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शारदीय नवरात्रि 2026: यूपी के इस जिले में है मां कूष्मांडा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर, आज करें दर्शन

Wed, 14 Oct 2026 02:25 PM IST
सोनिया चौहान लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनिया चौहान Updated Wed, 14 Oct 2026 02:25 PM IST
सार

 Kushmanda Devi Most Famous Temple: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर कस्बे में मां कूष्मांडा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जिसकी अपनी अलग मान्यता और कहानी है।

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The most famous temple of goddess kushmanda is located kanpur in this district of UP
मां कूष्मांडा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Kanpur Kushmanda Devi Most Famous Temple: हिंदू मान्यताओं में मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार और अपनी दिव्य ऊर्जा से संसार को प्रकाश देने वाली देवी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि मां की आराधना से मनोबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर कस्बे में एक ऐसी जगह है, जो किसी अजूबे से कम नहीं है। इस मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी अनोखी बातें जो सच में हैरान करने वाली हैं।

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इस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली बात यहां मौजूद माता की पिंडी है, जिससे बारह महीने पानी रिसता रहता है। यह पानी अंदर से कहां से आ रहा है, यह आज तक एक अनसुलझी पहेली है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि अगर कोई भी व्यक्ति लगातार 6 महीने तक इस बहते हुए जल को अपनी आंखों में लगाए, तो न सिर्फ आंखों से जुड़े बड़े से बड़े रोग ठीक हो जाते हैं, बल्कि खोई हुई रोशनी भी वापस लौट आती है।

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यहां माता की जो पिंडी है, वह पूरी दुनिया में अपने आप में इकलौती मानी जाती है। चतुष्टय यानी चार कोनों वाले आकार की इस पिंडी के दो मुख हैं। यह जमीन पर कुछ इस तरह लेटी हुई अवस्था में दिखाई देती है कि इसका कोई ओर-छोर ही समझ नहीं आता। आमतौर पर मंदिरों में भगवान की सेवा पुजारी, पंडित या साधु-संत करते हैं, लेकिन कुष्मांडा माता मंदिर की यह परंपरा सबसे अलग है। सैकड़ों वर्षो से यहां देवी मां को कपड़े पहनाने, उनका मनमोहक शृंगार करने और भोग लगाने की पूरी जिम्मेदारी मालिन ही निभाती आ रही हैं।

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बता दें, यहां रोज बड़ी संख्या में लोग आते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी कूष्मांडा की सेवा करते हैं। श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर मां कुष्मांडा को मुख्य रूप से कच्चे चने का भोग लगाते हैं। इसके साथ ही देवी मां को 'कुम्हड़ा' बहुत पसंद है, इसलिए मंदिर में कुम्हड़े की बलि देने की भी खास परंपरा है।

 

 


मां कूष्मांडा के इस प्रसिद्ध मंदिर में जाने से पहले दर्शन का समय वहां रुकने की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। नवरात्रि या प्रमुख त्योहारों के दौरान यहां भीड़ काफी बढ़ सकती है। 

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