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                                                                           हमारा मिलना और हमारा राब्ता होना,
ज़हे-नसीब से मुमकिन हुआ ऐसा होना।

तुम्हारा मालो-ज़र जो है यहीं रह जाएगा,
ख़ुद के बारे में फिर क्या मुग़ालता होना।

मैं एक इन्साँ बन सकूँ इतना काफी है,
बहुत दुश्वार हो...और पढ़ें
4 hours ago
                                                                           गुलों को छूने की ख़ातिर, नफ़ासत शर्त है पहली,
किसी के दिल में बसने की, मोहब्बत शर्त है पहली।

अगर इश्क़ कर लिया है तो, वफ़ा को अपना सजदा कर,
मुहब्बत में मुहब्बत की, इबादत शर्त है पहली।

नज़र में हो हया अपनी...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           
तिरा वुजूद ही सब से बड़ी हक़ीक़त है
तुझे भुला नहीं सकता यही मोहब्बत है

गिला नहीं है तिरी बे-त'अल्लुक़ी से मुझे
मैं जानता हूँ तुझे भूलने की 'आदत है

दिल-ए-हज़ीं को बड़ी देर में हुआ मा'लूम...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
1 day ago
                                                                           हमने भी दिल लगाया था कभी किसी से, फिर क्या, टूट गया!
और ये दिल लगाने का सिलसिला, वही छूट गया !!
फिर सोचा, दिल लगाऊं खुदा में, खुदा बोला, पहले मेरे पास क्यों नहीं आया, वो इस बात पे रूठ गया!!!
और ये दिल लगाने का सिलसिला, फिर वही छू...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           अब वो दिल नहीं रहा वो मोहब्बत नहीं रही,
इज़्तिराब नहीं रहा कोई शिकायत नहीं रही।

मुतमइन हुए तर्क-ए-त'आल्लुक के  ब'आद,
अब दिल खोल के  रोने की आदत नहीं रही।

मुस्तक़िल ख़ामोशी सी पसर गई है ज़ेहन में...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           लुटाए भले ही तुझ पर वो दुनिया भर की दौलतें
तेरी ज़िंदगी को खुशियों से पर सजाएगा कहाँ

तू जिस शख़्स की खातिर बिछड़ रहा है मुझसे
वो मेरी तरह तुझसे मोहब्बत कर पाएगा कहाँ

वो गले लगाएगा जब भी मैं याद आऊँगा तुझको...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           हर मोड़ पर तेरा क्यों ख्याल आता।
आँखें बन्द करते अजीब ख्वाब आता।।

बेमुरव्वत दिल को तुम्हीं से उम्मीद है।
मोहब्बत में जाने कैसा शबाब आता।।

अब प्यार को हमने अपना बना लिया।
बिना कुछ कहे सुने मुझे जवाब आ...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           ऐ गुज़रने वालों, तुम तो मुक़द्दर लिखते थे ना,
सुना है अब पढ़ भी लेते हो मुझे।

फ़िज़ूल ही परवाह कर रहे थे उनकी,
पता चला है उनकी परवाह करने वाले तो हज़ारों हैं।

बड़े ख़ुशमिज़ाज लगते हो,
गिले-शिकवे, नार...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           कोई सच्ची नहीं लगती कोई अच्छी नहीं लगती।।
मोहब्बत नाम की शय है कोई सच्ची नहीं लगती।

लगे हैं दौड़ में सब यां ना जाने गुम कहाँ मंज़िल,,
सभी है भीड़ में अब गली कोई सच्ची नहीं लगती।

कभी तो साथ लगती हैं कभी वो दूर...और पढ़ें
2 days ago
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