क्या आपको भी सांस लेने में तकलीफ होती है, सीने में जकड़न, खांसी और सांस से सीटी जैसी आवाज आती है? ये अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। कभी अस्थमा और सांस की बीमारियों को बुजुर्गों की समस्या के रूप में जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चों में भी ये दिक्कत देखी जा रही है।
Asthma Risk: कहीं आपको भी तो नहीं है अस्थमा? सांस में दिक्कत के अलावा इन लक्षणों पर भी दें ध्यान
Asthma Ki Kya Pahchan Hoti Hai: अस्थमा एक क्रॉनिक सांस की बीमारी है, जिसमें श्वसन नलियां सूजकर संकरी हो जाती हैं। इसके कारण सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, खांसी की समस्या होती है। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
जानलेवा हो सकती है अस्थमा की समस्या
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक अस्थमा एक क्रॉनिक बीमारी है, जिससे अनुमानित 26-36 करोड़ लोग प्रभावित हैं। इसके कारण हर साल 4.40 लाख से ज्यादा मौतें हो जाती हैं। बच्चों में यह सबसे आम पुरानी बीमारी है, हालांकि इसका खतरा सभी उम्र के लोगों में हो सकता है। अस्थमा को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल रहता है कि आखिर इस बीमारी की शुरुआत कैसे होती है?
- मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बढ़ता प्रदूषण, खराब लाइफस्टाइल, एलर्जी और कई आनुवांशिक स्थितियां इस रोग को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
- शहर में रहने वाले बच्चों में इसका खतरा गांवों के मुकाबले ज्यादा देखा गया है।
- अगर माता-पिता में से किसी एक को अस्थमा है, तो बच्चे में इसका खतरा 25-30% तक बढ़ जाता है।
- सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई लोग इसे सामान्य खांसी या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अस्थमा आखिर होती कैसे है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्थमा का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि कई स्थितियां इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को बीमारी रही है उनमें धूल-धुआं, पालतू जानवरों के बाल, पराग और ठंडी हवा जैसी स्थितियां खतरे को बढ़ाने वाल हो सकती हैं।
- अस्थमा सांस की नलियों में सूजन पैदा करके उनको संकरा बना देती है। यह सूजन इम्यून सिस्टम की ओवररिएक्शन के कारण होती है।
- सांस का रास्ता पतला होने के कारण सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है।
- जब कोई एलर्जन जैसे धूल या धुआं शरीर में प्रवेश करता है, तो इम्यून सिस्टम उसे खतरनाक मानकर प्रतिक्रिया करता है। इससे सांस नली में सूजन, बलगम बढ़ता और मांसपेशियों में सिकुड़न आती है।
- बचपन में बार-बार होने वाले वायरल संक्रमण भी फेफड़ों को कमजोर कर सकते हैं, जिससे अस्थमा का जोखिम बढ़ता है।
अस्थमा की पहचान क्या है?
अस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। सांस लेने में तकलीफ होना, खासतौर पर रात में या सुबह के समय इसकी सबसे आम पहचान है।
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आती है।
- लगातार खांसी भी अस्थमा का संकेत हो सकती है।
- सीने में जकड़न भी अस्थमा के मरीजों में अक्सर देखी जाती रही है।
कैसे करें इससे बचाव?
अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वालों में अस्थमा और सांस की अन्य समस्याओं का खतरा अधिक होता है। गर्भावस्था के दौरान मां का धूम्रपान करना भी बच्चे में अस्थमा का खतरा बढ़ाता है। इसके अलावा मोटापा, ठंडी हवा, स्ट्रेस और कुछ दवाएं भी अस्थमा को ट्रिगर कर सकती हैं। ऐसी स्थितियों से बचाव करते रहना जरूरी है।
- हल्का व्यायाम करना फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी चीजों को डाइट में शामिल करने से भी लाभ मिलता है। ठंडी चीजों से बचाव जरूरी है।
- डॉक्टर द्वारा दी गई इनहेलर दवाएं सूजन को कम करती हैं और अस्थमा अटैक से बचाती हैं।
- सही उपचार और लाइफस्टाइल को ठीक रखकर अस्थमा अटैक की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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