WHO Alert: दुनिया की 64% आबादी एचएसवी की चपेट में, पर ज्यादातर को इसकी भनक तक नहीं, जानिए क्या हैं इसके खतरे
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि 50 वर्ष से कम उम्र के करीब 3.8 अरब लोग, यानी दुनिया की लगभग 64 प्रतिशत आबादी, एचएसवी-1 वायरस से संक्रमित है। इसमें से बड़ी संख्या में लोगों को अपने संक्रमण के बारे में पता ही नहीं है।
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संक्रामक बीमारियां वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाती जा रही हैं। ये लाखों लोगों की मौत का कारण भी बनती हैं। हालांकि चिंता तब और बढ़ जाती है जब आप इनका शिकार हों पर आपको इसकी जानकारी ही न हो। वायरस आपके शरीर में मौजूद हो और आपको इसकी भनक तक न लगे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचो) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ऐसे ही एक वायरस को लेकर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचो ने चिंता जताई है कि दुनिया में अरबों लोग हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी-1) के साथ जी रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या को यह तक पता नहीं कि उनके शरीर में यह वायरस मौजूद है।
इस संक्रमण को लेकर चिंता की बात ये भी है अक्सर लोग हर्पीज का नाम सुनते ही इसे केवल यौन संबंधों से जुड़ी बीमारी मान लेते हैं। जबकि हर बार सिर्फ यही एक कारण नहीं माना जाता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के बावजूद हर्पीज के बारे में आज भी समाज में झिझक, डर और कई तरह की गलत धारणाएं हैं।
आइए इस संक्रामक रोग के बारे में विस्तार से जान लेते हैं कि असल में ये कितना खतरनाक हो सकता है?
करोड़ों लोगों में हर्पीज का संक्रमण
डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि 50 वर्ष से कम उम्र के करीब 3.8 अरब लोग एचएसवी-1 वायरस से संक्रमित है। ये दुनिया की लगभग 64 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। वहीं 15-49 वर्ष की उम्र के लगभग 52 करोड़ लोगों (13 प्रतिशत) में एचएसवी-2 वायरस का संक्रमण देखा गया है।
- गौरतलब है कि एचएसवी-1वायरस मुख्य रूप से मुंह के आसपास होने वाले हर्पीज (कोल्ड सोर्स) जबकि एचएसवी-2 ज्यादातर जननांगों (प्राइवेट पार्ट्स) में होने वाले हर्पीज का कारण बनता है।
इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने मई 2025 में जारी अपनी वैश्विक गाइडलाइन में बताया था कि दुनियाभर में अरबों लोग हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) से संक्रमित हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनके शरीर में यह वायरस मौजूद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने के बावजूद हर्पीज के बारे में आज भी समाज में झिझक, डर और कई तरह की गलत धारणाएं हैं।
लोग क्यों रह जाते हैं इससे अनजान
हर्पीज के तेजी से फैलने और लोगों के इससे अनजान रह जाने का सबसे बड़ा कारण यही है कि अक्सर संक्रमित लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई ही नहीं देते। उन्हें यह एहसास तक नहीं होता कि वे इस वायरस से संक्रमित हैं।
- सबसे अहम बात यह है कि यदि शरीर पर कोई छाला या घाव दिखाई न दे, तब भी वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। यानी संक्रमित व्यक्ति अनजाने में अपने यौन साथी को संक्रमण दे सकता है।
- लक्षण वाले लोगों में अक्सर झुनझुनी, जलन या खुजली से होती है।
- इसके बाद उस जगह पर दर्द वाले छोटे-छोटे पानी भरे फफोले बन सकते हैं। बाद में ये फफोले फूटकर दर्दनाक घाव का रूप ले सकते हैं।
हर्पीज के बारे में जान लीजिए
हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) एक प्रकार का वायरल संक्रमण है जिसका इलाज करके इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद यह वायरस पूरी तरह खत्म नहीं होता। यह शरीर की तंत्रिका कोशिकाओं (नर्व सेल्स) में छिपकर रहता है और समय-समय पर सक्रिय होकर दोबारा लक्षण पैदा कर सकता है।
हर बार हर्पीज होने का मतलब यौन संपर्क की समस्या नहीं है। यह मुख्यरूप से दो प्रकार (एचएसवी-1 और एचएसवी-2) का होता है।
एचएसवी-1
