहत आयुक्त डॉ. अरविंद कारवानी भी सुबह आठ बजे से मौके पर मौजूद रहे। उनके साथ एसपी ब्रजेश समेत पुलिस व राहत-बचाव कार्य की टीमें मौजूद रहीं।
जहां-जहां उम्मीद दिखी वहां-वहां तलाशते रहे
अरे...वहां देखना चाहिए.., वहां पानी बहुत गहरा है, कहीं वहां तो नहीं...., इस तरह की चर्चाओं के बीच जहां-जहां पर उम्मीद नजर आई, टीमें वहां तलाश करती रहीं। हालांकि उनकी अपनी रणनीति भी पहले से तैयार थी, जिस पर वे काम कर रही थीं।
राेते-रोते कटी रात...तड़के नदी तट पर पहुंचे, शव देख टूट गई उम्मीद
नगरोटा में रविवार दोपहर सैनिक स्कूल के पीछे तवी नदी में डूबे तीन किशोरों के परिवारों के लिए सोमवार की सुबह किसी कयामत से कम नहीं थी। लाडलों के सुरक्षित मिलने की आखिरी उम्मीद लिए परिजन सूरज की पहली किरण के साथनदी के तट पर पहुंच गए थे। पूरी रात सिसकियों, रोने और इंतजार में गुजरी।
दोपहर होते-होते यह उम्मीद मातम में बदल गई जब एनडीआरएफ की टीम ने दो किशोरों के बेजान शरीर बरामद किए। रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे पांच किशोर तवी नदी में नहाने गए थे। इनमें से दो सुरक्षित लौट आए लेकिन तीन गहरे पानी में समा गए। घटना के बाद शाम 5 बजे तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। रात को अंधेरा होने के चलते तलाशी रोक दी गई। सोमवार अलसुबह ही पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें माैके पर पहुंच गईं।
इनसे पहले उम्मीदों के साथ अपने बच्चों के मिलने की आस लिए परिजन व रिश्तेदार पहुंच चुके थे। उनकी आंखों का सूखापन बता रहा था कि पूरी रात उनके आंसू बहे हैं। पूरी रात सोये नहीं और उन्होंने रोते-रोते सुबह होने का इंतजार किया होगा। सुबह सात बजे एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाला और किशोरों को खोजने के लिए नदी में उतरे। साढ़े सात घंटे की तलाशी में दोपहर ढाई बजे बाविश का शव बरामद हुआ। कुछ देर बाद आदित्य का भी शव मिल गया।
नवंबर में जनेऊ समारोह की थी तैयारी:
बाविश ने हाल में कक्षा नौ की परीक्षा दी थी। नगरोटा के शांति निकेतन स्कूल में पढ़ता था।
सोनम के मिलने की आस में पथराईं आंखें:
दो शव मिलने के बाद सोनम के परिवार की बेचैनी बढ़ गई है। सोनम का कुछ पता नहीं चला है। पेशे से ड्राइवर उसके पिता सनी दत्त ने बताया कि बेटा हेमा पब्लिक स्कूल में पढ़ता है।
दो भाई हैं। भाई का नाम दिव्यांश है। सोमवार देर रात तक उसकी तलाश होती रही। फिलहाल सभी प्रार्थना कर रहे हैं कि सोनम सुरक्षित हो।
हमेशा पार्क में जाता था, इस बार पता नहीं कैसे नदी तक चला गया
बाविश कौल के पिता मनोहर लाल कौल भीड़ के बीच सूनी आंखों से एकटक नदी को निहार रहे थे। बेटे का शव देख वह एकदम जड़-से हो गए... उन्हें होश नहीं रहा। मनोहर जम्मू-कश्मीर पुलिस में कार्यरत हैं और वर्तमान में श्रीनगर में पोस्टिंग है। भर्राए गले से बस इतना ही कह पाए, हर दिन पार्क में खेलने जाता था... पता नहीं कैसे नदी की तरफ चला गया और लौटा ही नहीं। एसडीआरएफ के जवान जब नदी से शव लेकर बाहर आ रहे थे तो मनोहर ये देख खुद को संभाल नहीं पाए। पास खड़े लोगों ने उन्हें संभाला।
आदित्य का भाई बोला- अब कौन जिद करेगा, पिता बोले-सब खत्म
बाविश का शव मिलने के करीब 10 मिनट बाद ही बचाव व राहत कार्य में लगीं टीमें एक और शव लेकर आईं। नाव जैसे ही किनारे लगी तो परिजन दौड़े। देखा तो ये शव आदित्य पंडित का था। बिलखकर आगे पहुंचा उनका भाई अंकित उसे उठाने-जगाने की कोशिश करने लगा। उसे लग रहा था कि वो जिद करेगा तो भाई उठ जाएगा। रोते-रोते अंकित बोला, अब कौन जिद करेगा भाई। फिर वह एक किनारे जाकर खामोशी से बैठ गया।
आदित्य के पिता शाह जी कुमार प्राइवेट नौकरी करते हैं। पिता ने बताया कि आदित्य दोपहर में खेलने की बात कहकर गया था। देर शाम तक नहीं लौटा तो तलाश शुरू की। इस दौरान पता चला कि दोस्तों के साथ तवी में डूब गया है। पिता ने रोते-रोते कहा... न जाने कितने सपने थे, अब कुछ नहीं रहा, सब खत्म हो गया। जब बेटा ही चला गया तो सपने कैसे? इतना कहते हुए बिलख पड़े।