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Jammu News: किसानों ने कहा, धान का मुआवजा न मिला तो करेगे फसल बीमा का बहिष्कार
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अरनिया। सीमावर्ती क्षेत्रों में धान उत्पादक किसानों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा न मिलने को लेकर भारी आक्रोश फैल गया है। किसान नेता और भाजपा के जम्मू जिला बॉर्डर के किसान मोर्चा के प्रधान रघुवीर सिंह ने बीमा कंपनियों की मनमानी और कृषि विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए चेतावनी दी है कि भविष्य में फसल बीमा नहीं करवाएंगे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से बर्बाद फसल का मुआवजा तत्काल जारी होने की बजाय किसानों को मुआवजे से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही अपनी आजीविका को लेकर परेशान हैं, दूसरी ओर बीमा कंपनी और कृषि विभाग किसानों को सहयोग के बजाय मुआवजे के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे में किसान भविष्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बहिष्कार करने का मन बनाकर बैठे हैं।
किसान देशराज का कहना है कि केसीसी खातों से प्रीमियम समय पर कट जाता है, लेकिन जलभराव या प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट होने पर मुआवजा नहीं मिलना सरासर गलत है। बीमा कंपनी मुआवजे के समय नियम कायदों का पाठ पढ़ाना शुरू कर देती है। कृषि विभाग का रुख बीमा कंपनी के प्रति नरम है। इससे किसानों का नुकसान हो रहा है।
सीमावर्ती गांव चंगिया के किसान बचन लाल ने कहा कि किसान इतना पढ़ा लिखा नहीं है कि नियम कायदों से परिचित हो परंतु फसल का नुकसान जिस तरह से भी हो मुआवजा मिलना चाहिए।
किसान बलबीर सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाएं किसानों के हितों को मद्देनजर रखते हुए बनाई जाती हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानो की रीढ़ की हड्डी है, परंतु फसल का नुकसान होने पर मुआवजा न मिलना किसानों के साथ धोखा है। प्रशासन और कृषि विभाग को मिलकर बीमा कंपनी से मुआवजा जारी करवाना चाहिए।
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किसान देशराज का कहना है कि केसीसी खातों से प्रीमियम समय पर कट जाता है, लेकिन जलभराव या प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट होने पर मुआवजा नहीं मिलना सरासर गलत है। बीमा कंपनी मुआवजे के समय नियम कायदों का पाठ पढ़ाना शुरू कर देती है। कृषि विभाग का रुख बीमा कंपनी के प्रति नरम है। इससे किसानों का नुकसान हो रहा है।
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सीमावर्ती गांव चंगिया के किसान बचन लाल ने कहा कि किसान इतना पढ़ा लिखा नहीं है कि नियम कायदों से परिचित हो परंतु फसल का नुकसान जिस तरह से भी हो मुआवजा मिलना चाहिए।
किसान बलबीर सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाएं किसानों के हितों को मद्देनजर रखते हुए बनाई जाती हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानो की रीढ़ की हड्डी है, परंतु फसल का नुकसान होने पर मुआवजा न मिलना किसानों के साथ धोखा है। प्रशासन और कृषि विभाग को मिलकर बीमा कंपनी से मुआवजा जारी करवाना चाहिए।