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Sawan 2026: क्या है 'पटमौर'? इस शिव मंदिर में चढ़ाते ही दूर होती हैं शादी की बाधाएं, जानें पौराणिक मान्यता

Wed, 05 Aug 2026 11:39 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Wed, 05 Aug 2026 11:39 AM IST
सार

झारखंड के चतरा जिले स्थित मोरशेरवा बाबा धाम में जलाभिषेक से पहले 'पटमौर' चढ़ाने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। सावन में यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह धाम धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का भी अनूठा उदाहरण है।

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Sawan 2026 What Is Patmaur The Unique Ritual at This Shiva Temple That Removes Marriage Obstacles
मोरेश्वर बाबा मंदिर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पवित्र सावन माह में भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। झारखंड के चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड स्थित नावाडीह पंचायत में अवस्थित मोरशेरवा बाबा धाम अपनी अनूठी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने से पहले 'पटमौर' चढ़ाने की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है।

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स्थानीय मान्यता है कि जिन युवक-युवतियों के विवाह में बाधाएं आती हैं, वे यहां पटमौर अर्पित कर बाबा से प्रार्थना करते हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि सावन के महीने में यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िये पहुंचते हैं।
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प्राकृतिक वादियों के बीच आस्था का केंद्र
प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित मोरशेरवा पहाड़ी शिव और शक्ति, दोनों की आराधना का प्रमुख केंद्र है। पहाड़ी पर भगवान शिव के मंदिर के साथ मां अष्टभुजी दुर्गा का भव्य मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु प्राकृतिक वातावरण में आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
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ग्रामीणों के श्रमदान से हुआ विकास
इस धार्मिक स्थल की सबसे खास बात यह है कि इसका विकास स्थानीय ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से किया है। पहाड़ी तक पहुंचने के लिए रास्ते, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था ग्रामीणों ने स्वयं की है। नावाडीह पंचायत के पूर्व मुखिया मेघन दांगी, पूर्व पंचायत समिति सदस्य राजेश दांगी और समाजसेवी रामचंद्र दांगी बताते हैं कि मोरशेरवा पहाड़ी पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। इसके संरक्षण और विकास में ग्रामीण लगातार योगदान दे रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
मोरशेरवा पहाड़ी विकास समिति पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष प्राथमिकता देती है। समिति की मासिक बैठकों में जंगल और पेड़-पौधों की सुरक्षा को लेकर निर्णय लिए जाते हैं। पहाड़ी के आसपास हरे-भरे पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।


ये भी पढ़ें- Baba Dham: बाबा धाम के बाद श्रद्धालु क्यों जाते हैं बासुकीनाथ मंदिर? जानिए कब पूरी मानी जाती है कांवड़ यात्रा

सावन में लगता है दो दिवसीय भव्य मेला
हर वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर यहां दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर कांवड़ यात्रा, अखंड हरिकीर्तन, हवन, महाआरती, भंडारा सहित कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष भी मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और दूर-दराज से व्यापारियों तथा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मोरशेरवा बाबा धाम आज धार्मिक आस्था, जनसहभागिता और प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है।

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