- यह संक्रमण अधिकतर बचपन में होता है। संक्रमित व्यक्ति को किस करने, उसके साथ खानी की चीजें या बर्तन जैसी चीजें साझा करने से यह फैल सकता है। इस संक्रमण के कारण आमतौर मुंह या होंठों के आसपास छाले (कोल्ड सोर्स) जैसी समस्या होती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार एचएसवी-1 से संक्रमित 3.8 अरब लोगों में से करीब 37.6 करोड़ (10 प्रतिशत) लोगों में संक्रमण जननांगों में पाया गया।
एचएसवी-2
- एचएसवी-2 यौन संबंध के जरिए फैलता है और जननांगों में होने वाले हर्पीज का सबसे बड़ा कारण है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह संक्रमण महिलाओं में लगभग दोगुना ज्यादा पाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ इसके मामलों की संख्या बढ़ती जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा नए संक्रमण किशोरों और युवा वयस्कों में देखे जाते हैं।
हर्पीज से क्या खतरे हैं?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ज्यादातर लोगों में हर्पीज गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इससे गंभीर जटिलताएं हो सकती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि संक्रमित व्यक्ति बिना किसी लक्षण के भी वायरस दूसरों तक पहुंचा सकता है। इससे संक्रमण लगातार फैलता रहता है।
इससे पहले भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक रिपोर्ट में चिंता जताई थी कि भारत में हर नौ में से एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी का शिकार पाया जा रहा है। यहां लोगों में हेपेटाइटिस ए, इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, हर्पीज, श्वसन बीमारियों का खतरा देखा जा रहा है जिसको लेकर विशेषज्ञों ने सावधान किया है।
शरीर के कई अंगों पर हो सकता है इसका असर
हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) का शरीर पर कई तरह से असर हो सकता है।
- मुंह और चेहरे: ओरल हर्पीज इन्फेक्शन से होंठों पर और मुंह के आस-पास छाले हो जाते हैं। कुछ लोगों में पहली बार इन्फेक्शन होने पर 'हर्पेटिक जिंजिवोस्टोमाटाइटिस' (मुंह के अंदर छाले और अन्य लक्षण) हो सकता है। कभी-कभी, नाक के ऊपर या अंदर भी छाले हो जाते हैं।
- जननांग: जेनिटल हर्पीज इन्फेक्शन से जननांग वाले हिस्से में छाले हो जाते हैं।
- एचएसवी आपकी उंगलियों (हर्पेटिक विटलो) या शरीर पर कहीं भी त्वचा को संक्रमित कर सकता है।
- एक्जिमा हर्पेटिकम, त्वचा का एक व्यापक इन्फेक्शन है।
- एचएसवी आंखों में गंभीर इन्फेक्शन पैदा कर सकता है जिसे 'हर्पीज केराटाइटिस' कहा जाता है।
- एचएसवी आपके मस्तिष्क (हर्पीज सिम्प्लेक्स एन्सेफलाइटिस) या मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आस-पास की सुरक्षात्मक परतों (हर्पीज मेनिन्जाइटिस) को संक्रमित कर सकता है।
- यदि एचएसवी मस्तिष्क और उसकी सुरक्षात्मक परतों दोनों को संक्रमित करता है, तो 'हर्पीज मेनिंगोएन्सेफलाइटिस' जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
इससे बचाव के क्या तरीके हैं?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हर्पीज से पूरी तरह बचाव का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
- यदि किसी व्यक्ति को मुंह या जननांगों में हर्पीज के छाले हैं, तो उनके पूरी तरह ठीक होने तक किस करने और यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए।
- यौन संबंधों के दौरान कंडोम का नियमित और सही तरीके से उपयोग संक्रमण का खतरा कम कर सकता है, हालांकि यह 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं देता क्योंकि वायरस आसपास की त्वचा से भी फैल सकता है।
- यदि किसी व्यक्ति को बार-बार हर्पीज होता है, तो डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाएं लेने से संक्रमण दोबारा होने और दूसरों तक फैलने का जोखिम कम किया जा सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति के तौलिया, लिप बाम, रेजर, टूथब्रश या अन्य व्यक्तिगत सामान साझा करने से बचें, खासकर यदि मुंह के आसपास सक्रिय छाले हों।
- इसके अलावा अच्छी नींद, संतुलित आहार, तनाव कम करने वाले उपाय इम्युनिटी मजबूत रखने और बार-बार संक्रमण होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
- यदि हर्पीज के लक्षण दिखाई दें, तो बिना शर्म या झिझक के डॉक्टर से जांच और उपचार कराना सबसे सुरक्षित कदम है।
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स्रोत:
Estimated 3.8 billion people under age 50 (64%) globally have herpes simplex virus type 1
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