{"_id":"68d5967b6decf67a4e0210ff","slug":"srinagar-mla-sajjad-lone-statement-laddakh-voilence-srinagar-news-c-10-jam1003-723308-2025-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम से कम कश्मीर के लिए खड़े होने का दिखावा तो करें नेकां और पीडीपी : लोन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम से कम कश्मीर के लिए खड़े होने का दिखावा तो करें नेकां और पीडीपी : लोन
विज्ञापन
सार
श्रीनगर में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद लोन ने लद्दाख संकट पर जानमाल के नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने लद्दाख के अलग होने पर खुशी व्यक्त की और नेकां-पीडीपी को कश्मीर के लिए आवाज उठाने की नसीहत दी।
विज्ञापन
विस्तार
- लद्दाख संकट पर बोले पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने जानमाल के नुकसान पर दुख जताया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने वीरवार को लद्दाख में जानमाल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। साथ ही राज्य के दर्जे की मांग पर नेकां और पीडीपी को घेरा। उन्होंने कहा कि मांग के लिए खड़े नहीं हो सकते तो कम से कम कश्मीर के लिए खड़े होने का दिखावा तो करें।
लोन ने कहा कि कश्मीरी लोगों को 70 सालों तक लद्दाख के लोगों द्वारा अपमानित और बदनाम किया गया। मुझे सबसे ज़्यादा खुशी तब हुई जब उन्हें हमसे अलग किया गया और उनके लिए एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। मुझे उनसे ज़्यादा हमारे लिए खुशी हुई।
वे आरक्षण के नाम पर हमारी नौकरियां छीन लेते थे। वे हमें अपमानित करते थे। वे हमारे ट्रांसपोर्टरों या व्यापारियों को लद्दाख में काम नहीं करने देते थे। उनके पास हिल काउंसिल थी। जम्मू-कश्मीर के रूप में हमारा उन पर कोई नियंत्रण नहीं था। हम आरक्षण के नाम पर उन्हें नौकरियां सौंप देते थे। अनुपातहीन धन, छोटी विधानसभा सीटें और उससे भी छोटी संसदीय सीट। एक छोटी सी आबादी के लिए 4 विधानसभा सीटें और एक संसदीय सीट, पूरे क्षेत्र के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा।
फिर भी वे हमेशा रोने-धोने वाले बच्चे ही रहे। हर चीज़ के लिए कश्मीरियों को दोषी ठहराते रहे। और सबसे बढ़कर, वे हमेशा दिल्ली की लाठी बने रहे जिससे हम पर हमला किया जाता था। पिछले सात दशकों में, उन्होंने दिल्ली के साथ मिलकर कश्मीरियों के खिलाफ एक भ्रम पैदा किया। उन्होंने कश्मीरियों को दुष्ट बताया।
उनका हमारा हिस्सा होना बहुत ही महंगा और लूट-खसोट वाला था। हमने उन्हें अपने साथ क्यों रखा, बदनामी, नौकरियों का नुकसान और भारी सब्सिडी वाले लद्दाख से हमें क्या मिला। वे जिस दौर से गुज़र रहे हैं, वह है खरीदार का पछतावा, खरीदारी करने के बाद होने वाला पछतावा, जिसे आमतौर पर अनावश्यक या फिजूलखर्ची माना जाता है। यह कर्म है। और जम्मू के लोगों के लिए एक कर्म का शगुन। मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए। कश्मीर के बिना आपका भी यही हश्र होगा। आपका सारा लाड़-प्यार कश्मीर की वजह से है।
कश्मीर में दो राजाओं की पार्टियां और उनके नेता जो बिना सिरपैर की बयानबाज़ी कर रहे हैं। एक बार कश्मीर के लोगों के लिए खड़े हो जाइए। कम से कम दिखावा तो कीजिए, भले ही आपका इरादा ऐसा न हो।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने वीरवार को लद्दाख में जानमाल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। साथ ही राज्य के दर्जे की मांग पर नेकां और पीडीपी को घेरा। उन्होंने कहा कि मांग के लिए खड़े नहीं हो सकते तो कम से कम कश्मीर के लिए खड़े होने का दिखावा तो करें।
लोन ने कहा कि कश्मीरी लोगों को 70 सालों तक लद्दाख के लोगों द्वारा अपमानित और बदनाम किया गया। मुझे सबसे ज़्यादा खुशी तब हुई जब उन्हें हमसे अलग किया गया और उनके लिए एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। मुझे उनसे ज़्यादा हमारे लिए खुशी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
वे आरक्षण के नाम पर हमारी नौकरियां छीन लेते थे। वे हमें अपमानित करते थे। वे हमारे ट्रांसपोर्टरों या व्यापारियों को लद्दाख में काम नहीं करने देते थे। उनके पास हिल काउंसिल थी। जम्मू-कश्मीर के रूप में हमारा उन पर कोई नियंत्रण नहीं था। हम आरक्षण के नाम पर उन्हें नौकरियां सौंप देते थे। अनुपातहीन धन, छोटी विधानसभा सीटें और उससे भी छोटी संसदीय सीट। एक छोटी सी आबादी के लिए 4 विधानसभा सीटें और एक संसदीय सीट, पूरे क्षेत्र के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा।
फिर भी वे हमेशा रोने-धोने वाले बच्चे ही रहे। हर चीज़ के लिए कश्मीरियों को दोषी ठहराते रहे। और सबसे बढ़कर, वे हमेशा दिल्ली की लाठी बने रहे जिससे हम पर हमला किया जाता था। पिछले सात दशकों में, उन्होंने दिल्ली के साथ मिलकर कश्मीरियों के खिलाफ एक भ्रम पैदा किया। उन्होंने कश्मीरियों को दुष्ट बताया।
उनका हमारा हिस्सा होना बहुत ही महंगा और लूट-खसोट वाला था। हमने उन्हें अपने साथ क्यों रखा, बदनामी, नौकरियों का नुकसान और भारी सब्सिडी वाले लद्दाख से हमें क्या मिला। वे जिस दौर से गुज़र रहे हैं, वह है खरीदार का पछतावा, खरीदारी करने के बाद होने वाला पछतावा, जिसे आमतौर पर अनावश्यक या फिजूलखर्ची माना जाता है। यह कर्म है। और जम्मू के लोगों के लिए एक कर्म का शगुन। मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए। कश्मीर के बिना आपका भी यही हश्र होगा। आपका सारा लाड़-प्यार कश्मीर की वजह से है।
कश्मीर में दो राजाओं की पार्टियां और उनके नेता जो बिना सिरपैर की बयानबाज़ी कर रहे हैं। एक बार कश्मीर के लोगों के लिए खड़े हो जाइए। कम से कम दिखावा तो कीजिए, भले ही आपका इरादा ऐसा न हो।
