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जम्मू-कश्मीर: जमानत के नाम पर धंधा! पैसों के लिए अपराधियों के मददगार बने फर्जी जमानतदार, अदालत सख्त
Fri, 16 Oct 2026 10:26 AM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Nikita Gupta
Updated Fri, 16 Oct 2026 10:26 AM IST
सार
जम्मू की अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए आरोपियों को जमानत दिलाने वाले लोगों के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। एनडीपीएस मामले में आरोपियों को पेश करने में विफल रहे जमानतदार की नरमी की अपील खारिज कर कोर्ट ने उसे एक लाख रुपये जमा करने के निर्देश दिए।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अदालत परिसर में फर्जी जमानतदारों के बढ़ते चलन पर एनडीपीएस मामलों के विशेष न्यायाधीश परवेज इकबाल ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज पेश करके आरोपियों, खासकर बाहरी राज्यों के लोगों को जमानत दिलाने के नाम पर पैसे कमा रहे हैं। आरोपियों को न्याय प्रक्रिया से बचने में मदद कर रहे हैं।
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कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी एक एनडीपीएस मामले की सुनवाई के दौरान की। मामला पंजाब के दो आरोपियों, जिन्हें 2020 में जमानत मिली थी, उससे जुड़ा है। उन्होंने नियमित रूप से कोर्ट पेशी बंद कर दी थी। जमानतदार ने आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से न जानने की बात कहते हुए आरोपियों को पेश करने में असमर्थता जताई और नरमी की अपील की।जमानतदार के आचरण पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने जब्त जमानत बॉन्ड के एवज में उसे एक लाख रुपये जमा करने के निर्देश दिए। नरमी बरतने की अपील खारिज कर कहा कि जमानतदार के आचरण की वजह से ही आरोपी को मुकदमे से बचने में मदद मिली।
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नरमी बरती तो ऐसे चलन को बढ़ावा मिलेगा।n फर्जी पहचानपत्र और जमीन के जाली दस्तावेज रखते हैं साथ : अदालत ने गौर किया कि कुछ लोग फर्जी पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े जाली दस्तावेज साथ रखते हैं, ताकि वे खुद को जमानत देने के योग्य साबित कर सकें। ये ऐसे आरोपियों की तलाश करते हैं, जिन्हें स्थानीय जमानतदारों की जरूरत होती है। वे उनसे पैसों का सौदा करते हैं और अदालत के सामने दस्तावेज पेश करके उन्हें जमानत पर रिहा करवा देते हैं।
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