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                                                                           धोखा खाकर चल पड़ी कश्ती रुकी थी।
तड़प दिल की घुल गई मैं नही थकी थी।।

तकलीफों का फैलाव अँधेरों के पीछे।
उजालों की बेकरारी अभी नही थकी थी।।

सूरज की उगती किरणो से गर्मी लेकर।
परिन्दों की उड़ान कभी नही थ...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           तल्ख़ बियानी सुनकर होती तकलीफ़ बहुत।
भ्रम में मन बहलाकर लगते रहे शरीफ बहुत।।

शख्स मोहब्बत में रहकर सह लेता सब कुछ।
अच्छी लगती उसको भी झूठी तारीफ़ बहुत।।

धूप में जलकर मंज़िल की कामना लिये हुए।
इतरा रह...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           हद से बढ़ती ही गई कभी इबादत मेरी।
जैसे सदियों से रही होगी जरूरत तेरी।।

कभी सोचा था जी लेंगे तेरे बगैर मगर।
अब तो ज़ख्म भी लगते अमानत तेरी।।

तुम्हारे काम आया किस तरह सारी उम्र।
उस के एवज में बहा लाया...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           शिक्षक बनकर ज्ञान को स्कूल में बाँटा।
झूठी उम्मीदों की डोर को हाथो से काटा।।

लोग पूछते है हमसे मोहब्बत के उसूल।
सद्भाव सीखने से करते नफरत को टाटा।।

दिल साफ हो जिनका वो हार क्यों जाते।
उन्होने हर मोड़...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मोहब्बत की कोई भी कहानी उठा लो तुम,
कोई भी कहानी पूर्ण नहीं मिलेगी।
चाहे वह मानव की हो या फिर भगवान की,
हर कहानी अधूरी ही अधूरी मिलेगी।
इश्क़ करके कोई भी खुश नहीं रह पाया,
न आगे कोई रह पाएगा।
रोते हुए मिले है...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मोहब्बत की कोई भी कहानी उठा लो तुम,
कोई भी कहानी पूर्ण नहीं मिलेगी।
चाहे वह मानव की हो या फिर भगवान की,
हर कहानी अधूरी ही अधूरी मिलेगी।
इश्क़ करके कोई भी खुश नहीं रह पाया,
न आगे कोई रह पाएगा।
रोते हुए मिले है...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           नाईपर के कैंपस से,
कैंपस के बागों से,
बागों के फूलों से,
फूलों की खुशबू से मोहब्बत है।

दिन के पहरों से,
कीटों में भँवरों से,
तितलियों से,
जुगनू से मोहब्बत है।

पीले सूरजमुखी फूलों...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           गरीबी ओढ़ के माँ ने कई मौसम बिताए हैं,
मगर बच्चों की ख़ातिर ख़्वाब ऊँचे ही सजाए हैं।

निवाला एक था घर में, मगर हिस्से कई निकले,
माँ ने भूखे पेट रहकर सबके चूल्हे जलाए हैं।

कभी रोटी को तकते थे, कभी छत पर पड़े...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मीर ओ मिर्ज़ा का जो होता है तज़्किरा जब भी,
बज़्म में बाल बिखेरे हुई उर्दू आए।

शाख़ पर फूल न हों, रात भी वीराँ ठहरी,
याद की शाख़ पे चुपके से कई जुगनू आए।

दौर ऐसा है कि सच बोलना मुश्किल ठहरा,
लब हिले...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           अब मोहब्बत से मोहब्बत हो अब ना हो
जैसे ये वहेशत है जन्नत हो अब ना हो

पहले से मालूम नहीं क्या अंजाम कुर्बत का
हर वस्ल पर जैसे हिजरत है रंगत अब ना हो

इस जहाँ में है सबको अमा पाने की हसरत
तुम्हें इन बेच...और पढ़ें
1 hour ago
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