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एलजी मनोज सिन्हा बोले: नवाचार सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित न रहे, किसान और जलवायु पर फोकस

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 29 Apr 2026 11:51 AM IST
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सार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि नवाचार केवल चर्चाओं तक सीमित न रहकर जमीन पर लागू होना चाहिए।

LG Manoj Sinha says Innovation is not limited to just discussions
एलजी मनोज सिन्हा। - फोटो : samvad
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विस्तार

एलजी मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन से खतरों से निपटने के साथ ही हमें किसान-आधारित शोध साझेदारी पर ध्यान देना होगा। नवाचार सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित न रहे।  स्कॉस्ट जम्मू में आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में उन्होंने ग्रीन क्रेडिट, पारदर्शी मूल्यांकन और जलवायु-संवेदनशील नीतियों का एकीकरण पर भी जोर दिया। एलजी ने प्रदर्शनी को भी देखा और किसानों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा, किसान केवल खाद्य उत्पादनकर्ता नहीं हैं बल्कि वे परंपरा, संस्कृति और भविष्य की खाद्य सुरक्षा के संरक्षक हैं, इसलिए हर खेत को एक राष्ट्रीय संपत्ति मानकर उसकी सुरक्षा और देखभाल की जानी चाहिए।

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इस अवसर पर कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी, भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र, इंडियन इकोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. एके धवन, निदेशक अनुसंधान डॉ. एसके गुप्ता,  आयोजन सचिव डॉ. सैयद शेराज महदी मौजूद थे।
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जम्मू-कश्मीर में तत्काल नवाचार की जरूरत : सतीश शर्मा
कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने जलवायु-लचीले कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए तत्काल और विज्ञान-आधारित नवाचार अपनाने पर जोर दिया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, परिवहन, युवा सेवा और खेल, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और चरम जलवायु घटनाएं पहले से ही कृषि, बागवानी और पशुपालन पर गंभीर असर डाल रही है। जम्मू-कश्मीर जलवायु परिवर्तन की जीवंत प्रयोगशाला है। इसकी चुनौतियों का समाधान तत्काल, स्थानीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही संभव है।

उन्होंने विशेष रूप से गुज्जर और बकरवाल समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि चराई के पारंपरिक पैटर्न में बदलाव के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर एकीकृत समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयास और वैज्ञानिक नवाचार ही भविष्य का रास्ता तय करेंगे।

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