सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Voice raised in Rajya Sabha on six-year limit for TDS reform, BJP Professional Cell praises Sat Sharma

J&K: टीडीएस सुधार की छह साल की सीमा पर राज्यसभा में उठी आवाज, भाजपा प्रोफेशनल सेल ने सत शर्मा को सराहा

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 11 Feb 2026 11:11 AM IST
विज्ञापन
सार

राज्यसभा सांसद सत शर्मा ने टीडीएस विवरण में सुधार के लिए छह साल की समय सीमा तय करने से करदाताओं को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पुराने मामलों में एकमुश्त राहत या धारा 119 के तहत विशेष अनुमति देने की मांग की, ताकि ईमानदार करदाताओं को नोटिस और विवाद से बचाया जा सके।

Voice raised in Rajya Sabha on six-year limit for TDS reform, BJP Professional Cell praises Sat Sharma
राज्यसभा सांसद सत शर्मा - फोटो : संसद टीवी
विज्ञापन

विस्तार

जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रोफेशनल सेल ने राज्यसभा सांसद सत शर्मा द्वारा टीडीएस विवरण में सुधार की समय सीमा तय किए जाने से पैदा हुई समस्याओं का मुद्दा उच्च सदन में उठाने पर उनकी सराहना की है। सेल के संयोजक सीए दीपक कपाही ने कहा कि सांसद ने देश भर के करदाताओं की वास्तविक परेशानी को मजबूती से रखा है और उम्मीद है कि सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाएगी।

Trending Videos

Voice raised in Rajya Sabha on six-year limit for TDS reform, BJP Professional Cell praises Sat Sharma
सीए दीपक कपाही - फोटो : फाइल फोटो
सत शर्मा ने वित्त अधिनियम 2024 के तहत आयकर अधिनियम 1961 की धारा 200(3) में किए गए संशोधन का जिक्र किया। एक अप्रैल 2025 से लागू इस प्रावधान के अनुसार अब टीडीएस विवरण में सुधार के लिए छह साल की समय सीमा तय कर दी गई है। यह अवधि उस साल के अंत से मानी जाएगी, जिसमें मूल विवरण जमा किया गया था। पहले ऐसी कोई तय सीमा नहीं थी और गलत पैन, चालान मिलान या अन्य लिखित त्रुटियों को बाद में भी सुधारा जा सकता था।

नए नियम के कारण वित्त वर्ष 2017-18 और उससे पहले के मामलों में 31 मार्च 2025 के बाद सुधार की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है। इससे बड़ी संख्या में करदाताओं और कर काटने वाली संस्थाओं के सामने व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई है।

सेल के अनुसार जिन लोगों का कर स्रोत पर काटा गया, उन्हें अपने कर खाते में पूरा श्रेय नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते कई मामलों में अधिक कर की मांग निकल रही है या कर वापसी अटक रही है। दूसरी ओर जिन संस्थाओं ने नियमानुसार कर काटकर जमा किया, उन्हें कम कटौती, ब्याज और जुर्माने की नोटिस मिल रही है। कुछ मामलों में कानूनी विवाद और अभियोजन का खतरा भी बन रहा है, जबकि कर राशि पहले ही सरकार के खाते में जमा की जा चुकी है।

सत शर्मा ने कहा कि यह स्थिति ईमानदार करदाताओं के साथ अन्याय है और इससे कारोबार में आसानी तथा करदाता अनुकूल व्यवस्था की भावना प्रभावित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन पुराने मामलों में वास्तविक त्रुटि है, उनके लिए एक बार की राहत दी जाए या विशेष अनुमति की खिड़की खोली जाए, ताकि लोग अपने विवरण सुधार सकें। उन्होंने आयकर अधिनियम की धारा 119 के तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को दिए गए अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक कठिनाई के मामलों में राहत दी जा सकती है। अतीत में भी ऐसे मामलों में बोर्ड द्वारा परिपत्र जारी कर राहत दी जाती रही है। फिलहाल पुराने मामलों के लिए किसी विशेष राहत की घोषणा नहीं की गई है।

प्रोफेशनल सेल की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सह संयोजक सीए अमित गुप्ता, अधिवक्ता कुलदीप सूदन, डा वीरेंद्र संब्याल, सीए जितेश अरोड़ा, सीए रितेश गुप्ता और सीए सतीश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे। सदस्यों ने कहा कि समय रहते समाधान नहीं निकला तो ईमानदार करदाताओं को बेवजह नोटिस और मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed