1947 का हमला: कबायली हमले की बरसी पर पाकिस्तान को दिखाया आईना, पीओजेके में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
22 अक्तूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर हुए कबायली हमले की बरसी पर पीओजेके में यूकेपीएनपी और जेकेएनएपी के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर पर 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना की ओर से कबायलियों की आड़ में किए गए हमले की बरसी पर वीरवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में विरोध जताया गया। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) और जम्मू-कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी (जेकेएनएपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के विरोध में नारे लगाए।
22 अक्तूबर 1947 को उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्र से आए कबायली लड़ाकों ने जम्मू-कश्मीर रियासत पर हमला किया। हमलावर मुजफ्फराबाद से आगे बढ़ते हुए बारामुला तक पहुंचे। इस दौरान हिंसा, लूटपाट और नागरिकों के मारे जाने की घटनाएं हुईं।
बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच महाराजा हरि सिंह ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। 26 अक्तूबर को भारत के साथ विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए और 27 अक्तूबर को भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची। मिशन जम्मू के जोरवार सिंह जम्वाल ने बताया कि पीओजेके में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष केवल इस ऐतिहासिक घटना तक सीमित नहीं है। वहां बिजली की कीमतों, रसोई गैस की व डीजल-पेट्रोल की किल्लत, नागरिक सुविधाओं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार जैसे मुद्दों पर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़ा आंदोलन इन्हीं मांगों को लेकर हो रहा है।
इतिहास का सच और वर्तमान की बगावत
स्थानीय नागरिक अब खुलकर इस बात को स्वीकार रहे हैं कि 22 अक्तूबर 1947 को जो कबायली हमला हुआ था, वह कोई आजादी की लड़ाई नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना समर्थित बर्बर आक्रमण था। पाकिस्तान की इस भूमिका को लोग अब अपने पिछड़ेपन, बिजली-पानी के संकट और बुनियादी अधिकारों के हनन से जोड़कर देख रहे हैं।
अवामी एक्शन कमेटी का बढ़ता प्रभाव
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के बैनर तले आम लोग, छात्र और व्यापारी एकजुट हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान उनके प्राकृतिक संसाधनों (नीलम और झेलम नदियों से बनने वाली पनबिजली) का दोहन कर रहा है। स्थानीय जनता को अत्यधिक महंगी बिजली और आटे के लिए भी तरसाया जा रहा है।