झारखंडा: 125 साल पुराना ‘बड़का मंदिर’, एक अर्घे पर विराजमान हैं चार शिवलिंग; जानें इस अनोखे धाम की कहानी
चतरा के रामनगर स्थित करीब 125 वर्ष पुराने श्रीराम मंदिर में एक ही अर्घे पर स्थापित चतुर्मुखी शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। ‘बड़का मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक विरासत को भी संजोए हुए है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
झारखंड की धरती पर कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और परंपरा की अनमोल विरासत को भी संजोए हुए हैं। चतरा शहर के रामनगर स्थित श्रीराम मंदिर भी ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर है। करीब 125 वर्ष पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित चतुर्मुखी शिवलिंग है, जहां एक ही अर्घे पर चार शिवलिंग स्थापित हैं। भगवान श्रीराम के दरबार के साथ भगवान शिव की यह अनूठी आराधना मंदिर को खास पहचान देती है।
चतरा-गया मुख्य मार्ग पर पुराने नगर भवन के समीप स्थित यह मंदिर अव्वल मोहल्ला और गुदरी बाजार के सीमांत क्षेत्र में है। स्थानीय लोग इसे प्रेम से ‘बड़का मंदिर’ कहते हैं। मान्यता है कि करीब सवा सौ वर्ष पहले साहूकार परिवार के डोमा साव ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की पुरानी स्थापत्य शैली और साज-सज्जा आज भी इसके गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करती है।
दूर-दराज से भी श्रद्धालु आते हैं
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भगवान हनुमान का राम दरबार सजा है। इसी परिसर में भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। एक ही अर्घे पर स्थापित चार मुख वाले शिवलिंग को देखने और पूजा करने के लिए दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह शिवलिंग भगवान शिव के आदि-अनादि स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
ये भी पढ़ें- Bihar: डिग्री कॉलेज, ITI नामांकन पर बड़ा फैसला; सम्राट चौधरी की बिहार कैबिनेट ने PK के प्लान पर भी किया काम
सावन के महीने में मंदिर में विशेष रौनक
स्थानीय व्यवसायी संतोष कुमार बताते हैं कि मंदिर का निर्माण उनके पूर्वज डोमा साव ने कराया था। पीढ़ियों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।
सावन के महीने में मंदिर में विशेष रौनक रहती है। चतरा शहर के साथ आसपास के गांवों और कस्बों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में प्राचीन कूप और विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और चतुर्मुखी शिवलिंग की अनूठी विशेषता के कारण रामनगर का यह श्रीराम मंदिर आज भी चतरा की पहचान और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।