{"_id":"6a72a78c60821c01e0095ae5","slug":"baba-dham-to-basukinath-why-kanwar-yatra-is-complete-only-after-visiting-both-temples-2026-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baba Dham: बाबा धाम के बाद श्रद्धालु क्यों जाते हैं बासुकीनाथ मंदिर? जानिए कब पूरी मानी जाती है कांवड़ यात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baba Dham: बाबा धाम के बाद श्रद्धालु क्यों जाते हैं बासुकीनाथ मंदिर? जानिए कब पूरी मानी जाती है कांवड़ यात्रा
Wed, 05 Aug 2026 09:05 AM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवघर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवघर
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 09:05 AM IST
सार
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन के बाद दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में जलाभिषेक करने पर ही कांवड़ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। समुद्र मंथन से जुड़े इस पौराणिक धाम को 'फौजदारी बाबा' के नाम से भी जाना जाता है, जहां हर सावन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
विज्ञापन
बासुकीनाथ मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन के बाद अधिकांश शिवभक्त अपनी यात्रा यहीं समाप्त नहीं करते। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब तक दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं किया जाता, तब तक कांवड़ यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। यही वजह है कि हर साल हजारों कांवरिये देवघर से बासुकीनाथ की ओर प्रस्थान करते हैं।
देवघर से बासुकीनाथ की ओर बढ़ते श्रद्धालु
सावन में बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद बड़ी संख्या में कांवरिये बासुकीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। अधिकांश श्रद्धालु वाहन से यात्रा करते हैं, जबकि कई शिवभक्त पैदल और दंडवत यात्रा कर भी बाबा बासुकीनाथ के दरबार पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में जलाभिषेक करने से ही उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण होती है।
समुद्र मंथन से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
बासुकीनाथ धाम का संबंध पौराणिक समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को ही मंथन की रस्सी बनाया गया था। इसी कारण इस धाम का नाम बासुकीनाथ पड़ा और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत बढ़ गया। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता आज भी अटूट है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 105 किमी कांवड़ पथ पर स्वास्थ्य से सुरक्षा तक बेहतरीन इंतजाम, लेकिन जेब ढीली कर रहे निजी दुकानदार?
'फौजदारी बाबा' के नाम से भी प्रसिद्ध
बासुकीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित विक्की बाबा ने बताया कि भगवान शिव के इस स्वरूप को 'फौजदारी बाबा' भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने और अर्जी लगाने पर जीवन के विवाद, मुकदमे और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसी कारण कई लोग इन्हें श्रद्धापूर्वक 'सुप्रीम कोर्ट बाबा' भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, दारुका नामक राक्षसनी के अत्याचार से लोगों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने यहां प्रकट होकर भक्तों का उद्धार किया था।
बाबा का आदेश मानकर पूरी करते हैं यात्रा
श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ जाना उनकी परंपरा और आस्था का हिस्सा है। मान्यता है कि देवघर से बासुकीनाथ तक की यात्रा करने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सावन के पूरे महीने दोनों धामों में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ता है और 'बोल बम' तथा 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय बना रहता है।
विज्ञापन
देवघर से बासुकीनाथ की ओर बढ़ते श्रद्धालु
सावन में बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद बड़ी संख्या में कांवरिये बासुकीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। अधिकांश श्रद्धालु वाहन से यात्रा करते हैं, जबकि कई शिवभक्त पैदल और दंडवत यात्रा कर भी बाबा बासुकीनाथ के दरबार पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में जलाभिषेक करने से ही उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण होती है।
विज्ञापन
समुद्र मंथन से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
बासुकीनाथ धाम का संबंध पौराणिक समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को ही मंथन की रस्सी बनाया गया था। इसी कारण इस धाम का नाम बासुकीनाथ पड़ा और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत बढ़ गया। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता आज भी अटूट है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 105 किमी कांवड़ पथ पर स्वास्थ्य से सुरक्षा तक बेहतरीन इंतजाम, लेकिन जेब ढीली कर रहे निजी दुकानदार?
'फौजदारी बाबा' के नाम से भी प्रसिद्ध
बासुकीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित विक्की बाबा ने बताया कि भगवान शिव के इस स्वरूप को 'फौजदारी बाबा' भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने और अर्जी लगाने पर जीवन के विवाद, मुकदमे और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसी कारण कई लोग इन्हें श्रद्धापूर्वक 'सुप्रीम कोर्ट बाबा' भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, दारुका नामक राक्षसनी के अत्याचार से लोगों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने यहां प्रकट होकर भक्तों का उद्धार किया था।
बाबा का आदेश मानकर पूरी करते हैं यात्रा
श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ जाना उनकी परंपरा और आस्था का हिस्सा है। मान्यता है कि देवघर से बासुकीनाथ तक की यात्रा करने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सावन के पूरे महीने दोनों धामों में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ता है और 'बोल बम' तथा 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय बना रहता है।