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Ranchi News: सत्ता में रहकर सरकार पर सवाल, झारखंड कांग्रेस की दोहरी भूमिका पर उठे प्रश्न; जानें कैसे
Wed, 08 Jul 2026 05:06 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 05:06 PM IST
सार
बड़कागांव में आयोजित कांग्रेस के एसआईआर कार्यक्रम के दौरान राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के घरों पर भारी पुलिस बल के साथ की गई कार्रवाई उचित नहीं थी और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
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प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू, प्रदेशाध्यक्ष केशव महतो कमलेश, मंत्री दीपिका पांडेय व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड की राजनीति में कांग्रेस का रवैया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पार्टी एक ओर हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में सत्ता का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर कई अवसरों पर अपनी ही सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाती रही है। इस कारण विपक्ष लगातार कांग्रेस पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि सत्ता में रहते हुए सरकार की सार्वजनिक आलोचना से जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है।
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इस बहस को हाल के घटनाक्रम ने और हवा दी है। कांग्रेस ने बड़कागांव के पूर्व विधायक योगेंद्र साव का सात वर्षों का निलंबन वापस लेते हुए उन्हें फिर से पार्टी में सक्रिय कर दिया है। योगेंद्र साव को उस समय निलंबित किया गया था, जब उन्होंने अपने बड़कागांव स्थित आवास पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर खुलकर विरोध दर्ज कराया था। उनकी बेटी एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने भी प्रेस वार्ता कर सरकार की कार्रवाई का विरोध किया था।
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अब राज्यसभा चुनाव संपन्न होने के बाद योगेंद्र साव की पार्टी में वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इसी बीच बड़कागांव में आयोजित कांग्रेस के एसआईआर कार्यक्रम के दौरान राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के घरों पर भारी पुलिस बल के साथ की गई कार्रवाई उचित नहीं थी और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, योगेंद्र साव, अंबा प्रसाद सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि सरकार में साझेदार रहते हुए कांग्रेस की सार्वजनिक आलोचना उसकी राजनीतिक रणनीति है या आंतरिक असहमति का संकेत। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि वह जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगी, जबकि विपक्ष इसे पार्टी की विरोधाभासी राजनीति का उदाहरण बता रहा है।