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Agar: ग्रामीणों ने लिया मतदान बहिष्कार का निर्णय, कई वर्षों से पूरी नहीं हो रही सड़क और पुलिया की मांग
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, आगर-मालवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 08 May 2024 08:27 PM IST
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सार
बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर चुनाव बहिष्कार का बैनर लगा दिया है। बैठक कर ग्रामीणों ने गांव की समस्या को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिहाज से लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है पहले हमारी मांगी पूरी होंगी, उसके बाद ही हमारे द्वारा वोट डाले जाएंगे।
आगर के एक गांव में ग्रामीणों ने इस तरह बैनर लगा दिए हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आगर-मालवा जिले के ग्राम रायपुरिया-ढंडेड़ा के मध्य में आने वाली करीब 1.5 किलोमीटर की सड़क के लिए लिए परेशान हो रहे ग्रामीणों ने अब मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब हमारी सुनवाई कोई नहीं कर रहा तो मतदान कर हमें क्यों किसी को चुनें।
इस संबंध में बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर चुनाव बहिष्कार का बैनर लगा दिया है। बैठक कर ग्रामीणों ने गांव की समस्या को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिहाज से लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है पहले हमारी मांगी पूरी होंगी, उसके बाद ही हमारे द्वारा वोट डाले जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका नजदीकी शहर कानड़ पड़ता है, लेकिन सड़क खराब होने की वजह से उन्हें 20-25 किलोमीटर का उल्टा रन कर कानड़ तक पहुंचना पड़ता है। जबकि अगर सड़क पक्की हो तो वह महज आठ किलोमीटर में ही कानड़ पहुंच सकते हैं। रायपुरिया के ग्रामीणों को आगर शहर जाना हो तो उन्हें कानड़ होकर आना पड़ेगा, करीब 30 किलोमीटर का उल्टा रास्ता पार करना पड़ेगा। जबकि अगर दोनों गांव के बीच की सड़क सही हो तो वह महज 16 किलोमीटर में ही आगर शहर पहुंच सकते हैं।
छात्र भी परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांव के बीच में कच्ची पड़ी यह सड़क छात्रों के जीवन पर भी दुष्प्रभाव डाल रही है, क्योंकि बारिश के दोनों यह सड़क पूर्ण रूप से कीचड़ भरी हो जाती है और नाला होने की वजह से सड़क पूर्ण रूप से बंद हो जाती है। इसकी वजह से छात्र ग्राम ढंडेड़ा से छात्र शिक्षा के लिए रायपुरिया तक नहीं पहुंच पाते। अगर वह कोशिश करते रायपुरिया शिक्षा के लिए पहुंच भी गए तो ज्यादा बारिश होने की वजह से नाले के पानी का लेवल बढ़ जाता है। इसकी वजह से वह वापस अपने घर नहीं लौट पाते फिर उन्हें उनके अभिभावकों द्वारा करीब 25 किलोमीटर घूम कर वाहनों से छात्रों को घर लाने के लिए पहुंचना पड़ता है।
गांववालों ने बताया कि ग्रामीणों लंबे समय से सड़क की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। यहां तक की ग्रामीणों द्वारा नेताओं एवं कलेक्ट्रेट कार्यालय के भी चक्कर काटे गए, लेकिन ग्रामीणों की कहीं भी सुनवाई नहीं की गई। ग्रामीणों द्वारा वर्षों से ग्राम रायपुरिया-ढंडेड़ा के मध्य में आने वाली 1.5 किलोमीटर की सड़क और उसके बीच आने वाली पुलिया बनाने की मांग को लेकर आवाज उठाई जा रही है। ग्रामीणों की अभी तक कहीं भी सुनवाई नहीं हुई और ना ही पुलिया बनी और ना ही सड़क बनी। ग्रामीण कहना है कि नेता आते हैं और बड़े-बड़े झूठे वादे करके चले जाते हैं और फिर अपना मुंह नहीं दिखाते। करीब दो माह तक की बच्चों की पढ़ाई इस कच्ची सड़क और नाले की वजह से बाधित होती है।
डिलीवरी वाली प्रसूताओं को आती है परेशानी
वर्षों से कच्ची पड़ी इस सड़क से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, गांव के लोग रास्ता कच्चा होने की वजह से बीमार वाली स्थिति में सही समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच सकते यह समस्या डिलीवरी वाली प्रसुताओं वाली महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरा बनी हुई है, कच्चे रास्ते की वजह से एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिसकी वजह से प्रसुताओं को अस्पताल ले जाते समय बीच में ही प्रसव हो जाता है, जिसकी वजह से प्रसूता और बच्चे की जान को बहुत खतरा बना रहता है।
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इस संबंध में बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर चुनाव बहिष्कार का बैनर लगा दिया है। बैठक कर ग्रामीणों ने गांव की समस्या को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिहाज से लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है पहले हमारी मांगी पूरी होंगी, उसके बाद ही हमारे द्वारा वोट डाले जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका नजदीकी शहर कानड़ पड़ता है, लेकिन सड़क खराब होने की वजह से उन्हें 20-25 किलोमीटर का उल्टा रन कर कानड़ तक पहुंचना पड़ता है। जबकि अगर सड़क पक्की हो तो वह महज आठ किलोमीटर में ही कानड़ पहुंच सकते हैं। रायपुरिया के ग्रामीणों को आगर शहर जाना हो तो उन्हें कानड़ होकर आना पड़ेगा, करीब 30 किलोमीटर का उल्टा रास्ता पार करना पड़ेगा। जबकि अगर दोनों गांव के बीच की सड़क सही हो तो वह महज 16 किलोमीटर में ही आगर शहर पहुंच सकते हैं।
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छात्र भी परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांव के बीच में कच्ची पड़ी यह सड़क छात्रों के जीवन पर भी दुष्प्रभाव डाल रही है, क्योंकि बारिश के दोनों यह सड़क पूर्ण रूप से कीचड़ भरी हो जाती है और नाला होने की वजह से सड़क पूर्ण रूप से बंद हो जाती है। इसकी वजह से छात्र ग्राम ढंडेड़ा से छात्र शिक्षा के लिए रायपुरिया तक नहीं पहुंच पाते। अगर वह कोशिश करते रायपुरिया शिक्षा के लिए पहुंच भी गए तो ज्यादा बारिश होने की वजह से नाले के पानी का लेवल बढ़ जाता है। इसकी वजह से वह वापस अपने घर नहीं लौट पाते फिर उन्हें उनके अभिभावकों द्वारा करीब 25 किलोमीटर घूम कर वाहनों से छात्रों को घर लाने के लिए पहुंचना पड़ता है।
गांववालों ने बताया कि ग्रामीणों लंबे समय से सड़क की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। यहां तक की ग्रामीणों द्वारा नेताओं एवं कलेक्ट्रेट कार्यालय के भी चक्कर काटे गए, लेकिन ग्रामीणों की कहीं भी सुनवाई नहीं की गई। ग्रामीणों द्वारा वर्षों से ग्राम रायपुरिया-ढंडेड़ा के मध्य में आने वाली 1.5 किलोमीटर की सड़क और उसके बीच आने वाली पुलिया बनाने की मांग को लेकर आवाज उठाई जा रही है। ग्रामीणों की अभी तक कहीं भी सुनवाई नहीं हुई और ना ही पुलिया बनी और ना ही सड़क बनी। ग्रामीण कहना है कि नेता आते हैं और बड़े-बड़े झूठे वादे करके चले जाते हैं और फिर अपना मुंह नहीं दिखाते। करीब दो माह तक की बच्चों की पढ़ाई इस कच्ची सड़क और नाले की वजह से बाधित होती है।
डिलीवरी वाली प्रसूताओं को आती है परेशानी
वर्षों से कच्ची पड़ी इस सड़क से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, गांव के लोग रास्ता कच्चा होने की वजह से बीमार वाली स्थिति में सही समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच सकते यह समस्या डिलीवरी वाली प्रसुताओं वाली महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरा बनी हुई है, कच्चे रास्ते की वजह से एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिसकी वजह से प्रसुताओं को अस्पताल ले जाते समय बीच में ही प्रसव हो जाता है, जिसकी वजह से प्रसूता और बच्चे की जान को बहुत खतरा बना रहता है।

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