Covid-19: कोरोना से ठीक हो चुके कितने लोगों को हो रही लॉन्ग कोविड की समस्या, क्या बच्चे भी हो रहे हैं शिकार?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हर 100 कोविड रोगियों में से लगभग 6 में संक्रमण के ठीक होने के बाद भी लॉन्ग कोविड की स्थिति विकसित होती है।
- एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि संक्रमण का शिकार रहे बच्चे भी लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकते हैं।
विस्तार
Long Covid: कोरोना का संक्रमण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। साल 2019 के आखिरी के हफ्तों से शुरू हुई कोरोना महामारी अब भी जारी है। हाल के महीनों में कई देशों में संक्रमण की एक और लहर देखी गई। भारतीय आबादी पर भी इसका गंभीर असर दिखा। दो हफ्तों के भीतर ही कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई, हालांकि अब इसमें धीर-धीरे सुधार देखा जा रहा है।
24 जून (मंगलवार) को कोरोना के जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल एक्टिव केस 4089 बने हुए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में संक्रमण से तीन लोगों की मौत हुई है, ये मामले महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश से रिपोर्ट किए गए हैं। मृतकों की औसत आयु 60 साल की है, सभी को पहले से कोई न कोई कोमोरबिडिटी थी। इस साल अब तक देश में कोरोना से मृतकों के मामले बढ़कर 127 हो गए हैं।
कोरोना के जारी वैश्विक जोखिमों के बीच विशेषज्ञों की टीम लॉन्ग कोविड और इसके कारण होने वाली समस्याओं को लेकर भी अलर्ट करती रही है। इसके स्वास्थ्य पर गंभीर और दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को लेकर सावधान किया जाता रहा है।
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कितने लोग हो रहे हैं लॉन्ग कोविड का शिकार?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया कि हर 100 कोविड रोगियों में से लगभग 6 में समय के साथ लॉन्ग कोविड की स्थिति विकसित होती है, जिसके लक्षण वायरल संक्रमण के खत्म होने के बाद भी महीनों तक बने रहते हैं। कुछ रोगियों में इसके कारण दीर्घकालिक लक्षण विकसित होने के भी खतरे देखे जाते रहे हैं जो जोखिमों को और भी बढ़ा देता है।
"It is therefore with great hope that I declare #COVID19 over as a global health emergency," said WHO Director General @DrTedros two years ago.
— World Health Organization (WHO) (@WHO) May 8, 2025
This decision was made over 1000 days after WHO first learned of the disease, during which the world was upended by the coronavirus.… pic.twitter.com/qAb3Ks9S4c
करीब दो साल पहले कोरोना की इसी तरह की स्थिति को देखते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
बच्चे भी लॉन्ग कोविड का हो सकते हैं शिकार
कोरोना के दीर्घकालिक जोखिमों में हृदय स्वास्थ्य, मेंटल हेल्थ की समस्याओं को लेकर पहले के कई अध्ययनों में भी बताया जाता रहा था, हालांकि एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि संक्रमण का शिकार रहे बच्चे भी लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकते हैं। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ये है कि ये समस्या बच्चों की सेहत को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है।
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बच्चों में लंबे समय तक कोरोना के दुष्प्रभाव
शोधकर्ताओं ने विभिन्न आयु समूहों, विशेष रूप से छोटे बच्चों में लंबे समय तक कोरोना के दुष्प्रभावों के लक्षण बने रहने के बारे में जानकारी दी है।
वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रोफेसर एमी सैलिसबरी और रिसर्चिंग कोविड टू एन्हांस रिकवरी पहल का हिस्सा रहीं प्रोफेसर पेट्रीसिया किन्सर ने बताया कि कोविड-19 बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों को लंबे समय तक प्रभावित करता है।
जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि छोटे बच्चों में लॉन्ग कोविड के कारण कई तरह की समस्याएं देखी जा रही हैं जिनमें सोने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, सूखी खांसी और ऊर्जा में कमी सबसे आम है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि बच्चों में लॉन्ग कोविड की समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। लॉन्ग कोविड के लक्षण बच्चों के खेलने या दूसरों के साथ बातचीत करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर उनके संपूर्ण विकास पर देखा जाता रहा है। बच्चे के लक्षणों को समझना माता-पिता, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए जरूरी है ताकि इन जोखिमों से बचाव किया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर आपके बच्चे को भी पहले कोरोना का संक्रमण रह चुका है तो एहतियातन डॉक्टर से मिलकर स्वास्थ्य की जांच जरूर करा लें।
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स्रोत
Characterizing Long COVID Symptoms During Early Childhood
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