सब्सक्राइब करें

Nirjala Ekadashi 2026 Live: 24 एकादशियों का फल देने वाला निर्जला व्रत आज, जानें मुहूर्त, उपाय और दान का महत्व

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 25 Jun 2026 10:51 AM IST
विज्ञापन
खास बातें

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Parana Time Katha in Hindi:  निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसा व्रत है, जिसे धर्म शास्त्रों में सबसे अधिक पुण्यदायी माना गया है। इसे पांडव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। निर्जला एकादशी ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इस पावन दिन कर्क राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। इस लाइव ब्लॉग में जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन से जुड़े हर अपडेट से।

Nirjala Ekadashi 2026 Live Ekadashi Puja Vidhi Parana Time Daan Upay and Vrat Katha in Hindi
Nirjala Ekadashi 2026 Live - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

लाइव अपडेट

12:47 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 LIVE: निर्जला एकादशी पर करें एकादशी मां की आरती

ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ओम जय एकादशी माता।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ओम।।
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ओम।।
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ओम ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ओम ।।
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ओम ।।
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ओम ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ओम ।।
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ओम ।।
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ओम ।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ओम ।।
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ओम ।।
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ओम ।।
.परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।। ओम ।।
.
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ओम ।।

 

11:58 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण का समय

  • धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा।
  • पारण का शुभ समय- 26 जून, सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक
  • इसी समय व्रत समाप्त कर भोजन और जल ग्रहण करना शुभ माना गया है।
11:35 AM, 25-Jun-2026

निर्जला एकादशी पर इन 5 चीजों का करें दान

  • ज्येष्ठ माह में भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में सभी लोगों को प्यास से राहत देने के लिए जल से भरा घड़ा का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे जीवन में भगवान विष्णु की कृपा और पुण्य की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। गर्मी के मौसम में लोग गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं इस कारण से सत्तू का दान करना बहुत ही अच्छा और शुभ होता है। 
  • हिंदू धर्म में गुड़ के दान करने का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में गुड़ दान करने से सुख-समृद्धि और शुभ फलो की प्राप्ति होती है। एकादशी और गुरुवार के संयोग में गुड़ का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। 
  • निर्जला एकादशी पर भीषण गर्मी से बचने के लिए गर्मी से राहत देने के लिए इस दिन छाता और हाथ का पंखा दान करना शुभ होता है।
  • निर्जला एकादशी पर गरीबों और जरूरतमंद लोगों को कपड़े, फल और अन्न का दान करना बहुत ही पुण्य का काम होता है। इससे जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 
11:16 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत कथा - फोटो : AI
धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी माता कुंती और उनके चारों भाई नियमित रूप से व्रत, स्नान और दान करते हैं, लेकिन वे स्वयं उपवास नहीं कर पाते। उन्हें चिंता थी कि बिना व्रत किए उन्हें मोक्ष कैसे प्राप्त होगा। भीमसेन ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि उन्हें अत्यधिक भूख लगती है, इसलिए वे उपवास रखने में असमर्थ हैं।

इस पर वेदव्यास जी ने उन्हें समझाया कि यदि वे स्वर्ग और नरक का अंतर जानते हैं, तो उन्हें प्रत्येक माह आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत करना चाहिए। उस दिन अन्न का सेवन न करना ही व्रत का नियम है। लेकिन भीमसेन ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए बिना भोजन के रहना संभव नहीं है, क्योंकि उनके पेट में ‘वृक’ नाम की अग्नि है, जो भोजन से ही शांत होती है।

तब उन्होंने विनम्रता से निवेदन किया कि उन्हें ऐसा कोई एक व्रत बताया जाए, जिसे साल में केवल एक बार करके सभी पापों से मुक्ति मिल सके और मोक्ष की प्राप्ति हो। इस पर वेदव्यास जी ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे निर्जला एकादशी कहा जाता है, ऐसा ही व्रत है। इस दिन न अन्न ग्रहण करना होता है और न ही जल। यदि गलती से भी जल पी लिया जाए, तो व्रत का फल नहीं मिलता।


इस व्रत का पालन सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान, दान-पुण्य करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। जो व्यक्ति इस व्रत को विधि-विधान से करता है, उसे वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यह सुनकर भीमसेन प्रसन्न हुए और उन्होंने निर्जला एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया। भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद द्वादशी के दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें श्रीहरि की कृपा प्राप्त हुई, उनके सभी पाप नष्ट हो गए और अंततः उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई।
 
10:49 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026: पढ़ें विष्णु जी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥


Nirjala Ekadashi 2026: 5 बड़े संयोग में निर्जला एकादशी, पढ़ें विष्णु जी की आरती, चालीसा और मंत्र
10:40 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आयु और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा यह व्रत कई जन्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करने में भी सहायक माना जाता है। इसी वजह से इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करने की सलाह दी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
10:26 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: व्रत न रख पाएं तो अपनाएं ये सरल तरीका

यदि किसी कारणवश आप निर्जला एकादशी का कठिन व्रत यानी पूरी तरह जल त्याग करके व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में आप फलाहारी व्रत का विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें दिन भर फल, जूस और दूध जैसी चीजें ली जा सकती हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान सिर्फ भक्त की सच्ची श्रद्धा और भावना देखते हैं, न कि व्रत की कठोरता को। इसलिए अपनी सेहत को जोखिम में डालकर निर्जल व्रत करना बिल्कुल आवश्यक नहीं है।
10:15 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए 'निर्जला' व्रत?

धार्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से कुछ लोगों को निर्जला एकादशी का कठोर निर्जल व्रत नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को यह व्रत करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी निर्जल उपवास उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, मधुमेह, ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी यह व्रत नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें समय पर दवा और भोजन की आवश्यकता होती है।
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत में किन परिस्थितियों में पी सकते हैं पानी? जानें व्रत के नियम
10:03 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये अचूक उपाय

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और पीले फल अर्पित करना शुभ माना जाता है और बाद में इन्हें दान कर देना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए, साथ ही ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते न तोड़ें। मुख्य द्वार और घर के ईशान कोण में भी घी का दीपक जलाना चाहिए, जिसमें हल्दी या केसर मिलाना शुभ होता है। यदि कोई व्यक्ति निर्जला व्रत नहीं रख पाता है, तो वह विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकता है। इसके अलावा, इस दिन प्याऊ में पानी की व्यवस्था करना या मटका, शक्कर और खरबूजा दान करना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
09:31 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्पित करें ये फूल

 

  • निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • पीले फूल भगवान विष्णु को विशेष प्रिय माने जाते हैं।
  • पूजा में पीला कमल, गेंदा, चंपा, चमेली, गुलाब और पारिजात (हरसिंगार) अर्पित किए जा सकते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष और अनिवार्य महत्व होता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा 24 एकादशी व्रत का फल!

Load More
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed