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Coronavirus: क्या होता है इम्यूनिटी पासपोर्ट? जानें कोरोना वायरस से जुड़े ऐसे ही अन्य जरूरी सवालों के जवाब
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Tue, 11 Aug 2020 02:47 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस ने लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। दुनियाभर में इसके संक्रमण के मामले बढ़कर एक करोड़ 97 लाख के पार हो गए हैं। वहीं मरने वालों की संख्या भी सात लाख 28 हजार के पार हो चुकी है। हालांकि राहत की बात ये है कि लाखों लोग इस बीमारी से ठीक भी हो चुके हैं। इस महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर झटका लगा है। हालांकि कुछ महीने पहले अलग-अलग देशों में आर्थिक गतिविधियों को बहाल किए जाने के रास्तों को लेकर चर्चा जोरों पर थी। इसके लिए पहले हर्ड इम्यूनिटी की अवधारणा सामने आई थी और फिर बाद में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली आबादी की पहचान कर उन्हें चिह्नित करने के लिए इम्यूनिटी पासपोर्ट जारी करने का आइडिया सामने आया था। आइए जानते हैं क्या होता है इम्यूनिटी पासपोर्ट, साथ ही कोरोना वायरस से जुड़े ऐसे ही अन्य जरूरी सवालों के जवाब।
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Immunity passport
- फोटो : Twitter/Air
इम्यूनिटी पासपोर्ट क्या होता है?
- दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'बेल्जियम, स्वीडन में ज्यादा लंबा लॉकडाउन नहीं लगाया गया, यह सोच कर कि बहुत ज्यादा लोग संक्रमित होंगे और खुद ही हर्ड इम्यूनिटी बन जाएगी। अगर किसी को कोरोना हुआ और किसी में अच्छी तरह एंटीबॉडी बन गए हैं, तो उन्हें इम्यूनिटी पासपोर्ट दिया जाता है। लेकिन अभी एंटीबॉडी को लेकर कुछ भी कहा नहीं जा सकता है कि ये कितने दिन तक शरीर में रहते हैं, इसलिए हर्ड इम्यूनिटी या इम्यूनिटी पासपोर्ट पर बात करना प्रामाणिक नहीं है।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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WHO ने इम्यूनिटी पासपोर्ट को लेकर दी थी चेतावनी
- कुछ महीने पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इम्यूनिटी पासपोर्ट को लेकर देशों को चेतावनी दी थी और कहा था कि इसपर इतना भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि जिन लोगों में संक्रमण से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी विकसित हो गए हैं, वो दोबारा संक्रमित नहीं होंगे। डब्ल्यूएचओ का कहना था कि इम्यूनिटी पासपोर्ट से लोग एहतियात के प्रति लापरवाह हो सकते हैं, जिससे संक्रमण के और बढ़ने का खतरा हो सकता है।
Coronavirus mask
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क्या बिना मास्क लगाए बात करने से भी संक्रमण हो सकता है?
- इस बारे में डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'हां, कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा आमने-सामने बात करने से ही फैलता है। इसलिए किसी से भी आमने-सामने होकर बात न करें। अगर किसी को खांसी आ रही है तो उससे दूरी बनाकर रहें, क्योंकि उस व्यक्ति के मुंह से निकलने वाले वायरस के कण से आप भी संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि मास्क लगाकर रहें।'
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Coronavirus effects
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क्या कोरोनावायरस का असर दिमाग पर भी हो रहा है?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी के मुताबिक, 'जिस तरह टीबी केवल फेफड़ों में नहीं बल्कि पेट या दिमाग में भी हो सकता है, उसी तरह कोरोना वायरस भी दिमाग में असर कर सकता है। कई बार ज्यादा संक्रमण होने पर वायरस दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। इससे लोगों में सूंघने की क्षमता खत्म हो जाती है या उन्हें स्वाद नहीं आता है। ये सब तभी होता है जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है। दिमाग में क्लॉटिंग (थक्के) भी हो सकती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा भी रहता है।'
