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खुली जेलों पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त: 3 नवंबर तक सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट; पांच को होगी फिर सुनवाई

Thu, 24 Sep 2026 06:47 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 24 Sep 2026 06:47 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने खुली जेलों की सुविधाओं और विस्तार को लेकर राज्य सरकार से 3 नवंबर तक स्थिति रिपोर्ट मांगी है। चार केंद्रीय कारागारों में खुली बैरक को मंजूरी मिल चुकी है। हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई है।

 

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Jharkhand High Court gets tough on open prisons Seeks detailed report from the government by November 3
झारखंड उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य की खुली जेलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और उनके विस्तार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को 3 नवंबर तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तारीख तय की है। अदालत खुली जेलों की व्यवस्था में सुधार और विस्तार को लेकर मामले की लगातार निगरानी कर रही है।

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चार केंद्रीय कारागारों में खुली बैरक की मंजूरी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य के चार केंद्रीय कारागारों में खुली बैरक बनाने की मंजूरी मंत्रिमंडल से मिल चुकी है। सरकार ने यह भी बताया कि खुली जेलों के संचालन और उनके विस्तार की प्रगति को लेकर त्रैमासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसकी पहली रिपोर्ट 3 नवंबर तक उच्च न्यायालय में दाखिल की जाएगी। राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि खुली जेल व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है और इस दिशा में जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।
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हजारीबाग में 32 एकड़ भूमि चिह्नित
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि खुली जेलों के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। इसके अलावा महिला बंदियों के लिए अलग और विशेष खुली जेल विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया संज्ञान
झारखंड उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को खुली जेलों में बंदियों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और ऐसी व्यवस्था के विस्तार पर जोर दिया था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर तक दाखिल होने वाली स्थिति रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे समीक्षा की जाएगी। 5 नवंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत सरकार की ओर से उठाए गए ठोस कदमों, खुली जेलों के विस्तार की प्रगति और बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा करेगी।

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