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छिन्नमस्तिका मंदिर सुंदरीकरण: 102 करोड़ के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, जानें कौन-कौन हुए पेश?
Mon, 05 Oct 2026 05:00 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 05 Oct 2026 05:00 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के 102 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण डीपीआर पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। पर्यटन सचिव और रामगढ़ उपायुक्त पेश हुए। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय में प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े अवमानना मामले की अहम सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त को तलब किया था, जिसके आलोक में दोनों अधिकारी अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।
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उच्च न्यायालय ने अधिकारियों से मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण के लिए तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर अब तक हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार को स्पष्ट और विस्तृत जवाब शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 13 अक्तूबर की तारीख निर्धारित की है।
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विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर मांगी जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपस्थित अधिकारियों से पूछा कि मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद उस पर धरातल पर क्या काम हुआ है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अगली सुनवाई से पहले अब तक हुई संपूर्ण प्रगति से अदालत को अवगत कराएं। मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के पुनरुद्धार, भव्यता बढ़ाने और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से करीब 102 करोड़ रुपये का एक बृहद डीपीआर तैयार किया गया है। इस योजना के तहत परिसर का व्यापक सुंदरीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास प्रस्तावित है। अदालत ने इसी 102 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को आधार बनाते हुए सरकार से पूछा है कि इस दिशा में अब तक क्या-क्या प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
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विभागीय स्तर पर चल रही स्वीकृति प्रक्रिया
अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए पर्यटन सचिव ने बताया कि रजरप्पा मंदिर परिसर के पुनरुद्धार के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव का बजट काफी अधिक है। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया निरंतर चल रही है। प्रस्तावित राशि की अधिकता के कारण संबंधित फाइल को अंतिम स्वीकृति के लिए विभागीय मंत्री के पास भेजा गया है। मंत्री स्तर से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिलने के पश्चात ही आगे के विकास कार्यों को गति दी जा सकेगी। अधिकारियों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट प्रदान कर दी। इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में अनिवार्य रूप से जुड़ेंगे।
अवमानना याचिका और दुकानदारों का पक्ष
यह पूरा मामला प्रार्थी संजीव कुमार सिंह द्वारा दाखिल की गई अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। प्रार्थी ने जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों का पूर्ण अनुपालन कराने की मांग अदालत से की है। प्रार्थी का कहना है कि मंदिर परिसर के समग्र विकास, सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन-पूजन के लिए तय की गई सुविधाओं को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने प्रभावी ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया। दूसरी तरफ, मंदिर परिसर में वर्षों से मौजूद विस्थापित दुकानदारों की ओर से अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता तथा अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की। दुकानदारों के पुनर्वास और रोजी-रोटी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। आगामी 13 अक्तूबर की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जहां सरकार द्वारा दाखिल होने वाले शपथ पत्र से परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।