तेरी आँखें भी क्या अजीब चीज़ हैं,
बिना बोले हर जज़्बात लिख देती हैं।
कभी समंदर की ठंडी सी लहरें लगती,
कभी जलती हुई रात लिख देती हैं।
मैंने पढ़ना चाहा दिल के अफ़साने,
पर ये आँखें तो पूरी किताब लिख देती हैं।
जब...और पढ़ें
शायरों जैसा लहजा था, कहती थी झूठ सफ़ाई से,
जैसे कोई कंगन पहनाकर काट ले हाथ कलाई से।
पहनी थी तुलसी की माला, पैरों की ज़ंजीर बनी,
बनती होंगी मोहब्बत से तक़दीर लोगों की,
उसकी एक शमशीर बनी।
चाहा मैंने क...और पढ़ें
तेरे होने से ही शामिल मसर्रत ज़िंदगी में है
मोहब्बत बन गई अब तो इबादत ज़िंदगी में है
कभी पलकों पे आँसू भी नहीं आने दिए तुमने
ख़ुदा की इस कदर हम पर इनायत ज़िंदगी में है
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया हमद...और पढ़ें
वो हर बार नाराज़ मिलती है
और मैं हर बार थोड़ा और उसका हो जाता हूँ
उसकी बेरुख़ी मेरे इश्क़ की सबसे नाज़ुक जगह है
जहाँ चोट लगती है और मोहब्बत और पुख़्ता हो जाती है
वो मुझे नहीं चाहती शायद इसी लिए
मेरी चाहत में कोई शिक...और पढ़ें
दिल में छुपी भाषा तो नज़रों से बयाँ हो जाती है
खामोश लब रहते हैं आँखों की जुबाँ हो जाती है
गुंचा-ए-दिल खिल उठता है महबूब जो हो सामने
ऐ दिल मोहब्बत तब नई इक दास्ताँ हो जाती है
चैन-ओ-सुकूँ सा मिलता है महबूब...और पढ़ें
मैंने चाहा है तुम्हें हर दर्द के बाद , माना ये था स्वार्थ मेरा,
परंतु सच्चे अर्थों में चाहा है ,साथ तेरा।
माना कि भयाभह होता है तेरा आना, लोग डरते हैं ,
नजदीकियों से तेरी ,पर मैं करूंगी स्वागत तेरा।
क्योंकि...और पढ़ें
बेपनाह थी मोहब्बत, जिसे हम पा ना सके ।
खुद से ज्यादा जिसे चाहा, उसे अपना बना ना सके ।।
गम ये नही की, वो मुझे मिला नही ।
अफसोस ये है कि,उसे आज भी हम भुला ना सके।।...और पढ़ें
तुम पूछती हो मेरे दिल की ऐसी हालत क्यूॅं है!
मैं ख़ुद से पूछता हूॅं मुझे तुम से मोहब्बत क्यूॅं है!!
- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद...और पढ़ें
मेरी मोहब्बत के ख़िलाफ़ न बोल,
दिल की किताबों का हिसाब न खोल।
तुझको जो कहना है कह ले मगर,
मेरे जज़्बातों का नकाब न खोल।
तूने जो हँसकर तिरस्कार किया,
उस हँसी में ही था ज़हर का घोल।
तूने कहा — “एकतरफ़ा इश्क़ है...और पढ़ें