सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Ranchi News ›   Notorious Naxalites Kundan Pahan-Ram Mohan Singh Munda acquitted in 17-year-old case due to lack of evidence

Jharkhand: साक्ष्य के अभाव में अदालत का बड़ा फैसला, 17 साल पुराने मामले में कुख्यात नक्सली कुंदन और राम बरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 13 Jan 2026 10:29 PM IST
विज्ञापन
सार

Ranchi News: रांची सिविल कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 17 साल पुराने मामले में कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन और राम मोहन सिंह मुंडा को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन और जांच में गंभीर खामियां पाई हैं।

Notorious Naxalites Kundan Pahan-Ram Mohan Singh Munda acquitted in 17-year-old case due to lack of evidence
अदालत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

झारखंड के चर्चित नक्सली मामलों में शामिल कुंदन पाहन उर्फ विकास जी और राम मोहन सिंह मुंडा को रांची सिविल कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। 17 साल पुराने मुठभेड़ और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में अदालत ने दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में पूरी तरह असफल रहा।

Trending Videos

 
किन धाराओं में थे आरोपी
अदालत ने कहा कि साक्ष्य के अभाव में आईपीसी, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और यूएपीए समेत लगाई गई सभी धाराओं से दोनों आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है। यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 18/2009 से संबंधित था, जिसमें पुलिस ने गंभीर आरोप लगाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
मुठभेड़ और बरामदगी का दावा
पुलिस के अनुसार 5 फरवरी 2009 की रात गुप्त सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। इस दौरान नक्सलियों के साथ मुठभेड़ और भारी गोलीबारी का दावा किया गया। पुलिस ने हथियार और कारतूस बरामद होने की बात कहकर कुंदन पाहन और राम मोहन सिंह मुंडा को आरोपी बनाया था। दोनों 23 जनवरी 2017 से जेल में बंद थे।
 
अभियोजन की कमजोर कड़ी
लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की गंभीर खामियां सामने आती चली गईं। पूरे मामले में केवल एक ही गवाह अदालत में पेश हुआ, जो स्वयं सूचक और तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई रविकांत प्रसाद थे। न तो कोई स्वतंत्र गवाह सामने आया और न ही अन्य पुलिसकर्मी बयान देने पहुंचे, जबकि वर्षों तक समन और वारंट जारी किए गए।

पढ़ें- पूर्व टीजीएस कर्मी की नृशंस हत्या: नग्न हालत में था शव और लिंग कटा, चेहरा भी कुचला गया; हिरासत में बेटा
 
पहचान और गिरफ्तारी पर सवाल
अदालत के समक्ष यह भी स्वीकार किया गया कि सूचक गवाह ने न तो आरोपियों को घटनास्थल पर देखा था और न ही उनकी गिरफ्तारी की थी। उन्होंने दोनों आरोपियों को पहली बार अदालत में ही देखा, जिससे अभियोजन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
 
पुलिस द्वारा 784 राउंड फायरिंग के दावे को भी जांच में समर्थन नहीं मिला। घटनास्थल से एक भी खोखा बरामद नहीं हुआ। कथित हथियार और कारतूस न तो मौके पर सील किए गए और न ही अदालत में प्रभावी तरीके से पेश किए जा सके। खून या खून लगी मिट्टी की जब्ती भी प्रमाणित नहीं हो पाई। इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों की कमी को आधार बनाते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले ने न केवल मामले में अभियोजन की विफलता को उजागर किया, बल्कि पुलिस जांच की गंभीर कमियों को भी सामने ला दिया है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed