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West Asia Tension LIVE: टकराव ने लिया नया मोड़? इरानी हमले में चीनी कंपनी की इमारत क्षतिग्रस्त, एक की मौत
West Asia Tension LIVE Updates US Iran War: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक नए चरण में पहुंचता दिख रहा है। सऊदी अरब के सार्वजनिक रूप से ईरान समर्थित गुटों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने और कूटनीतिक प्रयासों के फिर ठप पड़ने से क्षेत्र में हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। पिछले 24 घंटों में दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों ने व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पश्चिम एशिया में शांति कब बहाल होगी। अमेरिका-ईरान की जंग, युद्ध में इस्राइल की भूमिका और खाड़ी देशों के रवैये से जुड़े तमाम अपडेट्स अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें...
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इरानी हमले में चीनी कंपनी की इमारत क्षतिग्रस्त, एक की मौत, रिपोर्ट
कुवैत की सेना के अनुसार, उत्तरी कुवैत में चीनी कंपनी की एक इमारत पर इरानी मिसाइल हमला हुआ है। इस हमले में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और वहां काम कर रहे एक कर्मचारी की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बीच सामने आई है।
अमेरिका के हवाई हमलों में बुशेहर प्रांत को बनाया गया निशाना: ईरान का दावा
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी प्रांत बुशेहर को निशाना बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, रात के समय कई शहरों के आसपास अमेरिकी सेना ने हवाई हमले किए।बुशेहर के एक अधिकारी ने बताया कि हवाई हमले बुशेहर, जाम और खोर्मोज शहरों के आसपास के इलाकों में किए गए। आईआरआईबी के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि इन हमलों के बाद किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बुशेहर प्रांत में ईरान का एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है।
ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला, मिसाइल हमले के जवाब में दागे बम
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान द्वारा दागे गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांड सेंटरों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान के केशम द्वीप और खुजेस्तान प्रांत में जोरदार धमाकों की खबर है।इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बहुत बढ़ गया है। समुद्र में दो प्राकृतिक गैस जहाजों पर भी ड्रोन से हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके अलावा सऊदी अरब के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। क्षेत्रीय देश दोनों देशों के बीच शांति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं।
ट्रंप ने फिर दी ईरान को धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया गया, तो अमेरिका पूरी ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा, हम उन्हें बुरी तरह जवाब देंगे। हम उन पर जोरदार हमला करेंगे। उन्हें कड़ी मार झेलनी पड़ेगी।ईरान में हवाई हमलों के साथ-साथ मंगलवार देर रात अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर संयुक्त हवाई हमले भी किए। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) ने बताया कि इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई।
सेंटकॉम ने पुष्टि की कि इस संयुक्त अभियान में पूर्वी इराक में मौजूद हथियारों के गोदामों और सैन्य सामान रखने वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इससे पहले तीन दिनों में ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले किए थे। इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई से पहले सऊदी अरब ने कहा था कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के पूर्वी प्रांत में तेल प्रतिष्ठानों की ओर भेजे गए कई ड्रोन मार गिराए थे। सऊदी अरब ने इन ड्रोन हमलों के लिए इराक में मौजूद ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिका-सऊदी हमलों में इराक में आईआरजीसी के 4 सदस्य मारे गए: ईरानी मीडिया का दावा
अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में इराक के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कम से कम चार सदस्य मारे गए। ईरानी सरकारी मीडिया ने यह दावा किया है।ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तरी दियाला प्रांत में रातभर हुई बमबारी में आईआरजीसी के अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मोर्तेजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया कि ये चारों ईरान के मध्य हिस्से में स्थित काशान शहर के रहने वाले थे। हालांकि, उनकी सैन्य जिम्मेदारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर किए हवाई हमले
अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के अंदर कई ठिकानों पर फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए। एक्सिओस ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। इससे पहले कुछ समय के लिए ये सैन्य अभियान रोका गया था। ये नए हवाई हमले उस घटना के बाद शुरू हुए हैं, जब इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने बताया कि सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया और कोई भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। सेंटकॉम ने इस हमले को पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी ठिकानों पर 'अचानक हमला करने की कोशिश' बताया। उसने कहा कि ये मिसाइलें ईरान की जमीन से दागी गई थीं।
हालांकि, सेना ने उस सैन्य अड्डे का नाम नहीं बताया, लेकिन एक्सिओस समेत अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने जानकारी दी कि निशाना जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डा था। यह पहली बार है, जब अमेरिका की ओर से ईरान पर हवाई हमले रोककर बातचीत का मौका देने के बाद, ईरान ने सीधे किसी अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इस तनाव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को इसका कड़ा जवाब मिलेगा।
सऊदी अरब-अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थकों पर किए हमले, 20 की मौत
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर भड़क गया है। ईरान ने बुधवार तड़के जॉर्डन पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें जॉर्डन की सेना ने हवा में ही नष्ट कर दिया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुख्यालय को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। हमले के कुछ घंटे बाद अमेरिकी सेना ने सऊदी अरब के साथ मिलकर मंगलवार रात इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर हमले किए। इराकी सेना के अधीन आने वाले ईरान समर्थित समूहों के संगठन पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस ने कहा कि इन हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए और 32 घायल हो गए। इस बीच इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई और बृहस्पतिवार को अपना सऊदी अरब का दौरा टाल दिया है।सऊदी अरब की एंट्री से संघर्ष और बढ़ा?
ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसे ट्रंप के अनुसार बीच रास्ते में ही रोक लिया गया। इसी बीच सऊदी अरब ने भी अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित समूहों के कई लॉजिस्टिक और हथियार ठिकानों पर कार्रवाई की। यह पहली बार है जब अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त रूप से ऐसे हमलों की सार्वजनिक घोषणा की है। इससे पहले सऊदी अरब पर ड्रोन हमले भी हुए थे, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। उधर, मिस्र के एक बंदरगाह पर प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो जहाजों में ड्रोन हमलों के बाद आग लग गई। यदि यह हमला ईरान या उसके सहयोगियों की ओर से किया गया पाया जाता है तो यह संघर्ष के और विस्तार का संकेत होगा।क्या बढ़ते संघर्ष से ट्रंप पर भी दबाव बढ़ रहा है?
लगातार सैन्य कार्रवाई ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। यह संघर्ष कई अमेरिकी नागरिकों के बीच लोकप्रिय नहीं माना जा रहा है और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। हालिया संघर्ष में अधिक अमेरिकी सैनिक हताहत और घायल हुए हैं। साथ ही यह चिंता भी बढ़ी है कि अमेरिका अपने वायु रक्षा तंत्र के महत्वपूर्ण हथियारों के भंडार को तेजी से खर्च कर रहा है, जिनकी जरूरत उसके सैन्य अड्डों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए भी है।क्या वार्ता की संभावनाएं फिर कमजोर पड़ गई हैं?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटना चाहता है। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से उनके देश ने बातचीत दोबारा शुरू करने का कोई अनुरोध नहीं किया है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले के बाद ट्रंप ने बुधवार को एक ओर बातचीत की संभावना जताई, वहीं दूसरी ओर ईरान को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही माफी मांग ली है, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा सबक सिखाना होगा। अब हमारी बारी है। आगे किसी समझौते तक पहुंचते हैं या नहीं, यह देखा जाएगा, लेकिन हम उन पर बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे। यह पिछले कुछ महीनों की उसी स्थिति को दर्शाता है, जिसमें ट्रंप कभी समझौते के करीब होने की बात करते हैं तो कभी ईरान पर दबाव बनाने के लिए कड़े बयान देते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।