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तैयारी: जंगल-पहाड़ों में छिपे आतंकियों का काल बनेंगे जवान, जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को मिली विशेष ट्रेनिंग

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 23 Mar 2026 06:01 AM IST
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सार

जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के करीब 350 जवानों को आंध्र प्रदेश में सेना ने स्पेशल कॉम्बैट ट्रेनिंग दी है। अब इन जवानों को आतंकियों के सफाये की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

The soldiers will become the death knell for the terrorists hiding in the forests and mountains.
जम्मू कश्मीर पुलिस - फोटो : एजेंसी
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विस्तार

जम्मू और कश्मीर संभाग के पहाड़ों और घने जंगलों में छिपे आतंकी अब वहीं पर मारे जाएंगे। आतंकियों के सफाये के लिए सुरक्षा ग्रिड को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और घातक बनाया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के करीब 350 जवानों को आंध्र प्रदेश में सेना ने स्पेशल कॉम्बैट ट्रेनिंग दी है। अब इन जवानों को आतंकियों के सफाये की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

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सूत्रों के अनुसार इन जवानों को विशेष प्रशिक्षण 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इनको आतंकियों को उनके ही गढ़ में खत्म करने की करीब 10 माह की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। ऐसा पहली बार है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को जंगल वॉरफेयर, पहाड़ी इलाकों के अनुकूलन और विशेष युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग के लिए आंध्रप्रदेश भेजा गया है। 
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अधिकारी ने बतााय कि एसओजी में जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों की तैनाती रहती है। इन्हें जम्मू-कश्मीर के जंगलों की भूगोल और रास्तों की अच्छी समझ होती है। ऐसे में यह प्रशिक्षण उन्हें आतंकियों के खिलाफ और भी अचूक बनाती है। खतरे और इलाके की चुनौतियों को देखते हुए इन प्रशिक्षित जवानों को दो अलग-अलग विशेष यूनिट में बांटा गया है। 

इसमें एक हाई-एल्टीट्यूड यूनिट है। यह यूनिट मुख्य रूप से ऊंचाई वाले और बर्फ से ढके इलाकों में ऑपरेशन चलाने में माहिर है। दूसरी जंगल और माउंटेन यूनिट। इसे पूरे प्रदेश में फैले घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आतंकियों के छिपने के ठिकानों को नष्ट करने का जिम्मा सौंपा गया है।

एसओजी की आक्रामक रणनीति
आतंकवाद के शुरुआती दो दशकों में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के नाम से मशहूर रही एसओजी ने अहम भूमिका निभाई थी। अब डोडा, किश्तवाड़, उधमपुर, कठुआ, राजोरी और पुंछ के जंगलों में छिपे पाकिस्तानी आतंकियों का सफाया इनका मुख्य लक्ष्य है। हाल ही में किश्तवाड़ के छात्रू में जैश कमांडर सैफुल्लाह सहित चार आतंकियों का मारा जाना इसी आक्रामक रणनीति का हिस्सा है।

सात नई बीएसएफ बटालियन तैनात
जम्मू-कश्मीर में फैले अंदरूनी जंगलों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) को भी पूरी तरह सील कर दिया गया है। गर्मियों में संभावित आतंकी घुसपैठ को रोकने के लिए सात नई बीएसएफ बटालियन को संवेशनशील स्थानों पर तैनात की गई हैं। इससे बॉर्डर पुलिस और विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को भी बड़ी ताकत मिलेगी। 

  • यह अहम फैसला फरवरी में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में लिया गया था। 
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