हमारा मिलना और हमारा राब्ता होना,
ज़हे-नसीब से मुमकिन हुआ ऐसा होना।
तुम्हारा मालो-ज़र जो है यहीं रह जाएगा,
ख़ुद के बारे में फिर क्या मुग़ालता होना।
मैं एक इन्साँ बन सकूँ इतना काफी है,
बहुत दुश्वार हो...और पढ़ें
गुलों को छूने की ख़ातिर, नफ़ासत शर्त है पहली,
किसी के दिल में बसने की, मोहब्बत शर्त है पहली।
अगर इश्क़ कर लिया है तो, वफ़ा को अपना सजदा कर,
मुहब्बत में मुहब्बत की, इबादत शर्त है पहली।
नज़र में हो हया अपनी...और पढ़ें
तिरा वुजूद ही सब से बड़ी हक़ीक़त है
तुझे भुला नहीं सकता यही मोहब्बत है
गिला नहीं है तिरी बे-त'अल्लुक़ी से मुझे
मैं जानता हूँ तुझे भूलने की 'आदत है
दिल-ए-हज़ीं को बड़ी देर में हुआ मा'लूम...और पढ़ें
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
हमने भी दिल लगाया था कभी किसी से, फिर क्या, टूट गया!
और ये दिल लगाने का सिलसिला, वही छूट गया !!
फिर सोचा, दिल लगाऊं खुदा में, खुदा बोला, पहले मेरे पास क्यों नहीं आया, वो इस बात पे रूठ गया!!!
और ये दिल लगाने का सिलसिला, फिर वही छू...और पढ़ें
अब वो दिल नहीं रहा वो मोहब्बत नहीं रही,
इज़्तिराब नहीं रहा कोई शिकायत नहीं रही।
मुतमइन हुए तर्क-ए-त'आल्लुक के ब'आद,
अब दिल खोल के रोने की आदत नहीं रही।
मुस्तक़िल ख़ामोशी सी पसर गई है ज़ेहन में...और पढ़ें
लुटाए भले ही तुझ पर वो दुनिया भर की दौलतें
तेरी ज़िंदगी को खुशियों से पर सजाएगा कहाँ
तू जिस शख़्स की खातिर बिछड़ रहा है मुझसे
वो मेरी तरह तुझसे मोहब्बत कर पाएगा कहाँ
वो गले लगाएगा जब भी मैं याद आऊँगा तुझको...और पढ़ें
हर मोड़ पर तेरा क्यों ख्याल आता।
आँखें बन्द करते अजीब ख्वाब आता।।
बेमुरव्वत दिल को तुम्हीं से उम्मीद है।
मोहब्बत में जाने कैसा शबाब आता।।
अब प्यार को हमने अपना बना लिया।
बिना कुछ कहे सुने मुझे जवाब आ...और पढ़ें
ऐ गुज़रने वालों, तुम तो मुक़द्दर लिखते थे ना,
सुना है अब पढ़ भी लेते हो मुझे।
फ़िज़ूल ही परवाह कर रहे थे उनकी,
पता चला है उनकी परवाह करने वाले तो हज़ारों हैं।
बड़े ख़ुशमिज़ाज लगते हो,
गिले-शिकवे, नार...और पढ़ें
कोई सच्ची नहीं लगती कोई अच्छी नहीं लगती।।
मोहब्बत नाम की शय है कोई सच्ची नहीं लगती।
लगे हैं दौड़ में सब यां ना जाने गुम कहाँ मंज़िल,,
सभी है भीड़ में अब गली कोई सच्ची नहीं लगती।
कभी तो साथ लगती हैं कभी वो दूर...और पढ़ें