फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Karam is a festival celebrating nature, the bond between siblings, and community unity; preparations are in

सजने लगे अखड़े: प्रकृति, प्रेम और परंपरा का पर्व करम, झारखंड में अंतिम चरण में तैयारियां; जानें क्यों है खास?

Sun, 20 Sep 2026 10:06 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sun, 20 Sep 2026 10:06 PM IST
सार

झारखंड में प्रकृति, भाई-बहन के प्रेम और सामुदायिक एकता का प्रतीक करम पर्व मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में अखड़ों की साफ-सफाई, करम डाली की व्यवस्था और पारंपरिक गीत-संगीत व नृत्य की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

विज्ञापन
Karam is a festival celebrating nature, the bond between siblings, and community unity; preparations are in
करमा पर्व की पूर्व संध्या पर नृत्य करती महिलाएं

विस्तार

प्रकृति, हरियाली, भाई-बहन के प्रेम और सामुदायिक एकता का प्रतीक करम पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और देश के अन्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। हालांकि, झारखंड में करम पर्व की सांस्कृतिक पहचान और व्यापकता विशेष रूप से मजबूत है। राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में अखड़ों की साफ-सफाई, करम डाली की व्यवस्था, पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

विज्ञापन

खूंटी विधानसभा क्षेत्र के झामुमो विधायक राम सूर्या मुंडा ने कहा कि करम पर्व पूरी तरह प्रकृति से जुड़ा पर्व है। करम डाली को अखड़े में स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। महिलाएं और युवतियां व्रत रखती हैं और पूजा के बाद रातभर मांदर की थाप पर पारंपरिक गीत और नृत्य का आयोजन होता है। धान रोपनी के बाद आने वाले प्रमुख पर्वों में करम पर्व का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अविवाहित युवक करम पेड़ पर चढ़कर डाली लाता है और महिलाएं उसकी पूजा करती हैं।

विज्ञापन

रांची नगर निगम के वार्ड 34 के पार्षद अजीत कच्छप ने कहा कि शहर और गांव में करम पर्व मनाने की परंपरा में कुछ अंतर जरूर है। गांवों में जहां मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य प्रमुख होता है, वहीं शहरों में डीजे का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों जगहों पर पर्व का उत्साह देखने लायक होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- यूपी में मारा गया झारखंड का मोस्ट वांटेड: टीपीसी कमांडर बृजेश गंझू मुठभेड़ में ढेर, दो पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे

राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने कहा कि करम पर्व झारखंड के साथ बिहार समेत कई राज्यों में मनाया जाता है। अब दिल्ली जैसे महानगरों में भी लोग इस पर्व का आयोजन कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में करम पेड़ के पास पूजा और करम डाली को घर या अखड़े में स्थापित करने की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र होती है।

खूंटी के मुरहू प्रखंड उप प्रमुख अरुण साबू ने करम पर्व को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जोड़ते हुए कहा कि बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। वहीं, राजद नेता गौरीशंकर यादव ने इसे प्रकृति को समर्पित लोकपर्व बताते हुए कहा कि करम की तीन डालियों को सम्मानपूर्वक लाकर अखड़े के बीच स्थापित किया जाता है। इसके बाद सामूहिक पूजा और पारंपरिक नृत्य-गीत का आयोजन होता है।

ये भी पढ़ें- बिहार: आधी रात कमरे में लगी आग, जली मिली 60 वर्षीय महिला की लाश; नशेड़ी कलयुगी बेटे पर हत्या का आरोप
 

यूथ कांग्रेस नेता राज उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकांश पर्व प्रकृति और अच्छी फसल की कामना से जुड़े हैं। करम पर्व में भी भाई-बहन के प्रेम के साथ बेहतर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। व्रत रखने के बाद करम डाली की पूजा की जाती है और फल-फूल से पर्व की शुरुआत होती है। गांवों में इसकी पारंपरिक छटा आज भी विशेष रूप से देखने को मिलती है, जबकि रांची जैसे शहरों में भी करम पर्व का स्वरूप लगातार व्यापक हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed